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भारत-जापान गठजोड़ से रेयर अर्थ सेक्टर को नई उड़ान, आंध्र प्रदेश में बनेगा 2,250 करोड़ का मेगा प्लांट

इस परियोजना में लगभग 2,250 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. संयंत्र में प्रतिवर्ष 1.2 किलो टन सिंटर्ड नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) मैग्नेट का उत्पादन होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 hours ago

भारत और जापान के बीच बढ़ता औद्योगिक सहयोग अब एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है, जिस पर लंबे समय से चीन का लगभग एकाधिकार रहा है. आंध्र प्रदेश में जापान की अग्रणी कंपनी प्रोटेरियल द्वारा 2,250 करोड़ रुपये के निवेश से रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण संयंत्र स्थापित किया जाएगा. यह परियोजना न केवल भारत की तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देगी, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत को वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है.

आंध्र प्रदेश में स्थापित होगा अत्याधुनिक प्लांट

जापान की प्रमुख एडवांस्ड मैटेरियल्स कंपनी प्रोटेरियल आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले स्थित अच्युतापुरम में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण इकाई स्थापित करेगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना में लगभग 2,250 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. संयंत्र में प्रतिवर्ष 1.2 किलो टन सिंटर्ड नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) मैग्नेट का उत्पादन होगा.

ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइनों, औद्योगिक मोटर्स, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों में उपयोग होने वाले सबसे महत्वपूर्ण घटकों में शामिल हैं. आंध्र प्रदेश की निवेश प्रोत्साहन समिति ने हाल ही में इस परियोजना को मंजूरी प्रदान की है.

चीन की मोनोपॉली को मिलेगी चुनौती

वर्तमान में वैश्विक रेयर अर्थ मैग्नेट बाजार और इसकी सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा है. दुनिया भर के कई उद्योग इन महत्वपूर्ण सामग्रियों के लिए चीनी आपूर्ति पर निर्भर हैं. ऐसे में भारत में इस उत्पादन क्षमता का विकास रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

इस परियोजना के शुरू होने से भारत की आयात निर्भरता कम होगी और देश अपनी घरेलू रेयर अर्थ वैल्यू चेन विकसित करने में सक्षम होगा. इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों को भी मजबूती मिलेगी.

सरकार की आत्मनिर्भरता रणनीति को मिलेगा बल

केंद्र सरकार हाल के वर्षों में सेमीकंडक्टर, बैटरी और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है. इसी दिशा में सरकार ने हाल ही में सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है. यह कदम दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र को केवल औद्योगिक अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रहा है.

कौन है प्रोटेरियल?

प्रोटेरियल, जिसे पहले हिताची मेटल्स के नाम से जाना जाता था, रेयर अर्थ मैग्नेट तकनीक के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी कंपनियों में गिनी जाती है. कंपनी उच्च गुणवत्ता वाले चुंबकीय पदार्थों और उन्नत औद्योगिक सामग्रियों के निर्माण के लिए जानी जाती है. पिछले वर्ष कंपनी ने लगभग 45,000 करोड़ रुपये का समेकित राजस्व दर्ज किया था. इसके संचालन उत्तर अमेरिका, यूरोप, चीन और एशिया के कई देशों में फैले हुए हैं.

'चीन प्लस वन' रणनीति में भारत को मिलेगा लाभ

वैश्विक कंपनियां अब सप्लाई चेन के लिए केवल चीन पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक उत्पादन केंद्र तलाश रही हैं. इसे 'चीन प्लस वन' रणनीति कहा जाता है. भारत इस रणनीति का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने की कोशिश कर रहा है.

जापान की इस बड़ी परियोजना से भारत को न केवल निवेश और रोजगार मिलेगा, बल्कि वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर भी प्राप्त होगा. आने वाले वर्षों में यह परियोजना भारत को इस रणनीतिक क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
 


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