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नए साल पर मिलेगा कमाई का मौका, JSW Cement का IPO इस महीने हो सकता है लॉन्च!
JSW ग्रुप जनवरी 2025 तक अपने सीमेंट डिवीजन के लिए इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने का लक्ष्य बना रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सज्जन जिंदल के नेतृत्व वाले जेएसडब्ल्यू ग्रुप (JSW Group) में निवेश का बड़ा मौका आने वाला है. JSW ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी जनवरी 2025 तक अपने सीमेंट डिवीजन के लिए इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने का लक्ष्य बना रही है. कंपनी पहले भी आईपीओ के लिए आवेदन कर चुकी है, हालांकि कुछ कारणों से यह योजना सफल नहीं हो पाई. जेएसडब्ल्यू सीमेंट ने अगस्त 2024 में आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे. कंपनी का इरादा 4000 करोड़ रुपये जुटाने का था, जिसमें फ्रेश शेयर के साथ ही ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए शेयरों की बिक्री होनी थी.
अगस्त में दाखिल किए IPO के ड्राफ्ट पेपर
जेएसडब्ल्यू सीमेंट ने अगस्त 2024 में आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे. हालांकि, मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 2 सितंबर 2024 को 477 मिलियन डॉलर के आईपीओ पर रोक लगा दी, जिससे लिस्टिंग प्रक्रिया में देरी हुई. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, जिंदल और उनके भाई-बहनों से जुड़े एक पुराने मामले के कारण ऐसा किया गया. इस फंड का इस्तेमाल नागौर, राजस्थान में सीमेंट बनाने वाली यूनिट के विस्तार के लिए करने की योजना थी. इसके साथ ही कंपनी के कुछ बकाया कर्जों का निपटान भी किया जाना था. यह एक ऐसी कंपनी है जिसमें सज्जन जिंदल सहित जिंदल फैमिली के कई सदस्य डायरेक्टर के पदों पर थे. कंपनी अब जनवरी 2025 तक आईपीओ के साथ आगे बढ़ने पर फोकस कर रही है.
EV पर क्या है प्लान?
इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर उन्होने कहा कि भारत को नए एनर्जी व्हीकल की काफी जरूरत है. उनके मुताबिक देश का बड़ा पैसा फ्यूल खरीद में जाता है इसलिए देश के लिए ईवी सबसे अच्छा विकल्प है. उन्होने कहा कि भारत 2030 तक 60 से 70 लाख कारों का उत्पादन करेगा और इसमें से जेएसडब्लू के अंतर्गत 10 लाख तक कारें होंगी. उनके मुताबिक कंपनी ईवी तकनीकों के लिए तकनीक के ट्रांसफर से लेकर अपनी खुद की रिसर्च पर फोकस कर रही है.
स्टील डंपिंग को लेकर क्या कहा?
चीन से स्टील डंपिंग पर सचिन जिंदल ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं. उनके मुताबिक स्टील इंडस्ट्री चाहती है कि चीन से स्टील ऐसे देशों के रास्ते से ना आए जहां ड्यूटी शून्य है. उन्होने कहा कि किसी भी रास्ते से अगर चीन भारतीय बाजार में स्टील डंप करता है तो कंपनियों के मार्जिन बेहद कम हो जाएंगे जिससे क्षमता विस्तार में और फिर से निवेश के लिए कंपनियों के पास सरप्लस पैसा ही नहीं बचेगा. ऐसी स्थिति में क्षमता बढ़ाने के लिए अहम कोई भी प्रोजेक्ट या तो शिफ्ट कर दिया जाएगा या फिर उसमें देरी होगी इससे देश को आयात पर ही भरोसा करना पड़ेगा.
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