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भारत-न्यूजीलैंड FTA साइन: सस्ते आयात, बड़ा निवेश और रोजगार के नए मौके, जानिए पूरी डील

भारत-न्यूजीलैंड FTA एक संतुलित समझौता माना जा रहा है, जिसमें व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू हितों की भी रक्षा की गई है. यह डील आने वाले वर्षों में निवेश, रोजगार और निर्यात को नई गति दे सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आज हस्ताक्षर होने जा रहे हैं, जो दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देगा. इस डील से जहां कई उत्पाद सस्ते हो सकते हैं, वहीं निवेश, सेवाओं और रोजगार के क्षेत्र में भी बड़े अवसर खुलने की उम्मीद है. हालांकि, भारत ने किसानों और MSME सेक्टर को ध्यान में रखते हुए कई संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है.

FTA क्या है और क्यों अहम है

मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो या अधिक देशों के बीच ऐसा करार होता है, जिसमें व्यापार होने वाले अधिकांश सामानों पर कस्टम ड्यूटी घटाई या खत्म की जाती है. इसके साथ ही व्यापार और निवेश से जुड़े नियमों को आसान बनाया जाता है, जिससे कारोबार बढ़े.

समझौते की टाइमलाइन

भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA की बातचीत लंबी रही है.

1. 2010 में बातचीत शुरू हुई
2. 2015 में 9 दौर के बाद ठहराव आया
3. मार्च 2025 में बातचीत फिर शुरू हुई
4. दिसंबर 2025 में समझौता पूरा हुआ
5. 27 अप्रैल 2026 को इस पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं

इस समझौते में व्यापार, सेवाएं, निवेश, कस्टम नियम और विवाद समाधान समेत 20 अध्याय शामिल हैं.

भारत को क्या मिलेगा

इस समझौते से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं. टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर के उत्पाद न्यूजीलैंड में जीरो ड्यूटी पर निर्यात हो सकेंगे. आईटी, शिक्षा, फाइनेंस, पर्यटन और कंस्ट्रक्शन जैसे सर्विस सेक्टर में नए अवसर खुलेंगे. भारतीय पेशेवरों को 5,000 वीजा कोटा के तहत 3 साल तक काम करने का मौका मिलेगा.
इसके अलावा, न्यूजीलैंड ने अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश का वादा किया है.

न्यूजीलैंड को क्या फायदा

भारत न्यूजीलैंड को लगभग 70% टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच देगा. करीब 54% उत्पादों को पहले दिन से ही ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी. इनमें ऊन, कोयला, लकड़ी और कुछ कृषि उत्पाद शामिल हैं.

आम लोगों के लिए क्या बदलेगा

इस समझौते के बाद कुछ आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं. सेब, कीवी, मनुका शहद और कुछ डेयरी उत्पादों पर ड्यूटी में छूट मिलेगी, हालांकि इन पर कोटा और न्यूनतम कीमत की शर्तें लागू होंगी. समुद्री उत्पादों और कुछ अन्य वस्तुओं पर चरणबद्ध तरीके से ड्यूटी खत्म की जाएगी.

संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित

भारत ने अपने किसानों और MSME सेक्टर की सुरक्षा के लिए कई उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है. इनमें डेयरी, चीनी, कुछ कृषि उत्पाद, तांबा और एल्युमीनियम जैसे सेक्टर शामिल हैं. इन पर कोई ड्यूटी छूट नहीं दी जाएगी.

निवेश और रणनीतिक महत्व

न्यूजीलैंड का 20 अरब डॉलर निवेश का वादा इस समझौते को और अहम बनाता है. यह भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी आर्थिक रणनीति मजबूत करने में मदद करेगा. वहीं न्यूजीलैंड को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था तक बेहतर पहुंच मिलेगी.

 


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