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Yoga Day 2023: भारत का योग, कई देशों की अर्थव्यवस्था को लगा रहा धक्का
21 जून को पूरी दुनिया योग दिवस मानती है. भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा की थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
पूरी दुनिया आज यानी 21 जून को योग दिवस (International Yoga Day 2023) मना रही है. आज से करीब 9 साल पहले 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने भारत की पहल पर 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था. तब से हर साल योग दिवस मनाया जाता है और अब शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करने वाला योग एक वैश्विक बाजार बन गया है. योग से सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी चल रही है. इसमें एक सामान्य योग ट्रेनर से लेकर योग का सामान बनाने वालीं बड़ी-बड़ी कंपनियां तक शामिल हैं.
इतना हो जाएगा बाजार
इन 9 सालों में योग न केवल भारत बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा बाजार बन गया है, जिसके आने वाले सालों में बेहद तेजी से बढ़ने की संभावना है. यह कहना गलत नहीं होगा कि योग न केवल बीमारियों से दूर रखने में मदद कर रहा है, बल्कि अर्थव्यवस्था को धक्का लगाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है. एक रिपोर्ट बताती है कि दुनियाभर में योग इंडस्ट्री 88 अरब डॉलर से अधिक की हो गई है. इसमें यदि कपड़े, मैट आदि योग से जुड़े समान को जोड़ दिया जाए तो ये आंकड़ा 130 अरब डॉलर तक पहुंच जाता है. वहीं, 2025 तक इसके तेजी से बढ़ते हुए 215 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.
इन देशों में काफी लोकप्रिय
योग दुनिया को भारत की देन है, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, आस्ट्रेलिया जैसे देशों में ये ज्यादा लोकप्रिय हो गया है. हालांकि, भारत में भी इसके प्रति रुचि में इजाफा हुआ है, लेकिन दूसरे देशों के मुकाबले गति अभी भी धीमी है. योग का बाजार भारत में 490 अरब रुपए से अधिक का माना जाता है. वेलनेस सर्विसेज, जिसके तहत योग स्टूडियो आदि आते हैं, की इस बाजार में 40% हिस्सेदारी है. एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन वेलनेस इंडस्ट्री के आने वाले सालों में 875 अरब रुपए तक पहुंचने का अनुमान है. मोदी सरकार भी योग दिवस को प्रमोट करने के लिए काफी खर्चा कर रही है. 2015 से 2019 तक अकेले भारतीय आयुष मंत्रालय ने योग दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर 137 करोड़ रुपए खर्च किए हैं.
अमेरिका में बड़ा कारोबार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस अमेरिका की यात्रा पर गए हुए हैं, वहां योग कारोबारी के तौर पर तेजी से फलफूल रहा है. यूएस में यह 12 अरब डॉलर का बाजार बन गया है और सालाना 9.8% की दर से बढ़ रहा. योग की बदौलत यहां करीब 1.22 लाख लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है. अमेरिका में हर साल योग स्टूडियो की संख्या बढ़ रही है. 2018 में यूएस में 37569 योग स्टूडियो थे, 2019 में 40949, 2020 में 42105, 2021 में 45068, 2022 में 46912 और 2023 में ये संख्या बढ़कर 48547 हो गई है. वहीं, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और चीन में भी योग का कारोबार लगातार बढ़ रहा है.
मैट का चलन बढ़ा
योग के लिए मैट के इस्तेमाल का चलन तेजी से बढ़ रहा है. खासतौर पर यूके और अमेरिका जैसे देशों में योग मैट इस्तेमाल करने वालों की संख्या काफी ज्यादा है. भारत में भी अब इसके खरीदारों की संख्या बढ़ी है, लेकिन अमेरिका के मुकाबले रफ्तार धीमी है. मैट की बढ़ते चलन से इसे बनाने वाली कंपनियों की चांदी हो गई है. एक रिपोर्ट के अनुसार, योग मैट सबसे ज्यादा जर्मनी, US और चीन में बनते हैं. अब Nike और Reboke जैसी दिग्गज कंपनियां भी योग मैट को बेच रही हैं. भारत में ज्यादातर योग मैट चीन से मंगाए जाते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए चीन से 92 लाख रुपए के योग मैट आयात किए गए थे.
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