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विश्व बैंक की चेतावनी: 2026 में 10% महंगे हो सकते हैं खाद्य पदार्थ, ऊर्जा संकट और अल नीनो बढ़ाएंगे दबाव
विश्व बैंक ने बुधवार को जारी अपनी ताजा 'कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक' रिपोर्ट में कहा कि 2026 में वैश्विक कमोडिटी कीमतों में कुल मिलाकर 23 फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष, तेल और खाद की बढ़ती कीमतों तथा अल नीनो के खतरे से दुनिया भर में खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है. विश्व बैंक के ताजा अनुमान के मुताबिक, 2026 में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. ऊर्जा की कीमतें भी इस साल 32 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है. इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ अनाज की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और गरीब देशों में खाद्य असुरक्षा का संकट गहरा सकता है.
विश्व बैंक ने बुधवार को जारी अपनी ताजा 'कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक' रिपोर्ट में कहा कि 2026 में वैश्विक कमोडिटी कीमतों में कुल मिलाकर 23 फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है. हालांकि, 2027 में इनमें 7 फीसदी की गिरावट का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व में संघर्ष और तेल की आपूर्ति में रुकावटों के कारण ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा है. वहीं, अनाज की आपूर्ति में बाधाएं और अल नीनो के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने का जोखिम खाद्य संकट को और गंभीर बना सकता है.
ऊर्जा की कीमतों में 32% बढ़ोतरी का अनुमान
विश्व बैंक के मुताबिक, 2026 में ऊर्जा की कीमतों में 32 फीसदी की वृद्धि हो सकती है. इससे पिछले तीन वर्षों में कीमतों में आई गिरावट पलटने का अनुमान है. ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत इस साल 91 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जबकि 2025 में यह 69 डॉलर प्रति बैरल थी. 2027 में ब्रेंट क्रूड के औसतन 79 डॉलर प्रति बैरल पर आने का अनुमान है.
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति में 5.2 फीसदी की गिरावट आ सकती है. वर्ष 2020 की वैश्विक मंदी को छोड़ दें, तो यह चार दशक से अधिक समय में सबसे बड़ी गिरावट हो सकती है. तेल की खपत में भी 2.5 फीसदी की कमी आने का अनुमान है. उत्पादन खपत से कम रहने के कारण तेल के भंडार से लगातार निकासी करनी पड़ रही है.
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल का युद्ध शुरू होने के बाद ऊर्जा और खाद की कीमतों में तेज उछाल आया है. होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं ने भी तेल, गैस और खाद की आपूर्ति को प्रभावित किया है. विश्व बैंक के नए अनुमान अप्रैल में जारी अनुमानों से काफी अधिक हैं.
खाद्य पदार्थों की कीमतें दो साल में 18% बढ़ने की आशंका
विश्व बैंक का अनुमान है कि 2026 में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में करीब 10 फीसदी और 2027 में 7 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. इस तरह दो वर्षों में खाद्य कीमतें कुल मिलाकर लगभग 18 फीसदी बढ़ सकती हैं.
रिपोर्ट में इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं. मध्य पूर्व में संघर्ष से अनाज की आपूर्ति बाधित हो रही है, जबकि अल नीनो के कारण फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा है. इसके अलावा, ईंधन और खाद महंगी होने से खेती की लागत बढ़ रही है. यूरिया की कीमतों में साल की शुरुआत में तेज उछाल आया था, हालांकि बाद में इसमें कुछ नरमी आई. इसके बावजूद 2026 में खाद की कीमतों में 14 फीसदी वृद्धि का अनुमान है. 2027 तक इनके 2025 के स्तर पर लौटने की संभावना जताई गई है.
संघर्ष बढ़ा तो और महंगा हो सकता है तेल और अनाज
विश्व बैंक के मौजूदा अनुमान इस आधार पर तैयार किए गए हैं कि आपूर्ति को प्रभावित करने वाले संघर्ष और गंभीर नहीं होंगे. लेकिन मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने या रूस के तेल ढांचे को नुकसान जारी रहने पर ऊर्जा की कीमतें अनुमान से अधिक बढ़ सकती हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा की ऊंची कीमतें, काला सागर के रास्ते अनाज की ढुलाई पर हमले और अत्यधिक तीव्र अल नीनो मिलकर वैश्विक खाद्य संकट पैदा कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में 2027 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी मौजूदा अनुमान से 12 फीसदी अधिक हो सकती हैं और 2022 के स्तर को पार कर सकती हैं. इससे गरीब देशों में खाद्य असुरक्षा और गरीबी बढ़ने का खतरा है.
धातुओं और सोने-चांदी की कीमतों में भी तेजी
विश्व बैंक ने 2026 में औद्योगिक धातुओं की कीमतों में 25 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया है. एल्युमीनियम, तांबा और टिन की कीमतों में तेजी के पीछे नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और डेटा सेंटरों से बढ़ती मांग के साथ आपूर्ति में रुकावटें भी जिम्मेदार हैं. 2027 में धातुओं की कीमतों में 3 फीसदी गिरावट का अनुमान है.
वहीं, भू-राजनीतिक और नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में कीमती धातुओं की मांग बनी हुई है. विश्व बैंक के अनुसार, 2026 में इनकी कीमतों में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है. 2027 में कुछ नरमी आने के बावजूद कीमतें 2015 से 2019 के औसत स्तर से तीन गुना से अधिक रह सकती हैं.
गरीब देशों की मदद के लिए 60 अरब डॉलर तक की राशि
विश्व बैंक समूह ने मौजूदा वित्तीय साधनों के जरिए 50 अरब से 60 अरब डॉलर तक की राशि उपलब्ध कराई है. इसमें 25 अरब डॉलर की पहले से तय वित्तीय सहायता भी शामिल है. इस राशि का इस्तेमाल सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, सरकारों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने और कंपनियों तथा कृषि क्षेत्र को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में किया जा सकता है.
मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से विश्व बैंक कमजोर देशों को 8.7 अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता दे चुका है. विश्व बैंक के डिप्टी चीफ इकोनॉमिस्ट और प्रॉस्पेक्ट्स ग्रुप के निदेशक आयहान कोसे ने कहा कि सबसे गरीब लोगों की सुरक्षा करना और भारी कर्ज से जूझ रहे कम आय वाले देशों की मदद करना प्राथमिकता होनी चाहिए.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आर्थिक और बाजार संबंधी तनाव के दौरान अलग-अलग कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच संबंध मजबूत हो जाते हैं. मौजूदा संघर्ष के दौरान भी ऐसा देखने को मिला है. औद्योगिक धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अन्य कमोडिटी पर सबसे अधिक पड़ता है, जबकि संघर्ष शुरू होने के बाद तेल की कीमतों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हो गई है.
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