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अधिकतर लोग अनजाने में करते हैं ये वाली गलती! खाली हो जाएगी तिजोरी

साइबर अपराधियों का अगला निशाना आप भी बन सकते हैं. तो जानते हैं कि हम अनजाने में गलती कहां करते हैं और इससे कैसे बचा सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: इन दिनों साइबर क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है. सरकार की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 2018 से 2021 के बीच साइबर अपराध और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में लगभग सात गुना उछाल आया है. सरकारी एजेंसी इंडियम कम्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम के अनुसार, साल 2018 में 2,08,456 मामले सामने आए थे. वहीं, 2021 में 14,02,809 मामले सामने आए. साल 2022 की बात करें तो जनवरी और फरवरी में ही 2,12,485 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इन आंकड़ों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपके लिए सतर्क रहना कितना जरूरी है. इन अपराधियों का अगला निशाना आप भी बन सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि हम अनजाने में गलती कहां करते हैं और इससे कैसे बचा सकता है.

कुकी को बिना सोचे समझे एक्सेप्ट नहीं करें
इन दिनों मोबाइल पर आप कोई नई वेबसाइट खोलते हैं तो सबसे पहले एक नोटिफिकेशन पॉपअप होता है और आपसे कुकी को एक्सेप्ट करने के लिए कहा जाता है. चूंकि आप साइट के अंदर जाना चाहते हैं, तो इस बात पर ध्यान नहीं देते हैं और तुरंत ही कुकी एक्सेप्ट कर लेते हैं. आपको बता दें कि ऐसा नहीं करना चाहिए, आपको सभी वेबसाइट के कुकी को एक्सेप्ट नहीं करनी चाहिए.

कुकी है क्या
कुकी एक प्रकार का टेक्स्ट फाइल है. स्मार्टफोन में हमारी जो भी इंफॉर्मेशन होती है, कुकी एक्सेप्ट करते ही उस फाइल में सेव हो जाती है. यूजर्स का नाम, पता, मोबाइल नंबर से लेकर सभी जरूरी जानकारी कुकीज में सेव हो जाती है. यदि हम किसी वेबसाइट के कुकीज को एक्सेप्ट कर लेते हैं तो हम जब भी उसके WebPage पर जाएंगे, तब Device में एक छोटा Text File Save हो जाता है. यही फाइल कुकीज कहलाता है. कुकीज के कारण ही हमें उस वेबसाइट पर की गई गतिविधियों का पता चल जाता है. Online Shopping में भी इसका काफी इस्तेमाल होता है.

कुकी एक्सेप्ट करने से क्या होता है
जैसे ही आप कुकी एक्सेप्ट करते हैं, वैसे ही आपकी सारी महत्वपूर्ण जानकारी भी उन वेबसाइट्स के पास चली जाती है और यहीं से दुरुपयोग होने की संभावनी बढ़ जाती है.

खतरा कैसे बढ़ जाता है
आजकल हमारे बैंक अकाउंट से लेकर सोशल अकाउंट्स सबकुछ स्मार्टफोन पर सेव रहते हैं. इन सभी के पासवर्ड भी याद रखना संभव नहीं हो पाता, इसलिए पासवर्ड्स को हम अपने स्मार्टफोन में सेव कर लेते हैं. इसी बात का फायदा फ्रॉड करने वाले उठाते हैं और थोड़ी सी भी लापरवाही बरतने पर आपके द्वारा सेव किए गए डाटा का गलत इस्तेमाल हो जाता है.

बचने के लिए क्या करें
जहां तक संभव हो कुकी को डिक्लाइन कर देने में ही भलाई है. फिर भी आपको बहुत जरूरी लगे तो भरोसेमंद वेबसाइट की कुकी को ही एक्सेप्ट करना चाहिए. यदि आपके लिए कुकी एक्सेप्ट करना मजबूरी ही हो जाए, तो काम खत्म होते ही स्मार्टफोन की सेटिंग्स में जाकर कुकी डिलीट कर दें.

ऑथेंटिक वेबसाइट की कैसे करें पहचान
आप जब भी कोई वेबसाइट ब्राउज करें तो उसके URL में देख लें कि https लिखा हुआ है या नहीं. यदि URL में https की जगह http लिखा हो तो उस वेबसाइट पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करें. https और http में एक छोटा सा पर बहुत काम का अंतर है. यहां S का अर्थ सिक्योरिटी से है, जहां दावा किया जाता है कि आपका डेटा सुरक्षित है लेकिन http वाले URL में कुछ भी सुरक्षित नहीं है.

फ्रॉड से बचने के लिए और क्या-क्या बरतें सावधानी
- सबसे पहले मोबाइल के 15 अंकों वाला IMEI नंबर को कहीं नोट कर लें, जिससे कभी आपका फोन गुम हो जाए तो उसे ट्रैक करने में पुलिस को आसानी होगी.
- स्मार्टफोन में ऑटोलॉक का फीचर हमेशा ऑन रखें.
- सिम कार्ड को लॉक करने के लिए पिन का इस्तेमाल करें.
- स्मार्टफोन में हर एक जरूरी सूचना को सेक्योर्ड करने के लिए पासवर्ड का इस्तेमाल करें. उसके बिना कोई दूसरा व्यक्ति उसे एक्सेस नहीं कर पाएगा.
- स्पैम कॉल और स्पैम मैसेज को हमेशा ब्लॉक करें.
- जरूरी डॉक्यूमेंट्स के एक्सेस के लिए दूसरी वेबसाइट या ऐप को परमिशन न दें.


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