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रिलायंस के शेयरधारकों ने जियो की पार्टी की कीमत चुकाई
जियो ने 30,200 करोड़ रुपये जुटाए. उसी दिन रिलायंस का बाजार मूल्य 51,700 करोड़ रुपये घट गया. बाहरी निवेशकों ने भारत के सबसे चर्चित शेयर को छूट पर खरीदा, जबकि जिन लोगों के पास यह पहले से था, उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
पलक शाह
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के साथ हुआ अन्याय?
बुधवार को मुकेश अंबानी के कारोबारी साम्राज्य के लिए सबसे बड़ा दिन था.
जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग 21 फीसदी प्रीमियम पर हुई और शेयर करीब 27 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ. पहले ही दिन यह भारत की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई. अंबानी समूह कुल बाजार मूल्य के मामले में टाटा समूह से आगे निकल गया. मुंबई के मरीन ड्राइव से लेकर दुबई के बुर्ज खलीफा तक जश्न मनाया गया, रोशनी और शो आयोजित किए गए.
लेकिन एक समूह इस जश्न से बाहर रह गया: वे लोग, जिनके पास जियो पहले से था.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के 2 करोड़ से अधिक शेयरधारक रिलायंस के शेयरों के जरिए जियो के मालिक रहे हैं, जब से इसका पहला सिम कार्ड बेचा गया था. बुधवार को जब उनकी कंपनी का सबसे कीमती कारोबार तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बाजार में उतरा, तब उन्होंने अपने ही शेयर को गिरते हुए देखा.
रिलायंस का शेयर 3.19 फीसदी गिरकर 1,158 रुपये पर आ गया, जो इसके 52 सप्ताह के निचले स्तर से सिर्फ 5.80 रुपये ऊपर था.
दिन का गणित
आइए, आंकड़ों को समझते हैं.
30,188 करोड़ रुपये: जियो ने आईपीओ से इतनी रकम जुटाई.
51,700 करोड़ रुपये: उसी दिन रिलायंस के शेयरधारकों के बाजार मूल्य में इतनी गिरावट आई.
कारोबारी सत्र की शुरुआत में रिलायंस का मूल्य करीब 16.19 लाख करोड़ रुपये था. सत्र के अंत में यह घटकर 15.67 लाख करोड़ रुपये रह गया.
मूल कंपनी को अपनी सहायक कंपनी द्वारा जुटाई गई रकम से 1.7 गुना अधिक का नुकसान हुआ. यह मूल्य को सामने लाने की प्रक्रिया नहीं थी. लिस्टिंग के दिन उन शेयरधारकों के लिए मूल्य का विनाश हुआ, जिन्होंने सबसे लंबे समय तक इंतजार किया था.
बाहरी निवेशकों ने छूट पर खरीदा
आईपीओ ने बाजार को वह सौदा दिया, जो रिलायंस के शेयरधारकों को कभी नहीं मिला.
बाहरी निवेशकों ने जियो को 1,119 रुपये प्रति शेयर पर खरीदा. शाम तक इसकी कीमत 1,417.50 रुपये हो गई. एंकर निवेशकों, संस्थानों, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और खुदरा निवेशकों को एक ही दिन में 27 करोड़ नए शेयरों पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का सामूहिक लाभ हुआ.
लिस्टिंग हुई. पिछले दरवाजे का रास्ता बंद हुआ. शेयर गिर गया.
रिलायंस के शेयरधारकों को उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में जियो के शेयर नहीं मिले. इसके बजाय उन्हें दो चीजें मिलीं:
हिस्सेदारी में कमी.
आईपीओ नए शेयर जारी करके लाया गया था, इसलिए जियो में रिलायंस की हिस्सेदारी 66.43 फीसदी से घटकर करीब 64.48 फीसदी रह गई. नया पैसा जियो में आया, जिसका ज्यादातर इस्तेमाल उसका कर्ज चुकाने में होना है, जबकि नए शेयर बाहरी निवेशकों को मिले.
कतार में एक जगह.
एक आरक्षित कोटे के तहत रिलायंस के शेयरधारक बाकी निवेशकों के समान कीमत पर लॉटरी के जरिए जियो के शेयरों के लिए आवेदन कर सकते थे.
देखिए, इसका मूल्य कितना था. 12 शेयरों के एक लॉट के आवंटन से बुधवार को 3,582 रुपये का लाभ हुआ. उसी दिन रिलायंस के हर शेयर पर 38.20 रुपये का नुकसान हुआ.
94 से अधिक रिलायंस शेयर रखने वाले किसी भी शेयरधारक को रिलायंस में हुए नुकसान की रकम, जियो के एक लॉट से हुए लाभ से अधिक थी. इतनी हिस्सेदारी का मूल्य मुश्किल से 1.1 लाख रुपये था. शेयरधारकों को मिला कथित ‘इनाम’ उनके अपने ही नुकसान से मिट गया.
वह चेतावनी, जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया
इस स्थिति का अनुमान दो साल पहले ही लिखित रूप में लगाया गया था.
जब पहली बार जियो की लिस्टिंग पर चर्चा हुई थी, तब जेफरीज ने दो रास्ते बताए थे. रिलायंस फाउंडेशन के बजाय जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के मामले की तरह स्पिन-ऑफ किया जाता, तो हर रिलायंस शेयरधारक को सीधे जियो के शेयर मिलते और होल्डिंग कंपनी पर लागू छूट से बचा जा सकता था. आईपीओ के जरिए रिलायंस अपना नियंत्रण बनाए रख सकती थी, लेकिन ब्रोकर ने चेतावनी दी थी कि इससे होल्डिंग कंपनी पर 20 फीसदी या उससे अधिक की छूट लागू हो सकती है.
