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फूड प्रोडक्ट्स पर GST लगाने के लिए किसने किया मजबूर? राजस्व सचिव ने किया खुलासा
कुछ राज्यों ने इन प्रोडक्ट्स पर GST लगाने की मांग की थी. इसके अलावा, इन उत्पादों पर कर की चोरी भी हो रही थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: फूड प्रोडक्ट्स पर GST लगाने के कारण मोदी सरकार की आलोचना हो रही है. लगातार हो रही आलोचना के बीच सरकार ने सफाई पेश की और बताया कि ऐसा करने के लिए उसे किसने मजबूर किया. राजस्व सचिव तरुण बजाज ने पैकेटबंद सामान एवं खाद्य उत्पादों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लगाने के फैसले का बचाव किया है.
राज्यों को बताया जिम्मेदार?
बजाज ने कहा, "कुछ राज्यों ने इन प्रोडक्ट्स पर GST लगाने की मांग की थी. इसके अलावा, इन उत्पादों पर कर की चोरी भी हो रही थी, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है." बजाज ने कहा कि पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर 18 जुलाई से GST लगाने का फैसला केंद्र सरकार का नहीं बल्कि GST काउंसिल का है. जीएसटी दरों के बारे में सुझाव देने वाली 'फिटमेंट समिति' ने इस बारे में निर्णय किया था, जिसमें केंद्र के अलावा राज्यों के भी अधिकारी शामिल होते हैं.
5 प्रतिशत की दर से GST लग रहा
बजाज ने कहा कि राज्यों के मंत्रियों की भागीदारी वाले मंत्री समूह (GOM) ने भी इन उत्पादों पर GST लगाने की सिफारिश की थी जिसे जीएसटी परिषद ने भी स्वीकृति दे दी. इसके आधार पर गत 18 जुलाई से पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर भी 5 प्रतिशत की दर से GST लगने लगा.
आम सहमति से लिया गया फैसला
राजस्व सचिव ने कहा कि जीएसटी से जुड़े मामलों में फैसले के लिए जीएसटी परिषद सर्वोच्च निकाय है और इस समिति ने पैकेट वाले उत्पादों पर कर लगाने का फैसला आम सहमति से लिया था. जीएसटी समिति में राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं. उन्होंने साफ किया कि दालों, गेहूं, राई, जौ, मक्का, चावल, आटा, सूजी, बेसन, मुरमुरे और दही एवं लस्सी को खुले में बेचने और पैक या लेबल नहीं किए जाने पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा.
कर कई राज्यों में पहले से लगा हुआ था
बजाज ने कहा, "जीएसटी लागू होने से पहले इन आवश्यक वस्तुओं पर कर कई राज्यों में लगा हुआ था. इनसे राज्यों को राजस्व मिल रहा था. जुलाई, 2017 में जीएसटी प्रणाली आने के समय यह परिपाटी जारी रहने की परिकल्पना की गई थी. लेकिन जब नियम और परिपत्र सामने आए तो यह कर ब्रांडेड उत्पादों पर लगाया गया था."
नहीं बताए राज्यों के नाम
उन्होंने साफ-साफ कहा कि इस तरह कर चोरी होने की शिकायतें कुछ राज्यों की तरफ से की गई थीं, हालांकि उन्होंने इन राज्यों के नाम नहीं बताए.
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