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सोने में 6-8% की गिरावट के बाद आएगी बड़ी तेजी! MOFSL ने 12-15 महीनों में 5,500 डॉलर का दिया लक्ष्य
ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा स्तर से सोने में 6-8 फीसदी की गिरावट आ सकती है. इसके बाद कीमतें पहले 4,800 डॉलर प्रति औंस और फिर 12-15 महीनों में 5,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच सकती हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 55 minutes ago
सोने की कीमतों में निकट भविष्य में 6-8 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है, लेकिन इसके बाद इसमें जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है. ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) का अनुमान है कि अगले 12-15 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. ब्रोकरेज ने निवेशकों को एकमुश्त निवेश के बजाय गिरावट के दौरान चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करने की सलाह दी है.
MOFSL ने निवेशकों को दी चरणबद्ध खरीदारी की सलाह
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) ने अपनी H1 2026 प्रेशियस मेटल्स आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि सोने की कीमतों में निकट अवधि में 6-8 फीसदी का करेक्शन देखने को मिल सकता है. हालांकि, इसके बाद अगले 12-15 महीनों में सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों को बाजार में निचला स्तर पकड़ने की कोशिश करने के बजाय कीमतों में गिरावट आने पर चरणबद्ध (Staggered) तरीके से निवेश करना चाहिए.
क्यों आ सकती है सोने में गिरावट?
MOFSL के मुताबिक, हाल के महीनों में सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारकों में बदलाव आया है. पहले भू-राजनीतिक तनाव से सोने में तेजी आती थी, लेकिन अब ऊंची महंगाई की आशंकाएं, वास्तविक ब्याज दरों (Real Interest Rates) में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने सोने की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) वाली मांग को कमजोर किया है. ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा स्तर से सोने में 6-8 फीसदी की गिरावट आ सकती है. इसके बाद कीमतें पहले 4,800 डॉलर प्रति औंस और फिर 12-15 महीनों में 5,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच सकती हैं.
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
रिपोर्ट के अनुसार, यदि डॉलर-रुपया विनिमय दर 95.5 रहती है, तो भारतीय निवेशकों के लिए 10 ग्राम सोने का 1.30 लाख से 1.33 लाख रुपये का स्तर खरीदारी के लिए उपयुक्त माना गया है. ब्रोकरेज ने मध्यम अवधि में 10 ग्राम सोने का लक्ष्य 1.68 लाख रुपये और इसके बाद 1.93 लाख रुपये तक रहने का अनुमान जताया है.
लंबी अवधि में क्यों मजबूत है सोने का आउटलुक?
MOFSL का मानना है कि अल्पकालिक कमजोरी के बावजूद सोने की लंबी अवधि की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अगले एक साल में अमेरिकी महंगाई का रुख और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले सोने की कीमतों की दिशा तय करेंगे.
ब्रोकरेज का कहना है कि जब तक वास्तविक ब्याज दरों में उल्लेखनीय गिरावट नहीं आती, तब तक सोना सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है. हालांकि, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी, विकसित देशों में बढ़ता राजकोषीय दबाव और मुद्रा के अवमूल्यन (Currency Debasement) के खिलाफ सुरक्षा के रूप में सोने की मांग लंबी अवधि में इसे मजबूती देती रहेगी.
चांदी को लेकर बरतें सतर्कता
रिपोर्ट में चांदी को लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. MOFSL के अनुसार, चांदी में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव रहता है क्योंकि इसकी कीमतें सुरक्षित निवेश की मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग, खासकर वैश्विक इलेक्ट्रिफिकेशन ट्रेंड, से भी प्रभावित होती हैं.
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