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LIC के 31,500 करोड़ रुपये के OFS ने चौंकाए बैंकर, सरकार ने रिकॉर्ड समय में पूरी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी बिक्री

इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए LIC ने मई 2027 की तय समयसीमा से काफी पहले 10% न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की अनिवार्य शर्त भी पूरी कर ली.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचकर करीब 3.3 अरब डॉलर (लगभग 31,500 करोड़ रुपये) जुटाए. इस ऑफर फॉर सेल (OFS) की सबसे खास बात इसकी बेहद तेज और गोपनीय तरीके से हुई प्रक्रिया रही. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सौदे से जुड़े कुछ निवेश बैंकरों को भी अंतिम समय तक यह जानकारी नहीं थी कि हिस्सेदारी बिक्री का आकार कितना बड़ा होगा.

सरकार ने शुरुआत में LIC में 2.5% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी, लेकिन संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग को देखते हुए इसे बढ़ाकर 6.5% कर दिया. इस तरह यह भारत के शेयर बाजार के जरिए किया गया अब तक का सबसे बड़ा सेकेंडरी शेयर सेल बन गया.

2027 की समयसीमा से पहले पूरी हुई अहम शर्त

इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए LIC ने मई 2027 की तय समयसीमा से काफी पहले 10% न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) की अनिवार्य शर्त भी पूरी कर ली. सरकार ने शेयरों का फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया, जो पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव से करीब 11% कम था.

गोपनीयता बरतने के पीछे क्या थी वजह?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने सौदे के विस्तारित आकार की जानकारी बेहद सीमित दायरे में रखी. कुछ सलाहकारों और बैंकरों को भी अंतिम समय में ही इसकी जानकारी दी गई ताकि सूचना लीक होने से बचा जा सके और बाजार पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े. तेज निष्पादन के कारण बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव का जोखिम भी कम रहा.

विनिवेश लक्ष्य पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम

LIC की यह हिस्सेदारी बिक्री सरकार के वित्त वर्ष 2026-27 के 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य का अहम हिस्सा है. बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और सरकारी खर्च में इजाफे के कारण वित्तीय दबाव बढ़ने के बीच सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया तेज कर रही है.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया बाजार अस्थिरता के बावजूद इस OFS को संस्थागत निवेशकों से मिला मजबूत समर्थन यह दिखाता है कि बड़े सरकारी इश्यू के लिए निवेशकों की रुचि अभी भी बनी हुई है.

रिटेल निवेशकों की भागीदारी उम्मीद से कम

हालांकि संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग के चलते ग्रीनशू विकल्प पूरी तरह इस्तेमाल किया गया, लेकिन रिटेल निवेशकों की भागीदारी अपेक्षा से कम रही. व्यक्तिगत निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से में केवल लगभग 69% शेयरों के लिए ही बोलियां प्राप्त हुईं.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस हिस्सेदारी बिक्री के बाद LIC के शेयरों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ने से उनकी लिक्विडिटी बेहतर होगी और भविष्य में कंपनी को अतिरिक्त वैश्विक इक्विटी इंडेक्स में शामिल होने का भी लाभ मिल सकता है.


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