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व्यापारी मोदी 3.0 के पूर्ण बजट से पहले बाजारों में ले रहे हैं शॉर्ट पोजीशन, जानिए क्यों?

अगर बजट में कुछ सकारात्मक हो या कुछ भी नकारात्मक न हो, तो शॉर्ट कवरिंग रैली निफ्टी और सेंसेक्स को तेजी से ऊपर ले जा सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत के घरेलू व्यापारियों के बीच निराशा का माहौल है, क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में बजट पेश करने जा रही हैं. 22 जुलाई को वित्त मंत्री मौजूदा सरकार का पहला पूर्ण वर्ष का बजट पेश करेंगी, जो जून में सत्ता में वापसी के बाद उनका पहला बजट होगा. व्यापारी इसलिए निराश है क्योकि डेटा से पता चला है कि घरेलू व्यापारी इंडेक्स वायदा में 2.12 लाख अनुबंधों पर शॉर्ट पोजीशन (बिक्री की शर्तें) ले रहे हैं, जो इस साल की सबसे ऊंची 2.95 लाख अनुबंधों से सिर्फ 28 प्रतिशत कम है (सभी समय की सबसे ऊँची शॉर्ट पोजीशन 22 सितंबर, 2016 को 5.83 लाख अनुबंध थी). वर्तमान नेट शॉर्ट पोजीशन 2017 के बाद से सबसे बड़ी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब है कि घरेलू व्यापारी बजट को लेकर बहुत कम उम्मीदें लेकर चल रहे हैं.

बेंचमार्क निफ्टी इंडेक्स 4 जून को लगभग 22,000 स्तर पर गिर गया था क्योंकि बीजेपी को लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए साधारण बहुमत से कम सीटें मिलने की संभावना थी, लेकिन इसके बाद के दिनों में जैसे ही पीएम मोदी ने तीसरी बार शपथ ली, निफ्टी इंडेक्स धीरे-धीरे 24,000 के पार चला गया और 24,854 का नया उच्चतम स्तर छू लिया. बाजार अपने उच्चतम स्तरों के पास मंडरा रहे हैं, घरेलू ब्रोकरेज और व्यापारी हालिया रैली के बाद मुख्य रूप से बिकवाली की सलाह दे रहे हैं.

स्ट्राइक मनी एनालिटिक्स और इंडिया चार्ट्स के संस्थापक रोहित श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव परिणामों के बाद बाजार में उम्मीद से काफी ज्यादा तेजी आई है, बजट से पहले बढ़ता निराशावाद चुनाव परिणामों से पहले बढ़ते निराशावाद के समान है.
 
अब तक इस महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने नकद सेगमेंट में 21,664 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने केवल 779 करोड़ रुपये की खरीदारी की है. जुलाई में नकद बाजार में FPI की शुद्ध खरीदारी कैलेंडर वर्ष के लिए नकद बाजार में सबसे अधिक मासिक प्रवाह है. जून में नकद बाजार में FPI का शुद्ध प्रवाह केवल 2037 करोड़ रुपये था जबकि डीआईआई ने 28,633 करोड़ रुपये डाले थे. मई में, जब FII ने नकद इक्विटी 42,214 करोड़ रुपये बेचीं, तो DII ने 55,733 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी.

श्रीवास्तव के अनुसार, बजट केवल यह संकेत दे सकता है कि किन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना है. सरकार अपनी खुद की बाजार रैली को मारने की संभावना नहीं है. यह केवल ऊर्जा को सही दिशा में ले जा सकता है. पैसा उन हिस्सों का पीछा करेगा जो अभी भी सही मूल्य पर हैं और सकारात्मक गति को बनाए रखेंगे. घरेलू खिलाड़ियों के विपरीत, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) उत्साही मूड में बजट में जा रहे हैं और लंबी स्थिति रखते हैं. डेटा से पता चलता है कि FPI 3.58 लाख अनुबंधों की शुद्ध लंबी या तेजी की शर्तें रखते हैं और उनकी हाल की शुद्ध लंबी ऊंचाई 4 जुलाई को 3.92 लाख अनुबंध थी.

आगामी बजट और आने वाले हफ्तों में फोकस पीएसयू (सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों) के स्टॉक्स पर हो सकता है क्योंकि मोदी सरकार सरकारी कंपनियों की भूमि मुद्रीकरण के लिए तैयारी कर रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी कंपनियां देश में सबसे बड़ी जमीन मालिक हैं और इन वास्तविक संपत्तियों को बिक्री पर रखने का कोई भी कदम बजट की अपेक्षाओं के बाहर सरकार को बड़ी आय दिलाएगा. 

(लेखक- पलक शाह, BW रिपोर्टर. पलक शाह ने "द मार्केट माफिया-क्रॉनिकल ऑफ इंडिया हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" नामक पुस्तक लिखी है. पलक लगभग दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं, उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसी प्रमुख वित्तीय अखबारों के लिए काम किया है).


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