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अगर कानून का ज्ञान होगा तो लिटिगेशन भी कम होंगी : डॉ. अदीश अग्रवाल

डॉ. अदीश अग्रवाल ने कहा कि अगर हमारे कानूनी सिस्‍टम को काफी हद तक हाइब्रिड या कहें कि ऑनलाइन बनाने में कामयाब हो जाते हैं तो इसे और आसान किया जा सकता है.

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

BW Legal World  के Future of Legal Education World के इवेंट में बोलते हुए इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्‍यूरिस्‍ट लंदन के प्रेसीडेंट डॉ. अदीश अग्रवाल ने लॉ कालेजों और उनमें पढ़ाए जाने वाले कोर्स और स्‍टूडेंट को लेकर कई अहम बातें कहीं. उन्‍होंने कहा कि मुझे इस कार्यक्रम का हिस्‍सा बनकर बेहद खुशी है. डॉ. अनुराग बत्रा के पास पब्लिक लाइफ में ही नहीं बल्कि पत्रकारिता में और बिजनेस में भी बहुत अनुभव है. उन्‍होंने कहा कि जब कोई स्‍टूडेंट कोई लॉ कालेज ज्‍वॉइन करता है तो उसे ये नहीं पता होता है कि उसे क्‍या करना है. पिछले काफी दिनों से मैं अलग-अलग कॉलेजों में विजिट कर रहा हूं और और बता रहा हूं कि आखिर लॉ पास करने के बाद क्‍या करना चाहिए.

कानून के छात्र के पास होते हैं कई विकल्‍प 
डॉ. अदीश अग्रवाल ने कहा कि कानून के विद्यार्थी के लिए बहुत सारे विकल्‍प आज मौजूद हैं.  वो एक लॉयर बन सकता है जो कि कोर्ट में प्रैक्टिस करें और वह एक बतौर लॉ ऑफिसर ज्‍वॉइन कर सकता है. वह न्यायिक व्यवस्थाओं में जा सकता है और वह लोग शिक्षण के क्षेत्र में भी जा सकता है. बहुत सारा पैसा खर्च करने के बाद एक सामान्य धारणा यह है कि वह कोर्ट में प्रैक्टिस करेंगे पर मैं दुख के साथ कहना चाहता हूं कि डॉ. बत्रा इस बात को लेकर अच्छी तरह से जानते हैं देश में कितने न्यूज़पेपर स्टार्ट हुए हैं लेकिन अपने जन्म के 1 साल बाद वह सरवाइव नहीं कर पाए. जो वकील कोर्ट में जा रहे हैं. वह लॉ कॉलेज ज्‍वॉइन करते हैं. अलग-अलग बैंकों से लोन लेकर भी फीस के लिए बहुत सारा पैसा देते हैं.

लेकिन मुझे दुख है कि वह कॉलेज में जितना अमाउंट पे करते हैं उसके एवज में उतना पाते नहीं है. वह वह सोचते हैं कि वह राम जेठमलानी बन जाएंगे, सोली सोराबजी बन जाएंगे. लेकिन वह काम नहीं कर पाते हैं, उनके माता-पिता इंतजार करते हैं कि उनके बच्चे अच्छा पैसा कमाएंगे. मैंने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा कि कानून हर किसी को स्कूल में पढ़ाया जाना चाहिए. कानून के बेसिक प्रिंसिपल स्कूल में पढ़ाई जाने चाहिए. इसके कारण लिटिगेशन की संख्या कम होगी. लोगों को अगर इसकी जानकारी होगी, तो वह इससे बचेंगे लोगों और अगर उसकी जानकारी नहीं होती है. उसका नतीजा यह होता है कि वह अपराध करते हैं. मैं मिस्टर बत्रा का इस विषय को चुनने के लिए बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं. क्योंकि आप जानते हैं कि कैसे पढ़ाया जाना चाहिए. 

