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Madras High Court ने क्यों कहा - स्कूली बच्चों की तरह है सरकारी कर्मचारी?
कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर एम्प्लॉइज यूनियन की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने ये टिप्पणी की.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने सरकारी कर्मचारियों को लेकर एक बेहद तल्ख टिप्पणी की है. एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी और स्कूली बच्चों में कोई अंतर नहीं है. जिस तरह से बच्चों की नजर स्कूल से छुट्टी के लिए सार्वजनिक अवकाशों पर रहती है, ठीक वैसे ही सरकारी कर्मचारियों की नजर हमेशा सरकारी छुट्टियों और काम से छूट पर रहती है.
क्या था याचिका में?
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन (Justice GR Swaminathan) ने यह टिप्पणी कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर एम्प्लॉइज यूनियन (Kudankulam Nuclear Power Employees Union) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की. इस याचिका में मांग की गई थी कि चूंकि कर्मचारियों से 14 अप्रैल, 2018 को आंबेडकर जयंती के मौके पर घोषित सार्वजनिक अवकाश वाले दिन काम करवाया गया था, इसलिए उन्हें दोगुना भत्ता मिलना चाहिए.
हाई कोर्ट ने दिया आदेश
हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने कर्मचारी यूनियन की याचिका पर प्रोजेक्ट के डायरेक्टर को आदेश दिया कि कर्मचारियों को सार्वजनिक अवकाश वाले दिन काम करवाने के लिए दोगुना भत्ता दिया जाए. लेकिन साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में नागरिकों की भावनाओं का सम्मान करने के लिए राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया था. डॉ. बीआर आंबेडकर भी यही चाहेंगे कि उनकी जयंती पर लोग छुट्टी मनाने के बजाये ज्यादा से ज्यादा काम करें.
शिष्टाचार हमारी पहचान
हाईकोर्ट ने कहा कि हमने भावनाओं और प्रतीकों के एक सिस्टम का पालन किया. दक्षता के बजाय शिष्टाचार में विश्वास किया. देश प्रतीकवाद और भावनाओं की बहुत परवाह करता है. जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने कहा कि कुशलता के बजाय शिष्टाचार हमारी पहचान है. भारत रत्न एपीजे अब्दुल कलाम की तरह, आंबेडकर ने भी यही कहा होगा कि मेरी मृत्यु पर छुट्टी घोषित न करें, इसके बजाय एक अतिरिक्त दिन काम करें, यदि आप मुझसे प्यार करते हैं.
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