✕

होम / बिजनेस / कमजोर मानसून से खरीफ फसलों पर संकट, मक्का-दालों की पैदावार घटी तो बढ़ सकती है महंगाई: रिपोर्ट

कमजोर मानसून से खरीफ फसलों पर संकट, मक्का-दालों की पैदावार घटी तो बढ़ सकती है महंगाई: रिपोर्ट

धान की बोआई में 3.5% और मक्के के रकबे में 2.9% की गिरावट, खाद्य आपूर्ति से लेकर कारोबार की लागत तक पर पड़ सकता है असर

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

कमजोर मानसून और अल नीनो की आशंका ने देश में खरीफ फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है. जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान दीर्घकालीन औसत से 12.6% कम बारिश दर्ज की गई. इसका असर फसलों की बोआई पर भी दिखाई दे रहा है. 5 अक्टूबर तक खरीफ फसलों का कुल बोआई क्षेत्र पिछले साल की तुलना में 1.1% और कुल खाद्यान्न फसलों का रकबा 1.6% घट गया. धान, मक्का और दालों की पैदावार प्रभावित होने पर खाद्य आपूर्ति, कारोबार की लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.

डन एंड ब्रैडस्ट्रीट की रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादन पर मौसम का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि फसलों के विकास के महत्वपूर्ण चरणों में बारिश, मिट्टी की नमी और तापमान की स्थिति कैसी रहती है. यदि प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में नमी की कमी और अधिक तापमान का असर लंबे समय तक बना रहता है, तो फसलों की पैदावार घट सकती है. इसका प्रभाव केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण, पशु आहार और अन्य कृषि आधारित उद्योगों की लागत पर भी पड़ सकता है.

धान की बोआई में 3.5% की गिरावट

भारत में चावल प्रमुख खाद्यान्न होने के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली का भी अहम हिस्सा है. चावल मिलों और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के कारोबार में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. रिपोर्ट के मुताबिक, 5 अक्टूबर तक धान का बोआई क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले 3.5% कम रहा.

धान की फसल को विकास के दौरान पर्याप्त पानी और मिट्टी में नमी की जरूरत होती है. खासकर फसल के महत्वपूर्ण चरणों में पानी की कमी होने पर उसकी पैदावार प्रभावित हो सकती है. हालांकि, उत्पादन में संभावित गिरावट का आकलन इस बात से होगा कि फसल की स्थिति आगे कैसी रहती है और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी कितनी गंभीर होती है.

सरकारी भंडार से चावल की आपूर्ति को सहारा

रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरे क्षेत्रों में फसलों की बेहतर स्थिति और सरकार के पास चावल का पर्याप्त भंडार होने से उत्पादन में मामूली गिरावट की भरपाई की जा सकती है. इससे खाद्यान्न की उपलब्धता पर तत्काल बड़े संकट की आशंका कम हो जाती है.

हालांकि, यदि उत्पादन में कमी अनुमान से अधिक होती है, तो सरकारी भंडार पर दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में बाजार में चावल की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ने वाले असर पर नजर रखना जरूरी होगा. फिलहाल सरकारी भंडार चावल की आपूर्ति में संभावित बाधाओं से निपटने के लिए एक अहम सुरक्षा कवच है.

मक्के का रकबा 2.9% घटा, उद्योगों की बढ़ सकती है लागत

मक्के के बोआई क्षेत्र में भी गिरावट दर्ज की गई है. 5 अक्टूबर तक इसका रकबा पिछले साल की तुलना में 2.9% कम रहा. मक्के की फसल में फूल आने और दाने भरने के दौरान मौसम प्रतिकूल रहने पर पैदावार को नुकसान पहुंचने की आशंका अधिक होती है.

मक्का केवल खाद्यान्न के रूप में ही इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि पोल्ट्री, पशु आहार, मछली पालन, स्टार्च, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और एथेनॉल उत्पादन के लिए भी महत्वपूर्ण कच्चा माल है. ऐसे में इसकी उपलब्धता घटने से कई उद्योगों की लागत बढ़ सकती है.

चावल के मुकाबले मक्के के लिए बड़ा सार्वजनिक भंडार उपलब्ध नहीं है, जिससे उत्पादन में कमी की भरपाई करना मुश्किल हो सकता है. यदि बाजार में मक्के की आपूर्ति घटती है, तो पोल्ट्री और पशुपालन क्षेत्र में चारे की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसके अलावा, स्टार्च और एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों की लागत पर भी दबाव पड़ सकता है.

