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हल्दीराम में हिस्सेदारी से पीछे हटे ये दो विदेशी निवेशक, जानिए क्या है इसके पीछे का कारण?

सिंगापुर की टेमासेक और अमेरिकी फर्म ब्लैकस्टोन जैसे प्रमुख निवेशक कंपनी के उच्च मूल्यांकन और बाजार की मौजूदा स्थिति के चलते हल्दीराम में हिस्सेदारी बिक्री की योजना फिलहाल स्थगित हो गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत की प्रमुख खाद्य कंपनी हल्दीराम (Halidiram) में हिस्सेदारी बिक्री की योजना शेयर बाजार में भारी गिरावट के कारण ठप पड़ गई है. खरीदारों को कंपनी का मूल्यांकन अधिक लग रहा है, जिसके चलते वे सौदे की शर्तों पर फिर से बातचीत करना चाहते हैं. प्रमुख निवेश बैंकरों के मुताबिक, अमेरिकी निजी इक्विटी फर्म ब्लैकस्टोन ने उच्च मूल्यांकन का हवाला देते हुए इस सौदे से हाथ खींच लिया है.

मूल्यांकन में गिरावट और उपभोग मांग में नरमी

सिंगापुर की टेमासेक 10 से 11 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर हल्दीराम में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की बातचीत कर रही थी. हालांकि, पिछले छह महीनों के दौरान बीएसई सेंसेक्स में 15 प्रतिशत और एनएसई निफ्टी में 15.6 प्रतिशत की गिरावट के कारण उसकी चिंता बढ़ गई है. इसके अलावा, उपभोग की मांग में भी नरमी आई है, जो संभावित खरीदारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है.

कमोडिटी कीमतों में वृद्धि 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार खाद्य कंपनी हल्दीराम की मुनाफा कमाने की क्षमता में कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के कारण कमी आई है. इसने सौदे के मूल्यांकन पर भी असर डाला है. सूत्रों के अनुसार एक निवेश बैंकर ने कहा है कि अब यह खरीदार का बाजार बन गया है. शेयर बाजार में लगातार गिरावट और रुपये की कमजोरी ने सभी क्षेत्रों में मूल्यांकन को प्रभावित किया है.

कैलेंडर वर्ष 2025 में विलय और अधिग्रहण सौदों में वृद्धि

वहीं, कैलेंडर वर्ष 2025 के पहले दो महीनों में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में कई विलय और अधिग्रहण सौदे हुए हैं. इस वजह से मूल्य के लिहाज से लेनदेन 17.75 प्रतिशत बढ़कर 14.73 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं. दिसंबर 2024 तिमाही के दौरान उपभोक्ता केंद्रित क्षेत्रों जैसे वाहन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल एस्टेट और रिटेल कंपनियों के मार्जिन में गिरावट आई है.

बता दें, हल्दीराम के प्रवर्तक पिछले दो वर्षों में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए कई कंपनियों, including टाटा के साथ बातचीत कर चुके हैं. हालांकि, सौदे की शर्तों पर सहमति नहीं बन पाई. पिछले कुछ महीनों में हल्दीराम के प्रवर्तकों ने पूरी कंपनी के अधिग्रहण के लिए कई प्रस्तावों पर विचार किया, लेकिन उनका लक्ष्य कंपनी पर अपना नियंत्रण बनाए रखना था. इसलिए, उन्होंने केवल अल्पांश हिस्सेदारी की पेशकश की थी. एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2023 में टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स हल्दीराम में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करना चाहती थी, लेकिन उच्च कीमत के कारण सौदा नहीं हो पाया.

हल्दीराम का संरचनात्मक परिवर्तन

हल्दीराम के प्रवर्तक परिवार के दिल्ली, नागपुर और कोलकाता में स्थित तीन उपक्रम अलग-अलग संचालन कर रहे हैं. हालांकि, दिल्ली और नागपुर परिवार ने हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल (एचएफआईपीएल) और हल्दीराम दिल्ली समूह के एफएमसीजी कारोबार को एक नई कंपनी हल्दीराम स्नैक्स फूड्स प्राइवेट लिमिटेड (एचएसएफपीएल) में विलय करने पर सहमति जताई है. इसी कंपनी में हिस्सेदारी बिक्री की योजना है.

हल्दीराम की वित्तीय स्थिति

हल्दीराम (दिल्ली और नागपुर) ने 19,300 करोड़ रुपये के भारतीय स्नैक्स बाजार में 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अग्रणी स्थान बना रखा है. हल्दीराम स्नैक्स ने वित्त वर्ष 2023 में समेकित आय 6,375 करोड़ रुपये दर्ज की, जो पिछले वित्त वर्ष से अधिक थी. इसके अलावा, कंपनी का शुद्ध लाभ 74 प्रतिशत बढ़कर 593 करोड़ रुपये हो गया. 
हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल की समेकित शुद्ध बिक्री वित्त वर्ष 2024 में 10.9 प्रतिशत बढ़कर 4,551 करोड़ रुपये हो गई. इसी तरह, कंपनी का शुद्ध लाभ भी 597 करोड़ रुपये तक बढ़ा. हालांकि, कंपनी की हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया में बाजार के वर्तमान हालात के कारण अनिश्चितता बनी हुई है.
 


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