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DXC विवाद पर US सुप्रीम कोर्ट सख्त, TCS को करना होगा अतिरिक्त 7 करोड़ डॉलर का प्रावधान

टाटा कंसल्टेंसी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने DXC टेक्नोलॉजी से जुड़े व्यापारिक गोपनीयता विवाद में उसकी समीक्षा याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को अमेरिका में चल रहे बहुचर्चित DXC टेक्नोलॉजी ट्रेड सीक्रेट्स मामले में बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर कंपनी की समीक्षा याचिका सुनने से इनकार कर दिया है. इसके बाद टीसीएस को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त प्रावधान करना पड़ेगा. कंपनी पहले ही 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान कर चुकी है और अब कुल देनदारी हर्जाने, ब्याज तथा कानूनी खर्चों के कारण और बढ़ गई है.

सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

टाटा कंसल्टेंसी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने DXC टेक्नोलॉजी से जुड़े व्यापारिक गोपनीयता विवाद में उसकी समीक्षा याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. अदालत के इस फैसले के बाद कंपनी को अतिरिक्त 7 करोड़ डॉलर का प्रावधान करना होगा. यह राशि एक बार के असाधारण व्यय के रूप में दर्ज की जाएगी.

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद वर्ष 2019 में सामने आया था, जब कंप्यूटर साइसेंज कॉर्पोरेशन (CSC) (अब DXC टेक्नोलॉजी का हिस्सा) ने टीसीएस पर व्यापारिक गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग का आरोप लगाया था. आरोप था कि टीसीएस ने ट्रांसअमेरिका के करीब 2,200 कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ने के बाद उनकी सॉफ्टवेयर तक पहुंच का इस्तेमाल कर प्रतिस्पर्धी लाइफ इंश्योरेंस सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म विकसित किया.

मामला उस समय शुरू हुआ जब ट्रांसअमेरिका और टीसीएस के बीच करीब 2 अरब डॉलर का आउटसोर्सिंग समझौता हुआ था. टीसीएस का दावा था कि इस प्रक्रिया में उसकी गोपनीय तकनीकी जानकारी का अनुचित उपयोग किया गया.

अदालत ने लगाया भारी हर्जाना

साल 2023 में अमेरिकी अदालत की एक पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि टीसीएस ने जानबूझकर व्यापारिक गोपनीयता का दुरुपयोग किया है. इसके बाद कंपनी पर 21 करोड़ डॉलर का हर्जाना लगाया गया. हालांकि, 2024 में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रेंटली स्टार ने इस राशि को घटाकर 16.8 करोड़ डॉलर कर दिया था. बाद में पांचवें अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने भी इस फैसले को बरकरार रखा.

अपील की सभी राहें हुईं बंद

टीसीएस ने फैसले के खिलाफ पहले अपील और फिर सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर की थी. कंपनी को उम्मीद थी कि उसे कानूनी राहत मिलेगी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद उसके लिए फैसले को चुनौती देने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं.

कंपनी पर कितना पड़ेगा असर?

टीसीएस पहले ही इस मामले के लिए 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान कर चुकी है. अब अतिरिक्त 7 करोड़ डॉलर जोड़ने के बाद कंपनी की कुल वित्तीय देनदारी बढ़ जाएगी. इसमें हर्जाना, ब्याज और कानूनी खर्च शामिल हैं. हालांकि, कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट को देखते हुए इसका दीर्घकालिक कारोबारी प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है, लेकिन अल्पकाल में यह उसके मुनाफे पर दबाव डाल सकता है.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निवेशकों की नजर टीसीएस के आगामी तिमाही नतीजों पर रहेगी. बाजार यह आकलन करेगा कि अतिरिक्त प्रावधान का कंपनी की लाभप्रदता और मार्जिन पर कितना असर पड़ता है. साथ ही, यह मामला वैश्विक आईटी कंपनियों के लिए बौद्धिक संपदा और व्यापारिक गोपनीयता से जुड़े जोखिमों की भी याद दिलाता है.


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