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थोक महंगाई फिर चढ़ी : 8 महीनों के उच्च स्तर पर WPI, जानिए बढ़त की वजह

दिसंबर में थोक महंगाई का 8 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचना एक संकेत जरूर है कि कीमतों का दबाव लौट रहा है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा हालात में यह बढ़त काबू में रहेगी और अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

दो महीने तक राहत के बाद महंगाई ने एक बार फिर सिर उठाया है. दिसंबर में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर 0.83% पर पहुंच गई. जो पिछले आठ महीनों का उच्चतम स्तर है. खाद्य पदार्थों और कारखानों में बनी चीजों के दाम बढ़ने से यह उछाल देखने को मिला है.

दो महीने बाद पॉजिटिव जोन में लौटी महंगाई

कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में थोक महंगाई दर माइनस 1.02% और नवंबर में माइनस 0.32% थी. दिसंबर में यह फिर से शून्य से ऊपर आकर 0.83% हो गई. यानी दो महीने की राहत के बाद कीमतों का दबाव दोबारा दिखने लगा है.

किन चीजों की वजह से बढ़ी महंगाई

मंत्रालय के अनुसार मिनरल्स, मशीनरी, टेक्सटाइल और कारखानों में बने फूड प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई दर ऊपर गई है. खासतौर पर मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स और कुछ कमोडिटीज के महंगे होने का सीधा असर WPI पर पड़ा है.

फूड और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का हाल

दिसंबर में खाद्य पदार्थों में महंगाई दर बढ़कर माइनस 0.43% हो गई. जो नवंबर में माइनस 4.16% थी. अनाज. दाल और सब्जियों के थोक भाव में बढ़ोतरी देखी गई. वहीं. कारखानों में बनी चीजों में महंगाई 1.82% रही. जो नवंबर में 1.33% थी. नॉन-फूड कैटेगरी में भी महंगाई बढ़कर 2.95% हो गई.

केयरएज की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा का कहना है कि कुल मिलाकर थोक महंगाई अभी भी कंफर्टेबल लेवल पर है. अच्छी फसल. अनुकूल बेस इफेक्ट और जलाशयों में पर्याप्त पानी के चलते आने वाले समय में फूड प्राइसेज पर ज्यादा दबाव नहीं बनना चाहिए. हालांकि, कम बेस की वजह से आगे के महीनों में थोक महंगाई में हल्की बढ़त देखने को मिल सकती है.एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में थोक महंगाई दर का औसत करीब 0.4% के आसपास रह सकता है. यानी फिलहाल बढ़ोतरी के बावजूद महंगाई पर पूरी तरह से काबू बना रहने की उम्मीद है.


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