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Whatsapp पर कॉल और मैसेज करने पर क्या लगे चार्ज, सरकार ने मांगी आम जनता से राय
सोशल मैसेजिंग ऐप्स जैसे कि Whatsapp, Telegram, Facebook Messenger पर कॉल और मैसेज करने पर आने वाले दिनों में चार्ज लग सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः सोशल मैसेजिंग ऐप्स जैसे कि Whatsapp, Telegram, Facebook Messenger पर कॉल और मैसेज करने पर आने वाले दिनों में चार्ज लग सकता है. टेलीकॉम मिनिस्ट्री ने इस बारे में आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से राय मांगी है. मिनिस्ट्री ने इसके लिए एक ड्राफ्ट बिल भी तैयार किया है. जनता और स्टेकहोल्डर्स से राय मिलने के बाद बिल को संसद में पेश किया जाएगा.
कंपनियों ने बताया हो रहा है नुकसान
बिल में प्रावधान है कि व्हाट्सएप, फेसबुक के जरिए कॉल या मैसेज भेजने की सुविधा को दूरसंचार सेवा माना जाएगा. इसके लिए इन कंपनियों को लाइसेंस लेना होगा. देश की टेलीकॉम कंपनियां लगातार शिकायत करती रही हैं कि व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म उपभोक्ताओं को मैसेजिंग या कॉलिंग सर्विस मुहैया कराते हैं, जिससे उनका नुकसान होता है. ये टेलीकॉम कंपनियां कहती रही हैं कि इन कंपनियों की सर्विस भी टेलीकॉम सर्विस के अंतर्गत आती हैं.
20 अक्टूबर तक मांगी है राय
इस मुद्दे पर लोगों की राय जानने के लिए ड्राफ्ट बिल को सार्वजनिक किया गया है. 20 अक्टूबर तक लोग इस बिल के प्रावधानों के बारे में अपनी राय दे सकेंगे. लोगों की राय लेने के बाद बिल को संसद में पेश किया जाएगा. साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए भी बिल में प्रावधान किए गए हैं.
लगेगी जामताड़ा मॉडल पर रोक
दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए प्रस्तावित विधेयक में ऐसे अपराधों के लिए सजा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है. जामताड़ा, अलवर और नूंह जैसे देश के अलग-अलग इलाके इस तरह की धोखाधड़ी के लिए बदनाम हो चुके हैं. प्रस्तावित बिल में एक और प्रावधान किया गया है कि कॉल करने वाला कोई भी व्यक्ति अब कॉल रिसीव करने वाले की पहचान कर सकेगा. इसके लिए किसी ऐप को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है. देश में डिजिटल सिस्टम को सुव्यवस्थित करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार टेलीकॉम बिल के अलावा पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल और डिजिटल इंडिया बिल के मसौदे पर भी काम कर रही है.
लाइसेंस में जुड़े हैं नए नियम
सरकार ने इस बिल में लाइसेंस फीस को लेकर भी कुछ नियम जोड़े हैं. इसके तहत सरकार के पास अधिकार है कि वो लाइसेंस फीस को आंशिक या पूरी तरह से माफ कर सकती है. इसके साथ ही रिफंड का भी प्रावधान किया गया है. अगर कोई टेलीकॉम या इंटरनेट प्रोवाइडर अपना लाइसेंस सरेंडर करता है. ऐसी स्थिति में उसे रिफंड मिल सकता है. फिलहाल लाइसेंस फीस के बाद ही इस बारे में जानकारी मिलेगी कि चार्ज लगेगा या नहीं.
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