हालांकि, कारोबार पर वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि आपूर्ति में कितनी कमी आती है और कंपनियां दूसरे स्रोतों से खरीद, वैकल्पिक कच्चे माल या बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक पहुंचाने में कितनी सक्षम हैं.

अनाजों के बोआई क्षेत्र में भी गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, अनाजों के कुल बोआई क्षेत्र में 2.3% की कमी दर्ज की गई है. ऐसे में प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश, मिट्टी की नमी और फसलों की मौजूदा स्थिति पर नजर रखना जरूरी है. यदि कई अनाज उत्पादक क्षेत्रों में एक साथ पैदावार प्रभावित होती है, तो दूसरे क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ाकर कमी की भरपाई करना कठिन हो सकता है.

दालों के मामले में घरेलू उत्पादन में कमी को आयात के जरिए पूरा किया जा सकता है. हालांकि, इससे आपूर्ति वैश्विक कीमतों और रुपये की विनिमय दर पर निर्भर हो जाती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने या रुपये में कमजोरी आने पर आयात महंगा हो सकता है. ऐसे में दालों की आपूर्ति बनाए रखने के बावजूद घरेलू बाजार में लागत बढ़ने का जोखिम बना रहेगा.

पांच राज्यों की फसल स्थिति पर टिकी नजरें

मौसम की मार का कुल कृषि उत्पादन पर कितना असर पड़ेगा, यह प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसलों की स्थिति पर निर्भर करेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश का 2025-26 में विश्लेषण किए गए 20 राज्यों के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 37.7% योगदान रहा. इन राज्यों का संयुक्त उत्पादन 1,400.3 लाख टन था.

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसलों की स्थिति एक साथ बिगड़ती है या नहीं. यदि कई राज्यों में एक साथ उत्पादन घटता है, तो दूसरे क्षेत्रों से अतिरिक्त आपूर्ति के जरिए इसकी भरपाई करना मुश्किल हो सकता है.

इन राज्यों में कृषि आधारित उद्योगों की मौजूदगी भी जोखिम को बढ़ाती है. महाराष्ट्र में अनाज और बीज आधारित पशु आहार बनाने वाले 21% उद्योग स्थित हैं, जबकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में चावल मिलों की बड़ी संख्या है. ऐसे में किसी एक क्षेत्र में फसल खराब होने के मुकाबले कई प्रमुख क्षेत्रों में एक साथ उत्पादन प्रभावित होना कारोबार के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

गेहूं-चावल के मुकाबले मक्का और दालों पर ज्यादा जोखिम

रिपोर्ट के अनुसार, गेहूं, चावल, मक्का, मोटे अनाज और दालों की अलग-अलग आपूर्ति व्यवस्थाओं के कारण कमजोर मानसून का असर पूरे खाद्यान्न बाजार में समान रूप से दिखाई देना जरूरी नहीं है. इसका प्रभाव कुछ खास कृषि जिंसों और उनसे जुड़े उद्योगों पर अधिक पड़ सकता है.

चावल और गेहूं के पर्याप्त सरकारी भंडार होने से उत्पादन में मामूली गिरावट का उपभोक्ता कीमतों पर तत्काल असर सीमित रह सकता है. इसके विपरीत, मक्का, दालों और कुछ खास क्षेत्रों से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर कारोबार को उतनी सुरक्षा नहीं मिलती. इसलिए खाद्य महंगाई के सरकारी आंकड़ों में असर दिखने से पहले ही कंपनियों और कारोबारियों को कच्चे माल की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ सकता है.

उत्पादन घटने से कब बढ़ेगी महंगाई?

कमजोर फसल का मतलब यह नहीं है कि महंगाई में तुरंत तेज उछाल आएगा. कीमतों पर वास्तविक दबाव तब बढ़ता है, जब उत्पादन में गिरावट इतनी बड़ी हो जाए कि मौजूदा भंडार, आयात और बाजार में उपलब्ध आपूर्ति से मांग पूरी करना मुश्किल होने लगे.

चावल और गेहूं के मामले में सरकारी भंडार अस्थायी कमी से निपटने में मदद कर सकते हैं. लेकिन मक्का और दालों जैसी फसलों के लिए यह सुरक्षा अपेक्षाकृत कमजोर है. इनकी मांग खाद्य पदार्थों, पशु आहार और औद्योगिक इस्तेमाल, तीनों क्षेत्रों से आती है. इसलिए आपूर्ति में कमी आने पर इनकी कीमतों में तेजी का असर अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई दे सकता है.

