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फूड सर्विस इंडस्ट्री में आएगा बड़ा उछाल, 2030 तक 150 अरब डॉलर का होगा बाजार: रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक संगठित फूड सर्विसेज सेक्टर की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) 17-18% रहने का अनुमान है. वहीं असंगठित बाजार की ग्रोथ केवल 3-4% रहने की उम्मीद है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत का फूड सर्विसेज बाजार अगले पांच वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने की ओर है. रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स (Redseer Strategy Consultants) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती सुविधा-आधारित खपत, संगठित रेस्तरां चेन की लोकप्रियता और ऑनलाइन फूड डिलीवरी के विस्तार के दम पर यह बाजार 2025 के करीब 90 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
संगठित फूड सर्विसेज सेक्टर की होगी तेज बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक संगठित (Organised) फूड सर्विसेज सेक्टर की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) 17-18% रहने का अनुमान है. वहीं असंगठित (Unorganised) बाजार की ग्रोथ केवल 3-4% रहने की उम्मीद है.
संगठित कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 2025 में 45-50% से बढ़कर 2030 तक 60-70% हो सकती है. यह दर्शाता है कि उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से ब्रांडेड रेस्तरां और फूड सर्विस चेन की ओर बढ़ रहा है.
ऑनलाइन फूड डिलीवरी बनेगी सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी उद्योग की सबसे बड़ी ग्रोथ इंजन बनी रहेगी. वित्त वर्ष 2026 में कुल फूड सर्विसेज बाजार में ऑनलाइन डिलीवरी की हिस्सेदारी 11% रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर 18% हो सकती है. इस वृद्धि के पीछे डिजिटल अपनाने की बढ़ती दर और टियर-2 तथा छोटे शहरों से बढ़ती मांग प्रमुख वजह है.
छोटे शहरों में तेजी से बढ़ा ऑनलाइन ऑर्डर
रेडसीर के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 के बाद से टियर-2 और छोटे शहरों में फूड डिलीवरी ट्रांजैक्शन लगभग तीन गुना बढ़ चुके हैं. वहीं हर महीने ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने वाले सक्रिय उपभोक्ताओं की संख्या करीब 1 करोड़ से बढ़कर लगभग 3 करोड़ हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, नई पीढ़ी के फूड ब्रांड अपनी करीब 90% आय ऑनलाइन माध्यम से हासिल कर रहे हैं, जबकि पारंपरिक रेस्तरां चेन के लिए यह आंकड़ा लगभग 50% है. इससे डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस मॉडल की बढ़ती अहमियत साफ होती है.
क्लाउड किचन और प्रीमियम ब्रांड्स से मिलेगी रफ्तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज वृद्धि के बावजूद भारत का संगठित फूड सर्विसेज उद्योग अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है. देश में 1,000 से अधिक संगठित फूड सर्विस कंपनियां हैं, लेकिन इनमें से केवल लगभग 2% कंपनियों का सालाना राजस्व 500 करोड़ रुपये से अधिक है. इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में विस्तार की बड़ी संभावनाएं अभी भी मौजूद हैं.
रेडसीर के अनुसार, क्लाउड किचन मॉडल, सीमित लेकिन फोकस्ड मेन्यू और प्रीमियम ब्रांड पोजिशनिंग कंपनियों की लाभप्रदता बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
स्नैक्स, डेजर्ट और बेवरेज सेगमेंट में सबसे ज्यादा अवसर
रिपोर्ट में स्नैक्स, डेजर्ट और पेय पदार्थ (बेवरेज) को सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट बताया गया है. खासतौर पर प्रीमियम चाय और कॉफी चेन के व्यापक बाजार से बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना जताई गई है. इसकी वजह बेहतर मार्जिन और स्टोर स्तर पर मजबूत ग्रोथ मानी गई है.
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