स्‍टूडेंटस की होनी चाहिए काउंसिलिंग 
अध्यापक को ये समझना चाहिए कि वो स्‍टूडेंट के अंदर जिम्मेदारी का भाव कैसे पैदा करे. यहां पर मैं टीचिंग फैकल्टी से अनुरोध करना चाहूंगा कि मैं देख रहा था कि हमारी स्टूडेंट के बीच में किस बात को लेकर कमी है. जैसे कि एक स्टूडेंट कॉलेज जवॉइन करता है तो उसे देखना चाहिए कि वो क्‍या कर सकता है. वो किस फील्ड में क्या कर सकता है. हम स्कूलों में देखते हैं कि वहां पर पेरेंट्स और अभिभावकों की मीटिंग होती है. जहां पर इस बात को लेकर चर्चा होती है कि बच्चा किन क्षेत्रों में बेहतरी काम कर सकता है और कितना अच्छा कर रहा है. किस क्षेत्र में वह अच्छा है टीचर को यह समझना चाहिए कि वह स्टूडेंट के साथ काउंसलिंग करें और जाने कि उनका बैकग्राउंड क्या है.

अगर एक लड़का किसी सामान्य परिवार से आता है तो वह एक अच्छी प्रैक्टिस कैसे कर पाएगा. उसके लिए यह बहुत ही कठिन काम हो जाएगा. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि वह नहीं कर सकता है. लेकिन उसके लिए यह काफी कठिन हो जाएगा लेकिन हमें उसका बैकग्राउंड देखना होगा. टीचर को देखना होगा कि वह स्टूडेंट किस क्षेत्र में ज्यादा फिट बैठता है. अगर कोई स्टूडेंट ब्रिलियंट है तो वह जज बन सकता है. लेकिन वह नहीं जानता है कि वह जज बन सकते हैं. लेकिन वह उसके लिए एलएलबी करता है उसके बाद एलएलएम करता है. लेकिन अगर कोई स्टूडेंट फर्स्ट ईयर में ही जुडिशल सर्विस इसके लिए सिलेक्ट हो जाता है तो वह हाईकोर्ट जज तक रिटायर हो सकता है. लेकिन अगर वह 1 साल या 2 साल के बाद पास कर लेता है कि तब वह केवल सेशन जज तक ही सेवा दे सकता है. 

लॉ कालेजों का है अपना सम्‍मान 
डॉ. अनीश अग्रवाल ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों को कई तरह के खर्चों का सामना करना पड़ता है, जिसमें उनके टीचर होते हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर होता है और दूसरी कई तरह की चीजें होती हैं. लेकिन सरकारी स्कूलों में उनके पास अपना संसाधन होता है. ऐड मिलती है, उसके अलावा कई और चीजें होती हैं. प्राइवेट स्कूल ₹2000 की फीस में काम नहीं कर सकते. एडेड स्कूलों में गवर्नमेंट 80% तक वहन करती है. अगर मैं कहूं तो लॉ कॉलेज आज की डेट में सबसे बेहतरीन इंडस्ट्री हैं, जितने भी नामी लोग हैं. सभी के लॉ स्कूल हैं. अगर आपके पास लॉ स्कूल है तो आप चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को इनवाइट कर सकते हैं. आपके पास भले ही बेस्ट इंजीनियरिंग कॉलेज हो लेकिन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया आपके वहां नहीं आना चाहेंगे. अगर आप अपने लोग स्कूल में अच्छी एजुकेशन प्रोवाइड करते हैं तो बड़े लोग भी आपकी रिस्पेक्ट करेंगे वह अपने बायोडाटा में आपकी स्कूल को मेंशन करेगा कि उसने लॉक कहां से किया है.

लेकिन अगर आप अच्छी एजुकेशन प्रोवाइड नहीं करा रहे हैं तो वो आपके कॉलेज को मेंशन तक नहीं करेगा. आज लॉ कोर्स में बड़ा चेंज लाने की जरूरत है.  जब से हमारे पास हाइब्रिड तरीका आया है आज हर कोई जानता है कि मोबाइल पर मीटिंग कैसे करनी है किस तरह से अपने ऑफिस का काम कर रहा है. हमारी घर की महिलाएं घर बैठे-बैठे ही सत्संग सुन लेती है. हमें हर लेवल पर हाइब्रिड होने जा रहे हैं. जरूरत है सेशन कोर्ट हो हाईकोर्ट हो या फिर सुप्रीम कोर्ट में इसके कारण कैसे इसको जल्दी सुना जा सकेगा. हम एविडेंस को ऑनलाइन रिकॉर्ड कर पाएंगे. उसमें बहुत कुछ नहीं चाहिए हमारे लॉयर के लिए बहुत सारे चेंबर भी नहीं चाहिए. वह अपने घर पर बैठकर ही सारे काम कर सकते हैं. अगर सिस्टम हाइब्रिड हो जाता है तो नोटिस उनके मोबाइल पर जाएगा. 
 


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