होम / बिजनेस / क्या इस बार सफल हो पाएगी हल्दीराम को टेकओवर करने की कवायद, इतने में तय हो सकती है डील
क्या इस बार सफल हो पाएगी हल्दीराम को टेकओवर करने की कवायद, इतने में तय हो सकती है डील
इस पूरी डील में ब्लैकस्टोन जहां बड़ी हिस्सेदारी खरीदना चाहता है वहीं दूसरी ओर परिवार आईपीओ के जरिए अपनी हिस्सेदारी को बेचने की तैयारी कर रहा है. सवाल ये है कि क्या बात बन पाएगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
देश की सबसे बड़ी नमकीन भुजिया और स्नेक्स से जुड़ी कंपनी हल्दीराम के अधिग्रहण को लेकर बातचीत एक बार फिर परवान चढ़ गई है. पहले दौर में ज्यादा वैल्यूएशन के कारण असफल हुई बातचीत में इस बार ये कहा जा रहा है कि ब्लैकस्टोन हल्दीराम में बड़ी हिस्सेदारी खरीद सकता है. इसके लिए कंपनी हल्दीराम को 70,000 करोड़ रुपये तक का वैल्यूएशन दे सकती है.
76 फीसदी हिस्सेदारी खरीदना चाहता है ब्लैकस्टोन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हल्दीराम में ब्लैकस्टोन 76 प्रतिशत तक हिस्सेदारी को खरीदना चाहता है. लेकिन अग्रवाल फैमिली इतनी बड़ी हिस्सेदारी को नहीं बेचना चाहती है. वो कंपनी पर अपने अधिकार बनाए रखने के लिए बड़ी हिस्सेदारी अपने पास रखना चाहती है. खरीदारों की अग्रवाल परिवार के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है. कुछ परिवार के सदस्य जहां 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं. लेकिन कहा जा रहा है कि इस बार की बातचीत में 75 प्रतिशत तक हिस्सेदारी पर सहमति बन सकती है.
ये भी पढ़ें: इन कंपनियों की खुली लॉटरी, सरकार लौटाने जा रही है 6500 करोड़ रुपये
लेकिन परिवार की है दूसरी तैयारी
एक ओर जहां ब्लैकस्टोन बड़ी हिस्सेदारी खरीदना चाहता है वहीं दूसरी ओर परिवार आईपीओ के जरिए अपनी हिस्सेदारी को बेचने की तैयारी कर रहा है. लेकिन हां नां के बीच अगर ये डील कामयाब होती है तो ये देश की सबसे बड़ी इक्विटी डील होगी. परिवार कंपनी के विलय को लेकर भी काम कर रहा है. परिवार हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड का हल्दीराम स्नैक फूड प्राइवेट लिमिटेड में विलय करना चाह रहा है. नई कंपनी में दिल्ली शाखा की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत और नागपुर शाखा की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत होगी.
आखिर परिवार लगा रहा है क्या कीमत
इस डील में अब तक कई कंपनियों का नाम जुड़ चुका है. लेकिन हर बार बात कंपनी के वैल्यूएशन को लेकर बिगड़ जाती है. परिवार जहां कंपनी के लिए 12 बिलियन डॉलर तक का वैल्यूएशन चाहता है वहीं दूसरी ओर प्राइवेट इक्विटी फर्म इसके लिए 8 से 9 बिलियन डॉलर से ज्यादा देने को तैयार नहीं हो रहे हैं. बातचीत इसी वैल्यूएशन को लेकर बिगड़ रही है.
टैग्स