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आखिर Gautam Adani ने क्यों बेच डाली मुनाफे वाली कंपनी, क्या है प्लान?  

अडानी समूह ने जहां अपनी कंपनी अडानी कैपिटल का सौदा कर दिया है. वहीं, समूह गुजरात में तांबा फैक्ट्री लगाने की तैयारी कर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

अरबपति कारोबारी गौतम अडानी (Gautam Adani) ने NBFC कारोबार से हाथ खींच लिए है. उन्होंने अपनी नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) अडानी कैपिटल को बेच दिया है. इसके साथ ही उन्होंने अडानी हाउसिंग का भी सौदा कर दिया है. ग्लोबल इक्विटी फर्म बेन कैपिटल (Bain Capital) के साथ गौतम अडानी ने 1440 करोड़ रुपए में डील की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस डील के तहत बेन कैपिटल के पास अडानी कैपिटल और अडानी हाउसिंग की 90% हिस्सेदारी होगी. जबकि कंपनी के मौजूदा प्रबंध निदेशक और CEO गौरव गुप्ता के पास बाकी 10 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी.

क्या घाटे में थी कंपनी?
कुछ वक्त पहले ही ये साफ हो गया था कि गौतम अडानी का दिल NBFC कारोबार में नही लग रहा है. वैसे, ऐसा नहीं है कि अडानी का दिल न लगने की वजह कंपनी का घाटे में होना है. Adani Capital की आर्थिक स्थिति अच्छी है. FY23 में कंपनी की लोन बुक 2,690 करोड़ की रही है. वहीं, कंपनी का नेट प्रॉफिट 90.68 करोड़ रहा है. ये कंपनी 4 बिजनेस वर्टिकल में ज्यादा काम करती है - खेती के उपकरणों के लिए लोन, कमर्शियल वाहनों के लिए लोन, बिजनेस लोन और सप्लाई चेन फाइनेंस. इसके साथ ही कंपनी की हाउसिंग फाइनेंस शाखा भी है. कंपनी के नेटवर्क की बात करें, तो इसकी 8 राज्यों में 170 ब्रांचेज हैं और 2,500 प्रोफेशनल इससे जुड़े हुए हैं.    

कहीं और करना है फोकस
ऐसे में यह सवाल लाजमी हो जाता है कि आखिर अडानी समूह (Adani Group) ने इस कारोबार से हाथ क्यों छुड़ाया? दरअसल, NBFC बिजनेस में प्रतियोगिता लगातार बढ़ती जा रही है. बड़े-बड़े प्लेयर्स इस सेक्टर में मौजूद हैं, जिसका मतलब है बढ़त बनाने के लिए ज्यादा फोकस. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने अडानी समूह को जिस स्थिति में पहुंचाया है, वहां से पहले वाली स्थिति में वापस आने के लिए समूह को तेज ग्रोथ की जरूरत है. इसलिए समूह ने NBFC कारोबार पर फोकस करने के बजाए ऐसे दूसरे सेक्टर्स पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला लिया है, जहां ग्रोथ के ज्यादा अवसर हों और इन अवसरों को जल्द भुनाया जा सके. 

अभी इनके पास कमान
अडानी कैपिटल की कमान इस समय गौरव गुप्ता के हाथों में है. बतौर सीईओ उन्होंने कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए काफी कुछ किया है. इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में लंबा अनुभव रखने वाले गौरव ने 2016 में अडानी समूह जॉइन किया था. अडानी कैपिटल में 90% हिस्सेदारी इसके प्रमोटरों के पास थी. बता दें कि मई में ऐसी खबरें आई थीं कि अडानी कैपिटल ने फंड जुटाने की योजना पर काम कर रही है. कंपनी रणनीतिक और निजी इक्विटी निवेशकों से करीब 1,500 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है. इससे पहले, अडानी कैपिटल के आईपीओ की खबर भी सामने आई थी, लेकिन अब गौतम अडानी ने इस कंपनी को बेच दिया है.

इधर, तांबा फैक्ट्री लगाने की तैयारी
इस बीच, अडानी समूह गुजरात के मुंद्रा में तांबा फैक्ट्री लगाने जा रहा है. इस फैक्ट्री का कामकाज अगले साल मार्च तक शुरू हो सकता है. अडानी के इस कदम से आयात पर भारत की निर्भरता कम करने और ऊर्जा बदलाव में मदद मिलेगी. बता दें कि तांबे को 'विद्युतीकरण की धातु' के रूप में जाना जाता है. विद्युतीकरण के लिए जिन तारों की जरूरत होती है, वो तार आमतौर पर तांबे से बने होते हैं. इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर, सौर फोटोवोल्टिक (PV) और बैटरी में भी तांबे की जरूरत होती है. इस फैक्ट्री में दो चरणों में प्रति वर्ष 10 लाख टन परिष्कृत तांबे का उत्पादन किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट पर अडानी समूह 1.1 अरब डॉलर खर्च करेगा.
 


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