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क्यों बैकों में खत्म हो रही कलर्क की नौकरियां? RBI ने बताए ये कारण

RBI द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार डिजिटलाइजेशन के बाद आए बदलावों ने अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों के रेश्यो को प्रभावित किया, जो वर्ष 2011 में 50:50 से बढ़कर वर्ष 2023 में 74:26 हो गया है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

आज के इस डिजिटल टेक्नोलॉजी के दौर में फाइनेंशियल सेक्टर में कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं. डिजिटलाइजेशन के बाद अब ऑटोमेशन ने बैंकों में कलर्क की जगह भी तेजी से ले ली है, जिसकी वजह से मिड और लोअर लेवल की नौकरियों में गिरावट आई है. उधर, एआई के आने से तो इस सेक्टर में कलर्क की नौकरी के लिए खतरा अधिक बढ़ने लगा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसे लेकर एक रिपोर्ट जारी की है, तो आइए जानते हैं आखिर बैकों में कलर्क की नौकरियां खत्म होने के क्या कारण हैं?

लेबर की जगह ले रहा ऑटोमेशन 
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने करेंसी और फाइनेंस पर आरबीआई की रिपोर्ट की प्रस्तावना में डिजिटल चैनल्स द्वारा लाई गई चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इन चुनौतियों के लिए जरूरी है कि बैंक अपने कर्मचारियों के स्किल को बढ़ाने और रीस्किल पर निवेश करें. उन्होंने कहा कि डिजिटलाइजेशन आउटसोर्सिंग और टेलीवर्क के माध्यम से फाइनेंशियल लेबर डिसेंट्रलाइजेशन कर रहा है. लेबर की जगह लेने वाला ऑटोमेशन संभावित रूप से कैपिटल और लेबर रिटर्न के बीच अंतर को बढ़ा सकता है, लो स्किल/लो सैलरी और हाई स्किल/हाई सैलरी वाली नौकरियों के साथ एक खंडित श्रम बाजार बना सकता है, जबकि टेक्नोलॉजी के कारण मिड लेवल जॉब्स विस्थापित हो गई हैं.

प्रोफेशनल्स और तकनीशियन की संख्या बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार फाइनेंशियल सेक्टर में सहायक भूमिकाओं की संख्या में कमी आई, जबकि प्रोफेशनल्स और तकनीशियनों की संख्या में वृद्धि हुई. यह ट्रेंड भारत में भी साफ देखा जा रहा है. इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नियुक्तियों के कारण वित्त वर्ष 2023 में निजी बैंकों में टर्नओवर रेट 30 प्रतिशत से अधिक होने की बात कही गई है. रिपोर्ट में ये भी है कि भारत के लेबर मार्केट में एआई से संबंधित स्किल का बढ़ता महत्व 2023 में ओवरऑल रिक्रूटमेंट के सापेक्ष एआई टैलेंट रिक्रूटमेंट में वृद्धि (16.8 प्रतिशत) और हाईएस्ट एआई स्किल पेनीट्रेशन रेट में रिफ्लेक्ट होता है.

भारत डिजिटल क्रांति में सबसे आगे
अपस्किलिंग पर जोर देने के बावजूद, आरबीआई ने बताया कि ट्रेडिशनल लर्निंग और डेवलपमेंट मेथड्स वर्तमान तकनीकी परिवर्तन के लिए काफी नहीं है. आवश्यक स्किल विकसित करने के लिए पर्याप्त निवेश की आवश्यकता है. भारत डिजिटल क्रांति में सबसे आगे है, भारतीय डिजिटल इकोनॉमी के 2026 तक जीडीपी का 20 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जो मौजूदा 10 प्रतिशत से अधिक है. शशिकांत दास ने कहा है कि डिजिटलाइजेशन बैंकिंग की अगली पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त कर रहा है और अधिक किफायती लागत पर फाइनेंशियल सर्विसेज तक पहुंच में सुधार कर रहा है.

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डाटा ब्रीच का खतरा
रिपोर्ट के अनुसार एक और महत्वपूर्ण चिंता भारत में डाटा ब्रीच की बढ़ती कॉस्ट है, जो वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2023 के बीच 28 प्रतिशत बढ़कर 2 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है. साइबर रिस्क, विशेष रूप से फिशिंग अटैक और कांप्रोमाइस्ड क्रेडेंशियल, ज्यादा देखने को मिले हैं. रिपोर्ट के अनुसार, साइबर रिस्क में फ़िशिंग अटैक का योगदान 22 प्रतिशत है, जबकि चोरी या कांप्रोमाइस्ड क्रेडेंशियल्स का जोखिम 16 प्रतिशत है. वहीं, शशिकांत दास ने कहा कि फाइनेंशियल सेक्टर को डिजिटलाइजेशन को अपनाकर, कौशल बढ़ाने में निवेश कर और साइबर सिक्योरिटी पर ध्यान देकर इन चुनौतियों से निपटना होगा.


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