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इन्श्योरेंस सेक्‍टर में होगा बड़ा बदलाव, जानिए क्या है वित्त मंत्रालय की तैयारी?

वित्त मंत्रालय इन्श्योरेंस सेक्टर के नियमों में संशोधन करने जा रहा है. मंत्रालय ने FDI की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सरकार इन्श्योरेंस सेक्टर में बड़े बदलाव लाने की तैयारी कर रही है. दरअसल, वित्त मंत्रालय ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. इससे इन्श्योरेंस कंरपनियों को एक ही लाइसेंस में कई काम करने की सुविधा मिलेगी. ये बदलाव बीमा अधिनियम, 1938 में संशोधन करके किए जाएंगे. इस बारे में लोगों से 10 दिसंबर तक राय मांगी गई है. तो आइए जानते रहैं सरकार की पूरी प्लानिंग क्या है? 

100 प्रतिशत एफडीआई बढ़ाने का प्रस्ताव 
वित्त मंत्रालय ने इन्श्योरेंस सेक्टर में एफडीआई सीमा को बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने जोकि अभी 75 प्रतिशत है, चुकता पूंजी को घटाने और समग्र लाइसेंस का प्रावधान करने जैसे संशोधनों का प्रस्ताव रखा है. ये संशोधन बीमा अधिनियम, 1938 के विभिन्न प्रावधानों में किए जाने के लिए प्रस्तावित किए गए हैं. वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने इन पर 10 दिसंबर तक जनता से राय मांगी है. 

एफडीआई बढ़ने से होंगे ये फायदे
भारतीय बीमा कंपनियों में एफडीआई 100 प्रतिशत बढ़ने से विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने में आसानी होगी. चुकता पूंजी कम होने से नई कंपनियों को कारोबार शुरू करने में मदद मिलेगी. समग्र लाइसेंस से कंपनियों को अलग-अलग लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं करना पड़ेगा. यह प्रस्ताव बीमा क्षेत्र के विकास में मददगार साबित हो सकता है. प्रस्तावित संशोधन मुख्य रूप से बीमाधारकों के हितों को बढ़ावा देने, उनकी वित्तीय सुरक्षा बढ़ाने, बीमा बाजार में अधिक कंपनियों के प्रवेश को सुविधाजनक बनाने, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं. ऐसे बदलावों से बीमा उद्योग की दक्षता बढ़ाने, कारोबारी सुगमता को बढ़ाने और बीमा पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा. बता दें, देश में अभी 25 जीवन बीमा कंपनियां और 34 गैर-जीवन या सामान्य बीमा कंपनियां हैं.

दूसरी बार मांगा है जनता से परामर्श
डीएफएस ने बीमा अधिनियम 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम 1956 और बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 में प्रस्तावित संशोधनों पर दूसरी बार सार्वजनिक परामर्श मांगा है. वित्त मंत्रालय ने इससे पहले दिसंबर, 2022 में भी बीमा अधिनियम, 1938 और बीमा विनियामक विकास अधिनियम, 1999 में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणियां आमंत्रित की थीं. बीमा अधिनियम, 1938 देश में बीमा के लिए विधायी ढांचा प्रदान करने वाला प्रमुख कानून है. नागरिकों के लिए बीमा की पहुंच और सामर्थ्य सुनिश्चित करने, बीमा उद्योग के विस्तार और विकास को बढ़ावा देने और व्‍यावसायिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए बीमा कानूनों के कुछ प्रावधानों में संशोधन करने का प्रस्ताव है. इस संबंध में भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IREDA) के साथ उद्योग के परामर्श से इस क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले विधायी ढांचे की व्यापक समीक्षा की गई है.

 


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