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BHEL के खिलाफ इस कंपनी ने वापस ली दिवालिया याचिका, ये रही वजह
इस कंपनी ने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल के खिलाफ मात्र 25 करोड़ रुपये के भुगतान को लेकर NCLT में याचिका दायर कर दी थी. लेकिन अब भुगतान के वादे के बाद कंपनी मामले को वापस ले लिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
पॉवर सेक्टर की कंपनी GE Power ने सार्वजनिक क्षेत्र की नामी कंपनी BHEL के खिलाफ दिवालिया याचिका को वापस ले लिया है. इस याचिका को GE Power ने इसलिए वापस लिया क्योंकि BHEL ने सितंबर में इस भुगतान को करने का वायदा किया है. NCLT अदालत ने इस पूरे मामले में GE power को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी है. साथ ही ये भी कहा है कि अगर ये भुगतान नहीं होता है तो वो इस याचिका को फिर से लगा सकती है.
क्या है ये पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जीई पावर को 2016 में BHEL ने सुपरक्रिटिकल स्टीम जनरेटर के कंपोनेंट की आपूर्ति और सर्विस के लिए 271 करोड़ रुपये का कांट्रैक्ट दिया था. BHEL ने ये ऑर्डर तमिलनाडु उत्पादन और वितरण निगम से 2x800 मेगावाट कोयला आधारित उप्पूर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 5,600 करोड़ रुपये के इस ऑर्डर को हासिल किया था. जीई पॉवर ने NCLT को सूचित किया है कि BHEL ने जो उसके 36 करोड़ रुपये का बकाया देना था उसमें से 5 करोड़ रुपये का भुगतान तो कर दिया, लेकिन बकाया नहीं दिया. लेकिन एनसीएलटी में मामला जाने के बाद अब बीएचईएल ने वादा किया है कि वो बकाया 25 करोड़ का भुगतान जल्द कर देगा.
विवादों में फंस गई थी ये योजना
तमिलनाडु के उप्पल में स्थित ये परियोजना पर्यावरण संबंधियों मंजूरी को लेकर विवादों में आ गई थी. 2021 में NGT ने इस प्लॉंट की मंजूरी पर रोक लगा दी थी. अदालत ने कहा था कि TANGEDKO ने आयातित कोयले की जगह पर स्वदेशी कोयले के इस्तेमाल की बात कही है तो ऐसे में उसका फिर से मूल्यांकन करने की आवश्यकता है. ये तमिलनाडु का वही पॉवर प्लांट है जिसे लेकर बड़ा विवाद हो गया था.
क्या करती है BHEL?
भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड एक पब्लिक सेक्टर की यूनिट है. ये देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन उपकरण यूनिट है. ये एक पब्लिक सेक्टर की यूनिट है जो हजारों युवाओं को रोजगार देने के साथ कई कंपनियों में अपनी सेवाएं मुहैया कराती है. ये एक नवरत्न कंपनी है.
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