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शेयर बाजार में क्यों होता है बुल और बेयर का इस्तेमाल?
यदि आपको शेयर बाजार में दिलचस्पी है, तो आप इससे जुड़ी ख़बरें भी पढ़ते होंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
यदि आपको शेयर बाजार में दिलचस्पी है, तो आप इससे जुड़ी ख़बरें भी पढ़ते होंगे. ऐसे में आपने कभी न कभी इन खबरों के साथ बुल यानी कि बैल और बेयर यानी कि भालू की तस्वीर भी देखी होगी. लेकिन क्या आप इसका मतलब समझते हैं? यदि नहीं, तो चलिए हम आपको बता देते हैं. क्योंकि अगर आप स्टॉक मार्केट में पैसा लगाने जा रहे हैं या लगाते हैं, तो आपको वहां की टर्मिनॉलॉजी भी मालूम होनी चाहिए.
बुल मार्केट
जब बाजार में तेजी का माहौल हो, या निवेशक-ट्रेडरों का अनुमान है कि शेयर के भाव ऊपर चढ़ेंगे और पूरे बाजार का सूचकांक ऊपर उठेगा, तब उसे बुल मार्केट कहा जाता है. यानी ऐसी खबरों में बुल की तस्वीर लगाई जा सकती है. दूसरे शब्दों में कहें तो यदि एक तय समय में बाजार लगातार ऊपर की तरफ जाता रहता है, तो कहा जाता है कि बाजार बुल मार्केट में है. इसलिए जब भी बुल दिखे तो समझ लीजिये सब अच्छा ही अच्छा है.
बेयर मार्केट
बेयर मार्केट बुल से एकदम उलट है. जब बाजार भाव नीचे गिरने की आशंका व्यक्त की जाए या लंबे समय तक बाजार नीचे की तरफ जा रहा हो, तो कहा जाता है कि बाजार बेयर ट्रेंड में है. लिहाजा, बेयर यानी भालू नजर आए, तो संभलकर निवेश करें.
आखिर ऐसा क्यों?
शेयर बाजार में वृद्धि और गिरावट को दर्शाने के लिए आखिर इन जानवरों का इस्तेमाल क्यों किया जाता है? इसका जवाब बड़ा दिलचस्प है. भालू यानी कि बेयर अमूमन पंजे नीचे झुकाकर हमला बोलता है. दरअसल, भालू सामने वाले को डराने के लिए अपने दो पैरों पर खड़ा हो जाता है, ऐसे में उसकी लम्बाई काफी ज्यादा हो जाती है और जब वो हमला बोलता है तो स्वाभाविक रूप से उसके पंजे नीचे की ओर हो जाते हैं. इसके उलट बैल अपने सींगों से हवा में ऊपर की ओर उछालता है. इसलिए बेयर का मतलब है बाजार में मंदी का रुख है और बुल का मतलब है तेजी.
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