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महंगाई न बढ़ाए सरकार का सिरदर्द, इसलिए CPI में फेरबदल की है तैयारी!
मोदी सरकार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से कुछ खाद्य सामग्रियों को बाहर करने की योजना पर काम कर रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
महंगाई के आंकड़े सरकारों के लिए हमेशा से ही चिंता की वजह रहे हैं. महंगाई ने कई राज-पाठ तक बदल डाले हैं. मोदी सरकार के कार्यकाल में महंगाई घोड़े की तरह दौड़ी है. पेट्रोल-डीजल से लेकर खाने-पीने की वस्तुओं तक सबकी कीमतें बेतहाशा बढ़ी हैं. अब सरकार महंगाई के इस 'घोड़े' को नियंत्रित दिखाने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में फेरबदल करने की तैयारी कर रही है.
समिति कर रही विचार
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार खुदरा महंगाई के आंकड़े को नियंत्रित करने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से कुछ खाद्य सामग्रियों को बाहर कर सकती है. CPI में बदलाव के लिए सरकार ने एक समिति भी बनाई है, जो गंभीरता से इस पर विचार कर रही है. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि समिति उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य पदार्थों का भार कम से कम 8 प्रतिशत तक घटा सकती है. अभी CPI में खाद्य एवं पेय सामग्रियों का भार 54.2 प्रतिशत है.
सुस्त पड़ेगी रफ्तार
माना जा रहा है कि इस बदलाव के बाद खुदरा महंगाई के आंकड़े बढ़ने की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है. सीपीआई में अभी खाद्य सामग्रियों की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है. ऐसे में इनकी कीमतों में वृद्धि से खुदरा महंगाई के आंकड़े भी प्रभावित होते हैं. जून में खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतें एक साल पहले के मुकाबले 9.36% बढ़ी थीं. इससे रिटेल इन्फ्लेशन बढ़कर 5.08% पर पहुंच गई थी. यदि सामग्रियों का भार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में कम कर दिया जाता है, तो महंगाई के आंकड़े सरकार को परेशान नहीं करेंगे. हालांकि, सवाल यह है कि क्या इससे वास्तविक स्थिति में कोई बदलाव आएगा?
यह कदम ठीक नहीं
अभी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में करीब 299 आइटम्स शामिल हैं. इनमें से क्या हटाए जाएंगे, ये फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं. लेकिन खाद्य सामग्रियों का भार कम करने के साथ-साथ घोड़ा गाड़ी का किराया आदि जैसी वस्तुओं को गणना से बाहर किया जा सकता है. देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. नागेश्वरन ने भी पिछले महीने कहा था कि RBI के मुद्रास्फीति लक्ष्य में खाद्य महंगाई को शामिल नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि यह बात अलग है कि कई अर्थशास्त्रियों को लगता है कि ऐसा करना ठीक नहीं होगा. उनका मानना है कि यह कदम भारत जैसे देश के लिए उचित नहीं है.
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