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इन 8 कार निर्माता कंपनियों ने नहीं किया उत्सर्जन मानदंडों का पालन, लगेगा 7,300 करोड़ का जुर्माना
कोरियाई कार निर्माता कंपनी Hyundai पर सबसे अधिक यानी 2,800 करोड़ रुपये से अधिक जुर्माना है. इन सभी कंपनियों ने उत्सर्जन मानदंडों का अनुपालन किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
हुंडई (Hyundai), किआ (KIA), महिंद्रा (Mahindra) और होंडा (Honda) सहित 8 कार निर्माता कंपनियों पर 7,300 करोड़ रुपये का जुर्माना लग सकता है. दरअसल, वित्तीय वर्ष 2022-23 में इन कार निर्माता कंपनियों ने उत्सर्जन मानदंडों का पालन नहीं किया है. इसके लिए कोरियाई कार निर्माता हुंडई पर सबसे अधिक यानी 2,800 करोड़ रुपये से अधिक जुर्माना लगाया जाएगा. इसके बाद महिंद्रा पर लगभग 1,800 करोड़ रुपये और किआ पर 1,300 करोड़ रुपये से अधिक जुर्माना लगाया जाएगा. तो आइए जानते हैं कंपनियों पर जुर्माने की ये राशि कैसे तय की जाती है?
एक साल की कमाई का 60 प्रतिशत है जुर्माने की रकम
मीडियारिपोर्ट्स के अनुसार हुंडई के लिए जुर्माना वित्त वर्ष 23 में कंपनी द्वारा अर्जित लाभ (4,709 करोड़ रुपये) का लगभग 60 प्रतिशत है. 2021-22 के लिए वार्षिक ईंधन खपत अनुपालन रिपोर्ट उपलब्ध है, जबकि 2022-23 के लिए एक वर्ष से अधिक की देरी हो चुकी है और अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है. 2021-22 में सभी 19 कार निर्माताओं ने उत्सर्जन मानदंडों का अनुपालन किया था. वहीं, केंद्र सरकार ने पाया है कि वर्ष 2022-23 में अनिवार्य बेड़े उत्सर्जन स्तर से अधिक है. आठ ऑटो कंपनियों और बिजली, सड़क परिवहन, पेट्रोलियम और भारी उद्योग मंत्रालयों को भेजे गए प्रश्नों का प्रकाशन होने तक कोई जवाब नहीं मिला. बता दें, हुंडई, किआ और महिंद्रा के बाद इस लिस्ट में रेनॉल्ट (438.3 करोड़ रुपये), स्कोडा (248.3 करोड़ रुपये), निसान (172.3 करोड़ रुपये) और फोर्स मोटर (1.8 करोड़ रुपये) शामिल हैं. अनिवार्य बेड़े उत्सर्जन स्तर से अधिक है.
4.78 लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए फ्यूल खपत
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के तहत एनर्जी इफिशिएंसी ब्यूरो (BEE) ने 2022-23 के लिए साल के दौरान बेची गई सभी यूनिटों की कार कंपनियों को भारत के कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (CAFE) मानदंडों को प्राप्त करने की आवश्यकता बताई है. इसका मतलब है कि प्रति 100 किलोमीटर पर फ्यूल की खपत 4.78 लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन प्रति किलोमीटर 113 ग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए (क्योंकि, इसका ईंधन की खपत की मात्रा से सीधा संबंध है). वित्तीय वर्ष 2022-23 की शुरुआत में CAFE मानदंडों को कड़ा कर दिया गया था. जुर्माने की मात्रा केंद्र और ऑटो इंडस्ट्रीज के बीच विवाद का विषय बन गई है.
कार निर्माता कंपनियों ने कही ये बात
कार बनाने वाली कंपनियों का तर्क है कि नए और सख्त दंड मानदंड 1 जनवरी, 2023 से ही लागू होंगे और इसलिए पूरे वित्तीय वर्ष में बेची गई कारों के आधार पर जुर्माने की गणना करना उचित नहीं होगा. 1 जनवरी, 2023 से पहले, यानी 2017-18 से बीईई के अनुसार वाहनों को 100 किलोमीटर प्रति घंटे 5.5 लीटर से कम ईंधन की खपत करनी है और औसत कार्बन उत्सर्जन को 130 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर तक सीमित करना है.
ऐसे तय होता है जुर्माना
वर्तमान में वाहन निर्माताओं को 0.2 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से कम ईंधन खपत पर प्रति वाहन 25,000 रुपये का जुर्माना देना पड़ता है और इस सीमा से अधिक ईंधन खपत पर प्रति वाहन 50,000 रुपये का जुर्माना देना पड़ता है. साथ ही 10 लाख रुपये का मूल जुर्माना भी देना पड़ता है. 2022-23 में 18 ऑटोमोबाइल निर्माताओं के मॉडल और वेरिएंट का वास्तविक ड्राइविंग स्थितियों में मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण किया गया. जब कारों के एक सेट के परिणाम निर्दिष्ट CAFE मानकों के अनुरूप नहीं थे, तो पूरे वर्ष में बेची गई कारों की कुल संख्या के लिए पेनाल्टी की गणना की गई.
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