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Vodafone-Idea को मिली बड़ी राहत, कंपनी के बकाया ₹36950 करोड़ को इक्विटी में बदलेगी सरकार
एक्सचेंज में दी जानकारी में कंपनी ने बताया है कि सरकार कंपनी पर बकाया राशि को इक्विटी में बदलेगी. इस बदलाव के बाद कंपनी में सरकार की कुल हिस्सेदारी 49 प्रतिशत हो जाएगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत सरकार ने वोडाफोन आइडिया (VI) को बड़ी राहत दी है. सरकार ने कंपनी के 36,950 करोड़ रुपये के बकाया स्पेक्ट्रम नीलामी देनदारी को इक्विटी में बदलने का फैसला किया है, जिससे कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी 22.6 फीसदी से बढ़कर लगभग 49 फीसदी हो जाएगी. वोडाफोन आइडिया ने कहा है कि सरकार उसके स्पेक्ट्रम नीलामी ड्यू को 36,950 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयरों में बदल देगी. हालांकि कंपनी का ऑपरेशनल कंट्रोल प्रमोटर्स के पास ही रहेगा. सरकार के इस फैसले से कंपनी को बड़ी राहत मिली है क्योंकि हालही में कंपनी ने कहा था कि वह फिलहाल देनदारी को चुकाने की स्थिति में नहीं है.
कंपनी ने क्या बताया है?
कंपनी ने कहा, 'दूरसंचार क्षेत्र के लिए सितंबर, 2021 में एक सुधार योजना आई थी. इसके तहत स्पेक्ट्रम नीलामी की बकाया राशि को इक्विटी शेयरों में बदलने का फैसला हुआ है. यह वो बकाया है, जो स्थगन अवधि खत्म होने के बाद चुकाया जाना था. संचार मंत्रालय ने यह फैसला किया है कि भारत सरकार को इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे. इक्विटी शेयरों में बदलने वाली कुल राशि 36,950 करोड़ रुपये है.' इसका मतलब है कि सरकार कंपनी को बकाया चुकाने के लिए पैसे देने के बजाय कंपनी में हिस्सेदारी लेगी.
वोडाफोन आइडिया ने आगे बताया कि सेबी (SEBI) और दूसरे विभागों से अनुमति मिलने के बाद कंपनी 30 दिनों के अंदर शेयर जारी करेगी. ये शेयर 10 रुपये के भाव पर जारी होंगे. कुल 3,695 करोड़ शेयर जारी किए जाएंगे. सेबी शेयर बाजार पर नजर रखता है. कंपनी ने शेयर बाजार को बताया, 'नए शेयर जारी होने के बाद कंपनी में भारत सरकार की हिस्सेदारी मौजूदा 22.60 फीसदी से बढ़कर लगभग 48.99 फीसदी हो जाएगी.' इसका मतलब है कि सरकार अब कंपनी की सबसे बड़ी मालिक बन जाएगी. हालांकि, वोडाफोन आइडिया ने यह भी कहा कि कंपनी का कामकाज अभी भी उसके पुराने मालिक ही देखेंगे यानि सरकार कंपनी के रोजमर्रा के कामों में दखल नहीं देगी.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, वोडाफोन आइडिया पर स्पेक्ट्रम नीलामी का पैसा बकाया था. स्पेक्ट्रम एक तरह का लाइसेंस होता है, जो मोबाइल कंपनियों को नेटवर्क चलाने के लिए सरकार से लेना पड़ता है. कंपनी यह पैसा चुका नहीं पाई, इसलिए उसने सरकार को 22.6 फीसदी हिस्सेदारी दे दी थी. अब सरकार और ज्यादा हिस्सेदारी ले रही है. यह कदम सरकार ने इसलिए उठाया है ताकि वोडाफोन आइडिया कंपनी बची रहे. अगर यह कंपनी बंद हो जाती तो बहुत सारे लोगों की नौकरी चली जाती और ग्राहकों को भी परेशानी होती. सरकार नहीं चाहती कि टेलीकॉम सेक्टर में सिर्फ दो-तीन कंपनियां ही रहें. इसलिए वोडाफोन आइडिया को बचाने की कोशिश की जा रही है.
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