जेफरीज का अनुमान था कि स्पिन-ऑफ से रिलायंस के शेयर में 15-18 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. रिलायंस ने आईपीओ का रास्ता चुना.
इसका समझौता स्पष्ट था. स्पिन-ऑफ से जियो पर प्रमोटरों का प्रभावी नियंत्रण करीब 66 फीसदी से घटकर लगभग 33 फीसदी रह जाता. आईपीओ ने नियंत्रण रिलायंस के हाथों में बनाए रखा. अब बाजार ने उस नियंत्रण की कीमत तय कर दी है और रिलायंस के अल्पांश शेयरधारक इसकी कीमत चुका रहे हैं.
टेलीकॉम कारोबार से कम मूल्य का पूरा कारोबारी समूह
यह वह आंकड़ा है, जिसे हर रिलायंस शेयरधारक को लेकर चिंतित होना चाहिए.
जियो में रिलायंस की 64.48 फीसदी हिस्सेदारी का मूल्य अब करीब 8.41 लाख करोड़ रुपये है. पूरी रिलायंस कंपनी का मूल्य 15.67 लाख करोड़ रुपये है.
इससे बाकी सभी कारोबारों के लिए 7.26 लाख करोड़ रुपये बचते हैं: भारत का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स, सबसे बड़ा पेट्रोकेमिकल कारोबार, देश की सबसे बड़ी रिटेल चेन, तेल और गैस कारोबार तथा नवीकरणीय ऊर्जा में वह निवेश, जिसे अंबानी ने रिलायंस का भविष्य बताया है.
इन सभी का संयुक्त मूल्य अब टेलीकॉम कंपनी में रिलायंस की हिस्सेदारी के मूल्य से भी कम आंका जा रहा है, जिसकी लिस्टिंग सिर्फ एक दिन पहले हुई थी.
जो निवेशक जियो में निवेश करना चाहते हैं, उन्हें अब इसके लिए रिलायंस के शेयर खरीदने की जरूरत नहीं है. बाजार में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, बुधवार को निवेशकों ने इसी दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया. बताया जा रहा है कि वेल्थ डेस्क और फैमिली ऑफिस जियो को सीधे खरीदने के लिए रिलायंस के शेयर बेच रहे थे.
लंबी गिरावट
बुधवार की गिरावट कोई एक दिन की घटना नहीं थी.
सितंबर में रिलायंस का शेयर 17 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था. जियो का आईपीओ राहत देने वाला कदम माना जा रहा था, जिससे आखिरकार कंपनी के भीतर छिपे मूल्य को सामने आने की उम्मीद थी. निवेशकों ने जियो में अप्रत्यक्ष निवेश के विकल्प के रूप में आईपीओ से पहले रिलायंस के शेयर खरीदे थे.
अब रिलायंस का शेयर 1,611.80 रुपये के 52 सप्ताह के उच्च स्तर से 28 फीसदी नीचे है. पिछले एक साल में इसमें 22 फीसदी और छह महीने में 17 फीसदी की गिरावट आई है. छह साल पहले मेटा, गूगल और वैश्विक फंडों को जियो की हिस्सेदारी बेचने के बाद रिलायंस का शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था. इस बार जियो की लिस्टिंग ने इसे नए निचले स्तरों की ओर धकेल दिया.
बचाव में क्या तर्क दिए जाएंगे?
उनके पास भी कुछ तर्क हैं और उन्हें सुना जाना चाहिए.
मूडीज ने आईपीओ को क्रेडिट के लिहाज से सकारात्मक बताया था, क्योंकि इससे प्राप्त 27,500 करोड़ रुपये जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल होंगे और पूरे समूह की ब्याज लागत कम होगी. रिलायंस का जियो पर नियंत्रण अब भी बरकरार है. उसकी हिस्सेदारी का मूल्य अब बाजार भाव के आधार पर तय हो रहा है. 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले सतर्कता ने भी पूरे बाजार पर दबाव डाला. एयरटेल का शेयर भी गिरा.
लेकिन इनमें से कोई भी बात यह नहीं समझाती कि उसी दिन बाहरी निवेशकों ने 8,000 करोड़ रुपये कमाए, जबकि अंदरूनी शेयरधारकों को 51,700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
असली परीक्षा कल होगी
रिलायंस 30 अक्टूबर, शुक्रवार को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेगी. पहली बार विश्लेषक ऐसी रिलायंस का मूल्यांकन करेंगे, जिसका सबसे बड़ा विकास इंजन अब अलग से बाजार में कारोबार कर रहा है और जिसका मूल्य बाजार भाव पर तय हो रहा है. साथ ही, होल्डिंग कंपनी पर छूट भी लागू हो रही है.
मुकेश अंबानी के सामने अब सवाल यह नहीं है कि जियो का मूल्य 13 लाख करोड़ रुपये है या नहीं. बाजार इसका जवाब दे चुका है.
सवाल यह है कि एक दशक तक जियो की तरक्की को वित्तपोषित करने वाले रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों को उसका मूल्य किसी और के पास जाता हुआ क्यों देखना पड़ा.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के लेखक हैं. यह पुस्तक भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पहलुओं को उजागर करते हैं. मुंबई में करीब दो दशक तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की पड़ताल की है. उनके लेख भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं. 19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई की गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक परिष्कृत रूप ने ले ली है. इसमें कॉरपोरेट इमारतों के भीतर चलने वाली सफेदपोश वित्तीय धोखाधड़ी शामिल है. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम वित्तीय दुनिया की चमकदार सतह के पीछे काम करने वाले समूहों को उजागर करता है. सच सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता में एक ऐसी प्रभावशाली आवाज बनाती है जो यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वालों को बेनकाब करने से नहीं हिचकती.)
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