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ताज के बाशिंदे ने कोरियाई कार कंपनी को यूं घेरा,1000 करोड़ का ठोका केस
धोखाधड़ी के आरोप में याचिकाकर्ता ने कार कंपनी के सीईओ, सीओओ समेत कई अन्य अधिकारियों व लोकल डीलर के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में मुकदमा दायर किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः आगरा में एक कार कंपनी पर 1000 करोड़ का मुकदमा दायर कर दिया है. याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार कार में सेफ्टी फीचर्स उपलब्ध नहीं थे और इसके साथ ही जिस कार को खरीदने के लिए याचिकाकर्ता ने पैसा दिया और लोन लिया था, वो कार उसको मिली ही नहीं. धोखाधड़ी के आरोप में याचिकाकर्ता ने कार कंपनी के सीईओ, सीओओ समेत कई अन्य अधिकारियों व लोकल डीलर के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में मुकदमा दायर किया है.
ये है पूरा मामला
याचिकाकर्ता राजेंद्र कुमार ने 13 नवंबर 2020 को एक हुंडई के कमलानगर स्थित शोरूम पर एक सैंट्रो स्पोर्ट्ज कार नंबर UP80 FQ 7866 बुक की थी. इसके लिए उसने इंडियन बैंक से पांच लाख रुपये का कार लोन भी लिया हुआ है, जिसकी किश्त वो लगातार चुका रहे हैं. राजेंद्र कुमार के मुताबिक कंपनी ने उनको जो ऑल न्यू सेंट्रो स्पोर्टस कार दी है, वो हकीकत में नहीं है. केवल दस्तावेजों में स्पोर्टस कार का मॉडल दिया गया है, जबकि कार साधारण व पुराने मॉडल की है. हालांकि, उनसे ऑल न्यू सेंट्रो स्पोर्ट्स की कीमत ली गई है. जब उन्होंने यह कार खरीदी थी तो कंपनी ने एक ब्रोशर दिया, जिसमें कार की तमाम विशेषताएं लिखीं हैं. इसमें डुअल एयर बैग, रियर पार्किंग कैमरा, रियर डिफॉगर, माइक्रो एंटीना, रियर वॉशर, वाइपर और वीडियो स्क्रीन का जिक्र था. मगर कार में कुछ भी उपलब्ध नहीं है.
कार सिक्योरिटी रेटिंग्स में फेल
सैंट्रो की कार सिक्योरिटी रेटिंग्स में भी फेल हो गई है. इसको 2 स्टार रेटिंग्स मिली है, मतलब ये कि इसकी अधिकतम रफ्तार मात्र 56 किमी प्रति घंटा है, जबकि कंपनी द्वारा उपलब्ध ब्रोशर में इसकी अधिकतम स्पीड 180 किमी प्रति घंटा लिखी है. देश के तमाम हाईवे और एक्सप्रेसवे पर अधिकतम स्पीड 120 किमी प्रति घंटा है. ऐसे में कार की क्रैश टेस्ट रेटिंग शून्य है, जो कार चालक और उसमें सफर करने वालों के लिए बेहद खतरनाक है.
इन पर किया है मुकदमा
राजेंद्र कुमार ने हुंडई कंपनी के कार्यकारी अधिकारी यूइसुंग, अध्यक्ष व सीईओ जे हूं चांग समेत हुंडई के अन्य अधिकारियों को आरोपी बनाया है. राजेंद्र ने कहा कि अगर कार से सफर के दौरान उनको या फिर परिवार को हानि पहुंचती है तो उसकी जिम्मेदार सिर्फ कंपनी होगी.
वसूला गया ज्यादा चार्ज
अधिवक्ता एपी सिंह ने बताया कि कंपनी ने ग्लोबल एनसीएपी क्रैश टेस्ट के परिणाम को आधार बनाकर याचिकाकर्ता को कार बेची है. कंपनी के पास केवल 2 सुरक्षा रेटिंग है. इससे याचिकाकर्ता के परिवार की जान सफर के दौरान जोखिम में रहती है.
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