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GDP के साथ लॉ फर्म के काम भी होगा इजाफा: डॉ. अनुराग बत्रा 

डॉ. अनुराग बत्रा ने लॉ फर्म और मौजूदा कानूनी सिस्‍टम को लेकर कहा कि आज हमारे देश में 5 करोड़ से ज्‍यादा केस पेंडिंग हैं. ऐसे में जरूरत है इन्‍हें जल्‍दी से जल्‍दी कम किया जाए. 

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

BW Legal World  के Future of Legal Education World के इवेंट में बोलते हुए बिजनेस वर्ल्‍ड के एडिटर-इन-चीफ और एक्‍सचेंज4मीडिया के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा ने अपनी बात कहते हुए कई अहम बातें कही. उन्‍होंने जहां लीगल एजुकेशन को लेकर अपनी बात रखी. वहीं उन्‍होंने ये भी कहा कि पिछले 10 सालों में ग्रोथ की बात करें तो आज हमारी जीडीपी लगभग 5 ट्रिलियन की हो चुकी है. जैसे-जैसे इकोनॉमी की ग्रोथ होती है वैसे ही लीगल फर्म की भी ग्रोथ बढ़ती चली जाती है और उनकी रिक्वायरमेंट भी बढ़ती चली जाती है.

डॉ. अनुराग बत्रा ने जताया सभी का आभार
डॉ. अनुराग बत्रा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज इस कार्यक्रम से 1 दिन पहले कल हमने लॉ फॉर्म अवाॅर्ड का आयोजन किया था, जिसके चीफ गेस्ट जस्टिस मदन लोकुर थे. गेस्ट ऑफ ऑनर जेसी अंसारी थे. उन्होंने कहा कि आज मैं आप लोगों के सामने एक प्रेजेंटेशन देना चाहूंगा. उन्‍होंने कहा कि किसी भी लॉ फर्म में ज्‍यादा लॉयर नहीं होते हैं. उनमें एक्सपर्ट होते हैं, कोई क्रिप्टो का एक्सपर्ट होता है, कोई गेमिंग का एक्‍सपर्ट होता है, आधी टीम एक्‍सपर्ट होती है, लॉयर कम ही होते हैं.  उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज की तारीख में कोई ऐसा बिजनेस नहीं है जो तकनीक से ना जुड़ा हुआ हो. मुझे लगता है कि लीगल डाटा को स्टडी करना भी उतना ही जरूरी है जितना लीगल टर्म्स को स्टडी करना है क्योंकि डाटा कई बार आपको इनसाइड सॉल्‍यूशन प्रोवाइड करता है. कई लीगल फर्म के ओनर मेरे जानने वाले हैं जो बताते हैं कि पिछले साल उन्होंने 6000 करोड़ से ज्यादा रेवेन्‍यू जनरेट किया है.

 

जीडीपी के साथ लॉ फर्म में भी होगा इजाफा 
डॉ. अनुराग बत्रा ने लीगल एजुकेशन पर एक प्रजेंटेशन देते हुए कई महत्‍वपूर्ण बातें कहीं. उन्‍होंने बताया कि कैसे हमारी जीडीपी में ग्रोथ हुई है,  कैसे हमारी प्रति व्‍यक्ति आय में इजाफा हुआ है, उन्होंने ऑडियंस से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या आप लोगों में से कोई बता सकता है कि आज हमारे देश में कितने मुकदमे पेंडिंग हैं. उन्होंने कहा कि मैं इस बात से सरप्राइस हूं कि कल जस्टिस मदन लोकुर ने कहा कि हमारे देश में तकरीबन 50 मिलियन मुकदमे पेंडिंग हैं. हमारे देश में 50000000 केस पेंडिंग हैं. यह बहुत लार्ज नंबर है, उन्‍होंने अपने इस प्रजेंटेशन में कई अहम विषयों को उठाते हुए कहा कि लीगल प्रोफेशन के लिए रिस्पेक्ट में सुधार करने की बहुत जरूरत है. लॉयर कंपनसेशन को बढ़ाने की जरूरत है, लॉ फर्म और डायवर्सिफिकेशन के ग्रोथ की जरूरत है साथ ही जनरल काउंसिल की संख्या में भी इजाफा होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर हम अगले 10 सालों में ग्रोथ की बात करें, जिसमें आज हमारी जीडीपी लगभग 5 ट्रिलियन की हो चुकी है जैसे-जैसे इकोनॉमी की ग्रोथ होती है वैसे-वैसे भी लीगल फर्म्‍स भी ग्रोथ बढ़ती चली जाती है और उनकी रिक्वायरमेंट भी बढ़ती चली जाती है.

भारत लगातार वैल्‍यू ग्रो कर रहा है
डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत जो गुड्स की वैल्यू क्रिएट कर रहा है उसे आप देख भी सकते हैं और उसे महसूस भी कर सकते हैं. आप यूपीआई को देख सकते हैं, इन दिनों ONDC से लेकर कोविन  तक अगर हम इसी तरह से लीगल सॉल्यूशंस को भी टेक्नोलॉजी में देखें तो हो सकता है कि हम एक दिन 50 मिलीयन केसेस के पेंडेंसी को भी खत्म कर दें. डॉ. बत्रा ने कहा कि हम जानते हैं कि भारत में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्‍या अमेरिका और चीन से ज्‍यादा है. अब वह डीबीटी हो या सोशल कनेक्टिविटी हो. उन्‍होंने कहा कि ये सिलसिला यही खत्‍म नहीं होता है. हमारी अर्थव्यवस्था को जीएसटी में लाना भी अपने आप में बड़ा तकनीकी काम है. आज देश में एफडीआई में लगातार होता इजाफा 600 बिलियन डॉलर तक जा चुका है. अभी हमने देखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यूएसए में जबरदस्त स्वागत हुआ. यह उनकी लीडरशिप का कमाल है, लेकिन साथ ही हमारी टेक्नोलॉजी का भी कमाल है. हमारी देश की डॉमेस्टिक मार्केट हर किसी कंपनी के लिए एक बड़ा बाजार है. यही नहीं भारत के एक्सपोर्ट मार्केट को भी अगर देखा जाए तो उसमें भी 4.5% का इजाफा होने की उम्मीद है.

पिछले 10 सालों में लीगल सिस्‍टम में हुआ है इजाफा 
डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि लेकिन सवाल यह है कि क्या लास्ट 10 सालों में हमारे लीगल सिस्टम में सही तरीके से रिस्पांस हुआ है. उन्‍होंने कहा कि सरकार ने 100 से भी ज्यादा आउटडेटेड कानूनों को सिस्टम से बाहर कर दिया है. कई तरह के अमेंडमेंट लाए गए हैं. रेगुलेटरी अथॉरिटीज में भी सुधार हुए हैं जिनमें सीबीआई, सेबी और जीएसटी शामिल हैं. कोविड के दौरान हमने देखा कि किस तरह से वर्चुअल सुनवाई हुई थी. ऑर्बिट्रेशन के दो मकसद हैं एक तो यह कि वह आसान हो और दूसरा सस्ता हो लेकिन दोनों ही मामलों पर हम फेल हुए हैं. हमारे देश में लिटिगेशन को लंबा चलाने के पीछे मकसद यह होता है कि उससे फायदा ज्यादा होता है अच्छी बात यह है कि जब इकोनाॅमी बढ़ती है तो उसके बाद लीगल वर्क में भी इजाफा होता है. 


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