आने वाले समय में मानसून की स्थिति, मिट्टी में नमी, प्रमुख राज्यों में फसलों की सेहत और उत्पादन के सरकारी अनुमानों पर नजर रहेगी. यदि मौसम संबंधी जोखिम बढ़ते हैं और पैदावार प्रभावित होती है, तो खाद्य आपूर्ति के साथ कृषि आधारित उद्योगों की लागत और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है.
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

AI और डेटा सेंटर उपकरण बनाएगा अडानी ग्रुप, अमेरिकी कंपनी के साथ 50:50 JV की तैयारी

AI रैक, सर्वर, स्टोरेज और कूलिंग सिस्टम का होगा निर्माण, भारत के साथ विदेशी बाजारों में भी सप्लाई की योजना

1 hour ago

शेयर बाजार में आज दबाव के संकेत, कच्चा तेल 107 डॉलर के करीब; इन शेयरों पर नजर

मंगलवार, 13 अक्टूबर को बीएसई सेंसेक्स 1,109.10 अंक यानी 1.54 फीसदी चढ़कर 73,033.78 पर बंद हुआ था. एनएसई निफ्टी भी 358.60 अंक यानी 1.60 फीसदी बढ़कर 22,721.95 पर पहुंच गया था.

2 hours ago

JIO कैश मशीन: भारत का पहला ₹10 लाख करोड़ का IPO, नेट डेट से लगभग मुक्त

जियो के ₹27,500 करोड़ के कर्ज खत्म हो जाएंगे. फ्री कैश फ्लो 29 गुना बढ़ गया है. 524 मिलियन ग्राहक. एयरटेल से कम कीमत पर वैल्यूएशन. वे आंकड़े, जिन पर सुर्खियों में ध्यान नहीं दिया गया.

13 hours ago

AI से ट्रैफिक मैनेजमेंट तक, परिवहन क्षेत्र में बदल रही तकनीक की तस्वीर; एक्सपो में दिखे नए समाधान

ANPR कैमरे, बैरियरलेस टोलिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसे समाधानों पर रहा फोकस, 300 से ज्यादा ब्रांड ने प्रदर्शित की परिवहन क्षेत्र की तकनीक

16 hours ago

भारत में बनेगा पहला AI-पायलटेड फाइटर विमान, Flying Wedge ने पेश किया FWD Supreme का प्रोटोटाइप

नई दिल्ली में हुआ अनावरण, 1,500 किमी से अधिक रेंज और AI आधारित स्वायत्त लड़ाकू अभियानों के लिए विकसित किया जा रहा विमान; कंपनी का लक्ष्य भारत में ही डिजाइन और निर्माण करना

17 hours ago


बड़ी खबरें

JIO कैश मशीन: भारत का पहला ₹10 लाख करोड़ का IPO, नेट डेट से लगभग मुक्त

जियो के ₹27,500 करोड़ के कर्ज खत्म हो जाएंगे. फ्री कैश फ्लो 29 गुना बढ़ गया है. 524 मिलियन ग्राहक. एयरटेल से कम कीमत पर वैल्यूएशन. वे आंकड़े, जिन पर सुर्खियों में ध्यान नहीं दिया गया.

13 hours ago

AI और डेटा सेंटर उपकरण बनाएगा अडानी ग्रुप, अमेरिकी कंपनी के साथ 50:50 JV की तैयारी

AI रैक, सर्वर, स्टोरेज और कूलिंग सिस्टम का होगा निर्माण, भारत के साथ विदेशी बाजारों में भी सप्लाई की योजना

1 hour ago

शेयर बाजार में आज दबाव के संकेत, कच्चा तेल 107 डॉलर के करीब; इन शेयरों पर नजर

मंगलवार, 13 अक्टूबर को बीएसई सेंसेक्स 1,109.10 अंक यानी 1.54 फीसदी चढ़कर 73,033.78 पर बंद हुआ था. एनएसई निफ्टी भी 358.60 अंक यानी 1.60 फीसदी बढ़कर 22,721.95 पर पहुंच गया था.

2 hours ago

कमजोर मानसून से खरीफ फसलों पर संकट, मक्का-दालों की पैदावार घटी तो बढ़ सकती है महंगाई: रिपोर्ट

धान की बोआई में 3.5% और मक्के के रकबे में 2.9% की गिरावट, खाद्य आपूर्ति से लेकर कारोबार की लागत तक पर पड़ सकता है असर

1 hour ago

टेस्ला: एक बेहतरीन कार ब्रांड को और बेहतर क्या बना सकता है?

टेस्ला की सड़क यात्रा इस बात पर विचार करने का मौका देती है कि कैसे अलग पहचान वाले उत्पाद लोगों को उनका समर्थक बनाते हैं और क्यों दमदार ब्रांडों को भी एक व्यापक मानवीय सोच की जरूरत होती है.

17 hours ago