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आज से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक शुरू, जानिए कितनी बढ़ेंगी ब्याज दरें

फेडरल रिजर्व की जिम्मेदारी अमेरिका में लोगों के लिए कीमतों को स्थायी रखने की होती है. कीमतों को स्थायी रखने का मतलब है महंगाई को एक दायरे में रखना, जो कि फेड के लिए लंबी अवधि का लक्ष्य 2% है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आज से दो दिनों की बैठक शुरू हो रही है. इस बैठक पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं. इस बैठक से पहले ज्यादातर एक्सपर्ट्स ये अनुमान जता रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में इजाफा करेगा, हालांकि ये संकेत फेड भी दे चुका है, लेकिन ये बढ़ोतरी कितनी होगी इसका पता दो दिनों की बैठक खत्म होने के बाद फेड की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही चलेगा. फेडरल रिजर्व चेयरमैन जेरोमी पॉवेल इस बात को कह चुके हैं कि जुलाई में ब्याज दरें 0.50% से 0.75% तक बढ़ाई जा सकती हैं. 

फेड रिजर्व 1% तक बढ़ा सकता ब्याज दरें
लेकिन दुनिया भर के अर्थशास्त्री ये भी अनुमान लगा रहे हैं कि फेड ब्याज दरों में 0.75% से लेकर 1% तक की बढ़ोतरी कर सकता है. दरअसल, अमेरिका की इकोनॉमी और महंगाई दोनों की सेहत कुछ ठीक नहीं चल रही है. अमेरिका के लोग 40 साल में सबसे ज्यादा महंगाई को झेल रहे हैं. जून में अमेरिकी रिटेल महंगाई 9.1 परसेंट तक पहुंच चुकी है. ऐसे में फेडरल रिजर्व के सामने ग्रोथ के साथ साथ महंगाई पर काबू रखने की डबल चुनौती होगी. इसलिए महंगाई पर काबू पाने के लिए फेड पर ब्याज दरें बढ़ाने का जबरदस्त दबाव है. 

इस साल 3 बार और बढ़ेंगी ब्याज दरें 
जुलाई की पॉलिसी के बाद भी फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रखेगा. इस साल यानी 2022 में फेड तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा. जुलाई के बाद फेड की अगली बैठकें सितंबर, नवंबर और दिसंबर में होंगी. आपको बता दें कि फेड ने  जून में ब्याज दरों में  0.75 परसेंट की बढ़ोतरी की थी, जोकि 1994 के बाद से सबसे बड़ी बढ़ोतरी है. 

इस साल अबतक 3 बार बढ़ी ब्याज दरें 
साल 2022 में फेडरल रिजर्व अबतक तीन बार ब्याज दरों को बढ़ा चुका है. कोरोना महामारी के दौरान अमेरिकी ब्याज दरें जीरो परसेंट हो गईं थी, फिर इसके बाद मार्च में फेड ने ब्याज दरों को बढ़ाना शुरू किया. मार्च में फेड ने ब्याज दरों में 0.25% का इजाफा किया. जो कि तीन साल में पहली बढ़ोतरी थी. फिर मई में 0.50% की और बढ़ोतरी की, जून में 0.75% का इजाफा किया, जिससे ब्याज दरें 1.5% से 1.75% की रेंज में आ गईं. अगर इसी रफ्तार से फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाता रहा तो इस साल के अंत तक अमेरिका में ब्याज दरें  3.25% से 3.5% के बीच आ जाएंगी. 

फेड क्यों बढ़ाएगा दरें 
दुनिया के बाकी सेंट्रल बैंकों की तरह ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जिम्मेदारी भी अमेरिका में लोगों के लिए कीमतों को स्थायी रखने की होती है. कीमतों को स्थायी रखने का मतलब है महंगाई को एक दायरे में रखना, जो कि फेड के लिए लंबी अवधि का लक्ष्य 2 परसेंट है. साल 2020 में CPI यानी रिटेल महंगाई दर 1.4% थी, साल 2021 में ये 7% तक पहुंच गई और अब ये 4 दशकों में सबसे ज्यादा 9.1% पर है. महंगाई को काबू रखने के लिए फेडरल जिस टूल का इस्तेमाल करता है उसे फेडरल फंड रेट कहते हैं, जिस पर बैंक्स एक दूसरे को लोन देते हैं. हालांकि फेडरल रिजर्व सभी ब्याज दरों को डायरेक्ट कंट्रोल नहीं करता है, लेकिन एक बार फेडरल फंड रेट बढ़ाने के बाद बाकी ब्याज दरें इसका अनुसरण करती हैं. यानी होम लोन से लेकर क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले रेट सब इसी से तय होते हैं. 

फेड के ब्याज दरें बढ़ाने से महंगाई कैसे काबू होती है, इसे समझते हैं. दरअसल जब फेडरल रिजर्व दरें बढ़ाता है तो कर्ज लेना महंगा हो जाता है, उपभोक्ता महंगा कर्ज लेने से कतराते हैं जिससे वो खर्च कम करता है. डिमांड में तेजी से गिरावट आती है और महंगाई धीरे धीरे कम होने लगती है. हालांकि इससे ग्रोथ पर निगेटिव असर पड़ता है. 

VIDEO: किस बैंक में FD पर मिल रहा कितना इंटरेस्ट? जानिए सबसे ज्यादा कौन दे रहा?


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