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UP के इस नामी वकील को 1 रुपये की सम्मान राशि देगी सरकार, कोर्ट ने सुनाया फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2004 के एक मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को सीनियर एडवोकेट डॉ. अशोक निगम को 1 रुपये की सम्मान राशि देने का फैसला सुनाया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार सीनियर एडवोकेट डॉ. अशोक निगम को 1 रुपये की सम्मान राशि देगी. बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डॉ. अशोक निगम को सरकार की ओर से यह टोकन अमाउंट देने का फैसला सुनाया है. अदालत ने 2004 में वकीलों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हुए पुलिस के लाठीचार्ज के मामले में यह आदेश दिया है.
2007 में डाली याचिका
दरअसल सितंबर 2004 में वकीलों ने एक शांतिपूर्ण धरना किया था, जिसमें वकीलों और पुलिस कर्मियों के बीच एक झड़प हो गई थी. इसके बाद पुलिस ने वकीलों पर लाठीचार्ज किया था. इस मामले में डॉ. निगम ने 2007 में इलाहबाद होई कोर्ट में एक अर्जी दाखिल करके मांग की थी कि पीड़ित वकीलों को राहत राशि दी जाए. इसके अलावा वकीलों पर लाठी चार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाए. इस घटना में एडवोकेट अशोक निगम खुद भी घायल हुए थे.
कोर्ट में डॉ. निगम ने कही ये बात
मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट की डिविजन बेंच ने वकील से खुद ही पूछा कि आखिर इसमें आप क्या क्षतिपूर्ति चाहते हैं? एडवोकेट डॉ. अशोक निगम ने पुलिस के साथ विवाद के दौरान वकीलों को हुए नुकसान और चोटों के लिए मुआवजे का भुगतान करने की वकालत की. उन्होंने कहा कि मैं इस न्यायालय द्वारा निर्धारित किसी भी मुआवजे को स्वीकार करूंगा क्योंकि यह लड़ाई वकीलों के सम्मान के संबंध में अधिक है. इस पर जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला ने आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एडवोकेट डॉ. अशोक निगम को 1 रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी.
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बेंच ने क्यों दिया 1 रुपये सम्मान राशि का फैसला?
बेंच ने सरकार को 1 रुपये की सम्मान राशि का आदेश देने के साथ ही कहा कि अशोक निगम वरिष्ठ अधिवक्ता हैं. वह एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन और लखनऊ बेंच में मशहूर वकील हैं. आपको बता दें, इस मामले में पूर्व जज की अध्यक्षता में एक जांच आयोग भी गठित किया गया था. आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा था कि इस मामले को बंद कर देना चाहिए, यह काफी पुराना मामला है और अब इस पर सुनवाई का कोई मतलब नहीं है. हालांकि कोर्ट ने इस पर असहमति जताई थी और कहा था कि जिस तरह से वकीलों की बेरहमी से पिटाई हुई थी, उस स्थिति में इस केस को बंद नहीं किया जा सकता है. वहीं, बीते महीने जब अशोक निगम ने खुद इस केस को बंद करने पर सहमति जताई तो फिर कोर्ट ने उनके सम्मान में ये फैसला सुनाया है.
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