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AI और इनोवेशन से बदलेगी भारत की तस्वीर, 2030 तक खुलेंगे 5,000 GCC: वित्त मंत्री
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत अब केवल कम लागत वाले सेवा केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिसर्च और बौद्धिक संपदा (IP) के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा विजन पेश किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2030 तक देश में 5,000 GCC स्थापित करने का लक्ष्य रखा और इसे पूरी तरह हासिल किया जा सकने वाला बताया. उन्होंने कहा कि भारत अब केवल कम लागत वाले सेवा केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिसर्च और बौद्धिक संपदा (IP) के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है.
वैल्यू चेन में आगे बढ़ने का दिया संदेश
'CII GCC Business Summit 2026' को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि GCCs को अब केवल बैक-ऑफिस सेवाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्हें वैल्यू चेन में ऊपर बढ़ते हुए बौद्धिक संपदा (IP) विकसित करने, रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) में नेतृत्व करने, AI आधारित समाधान तैयार करने, उत्पाद डिजाइन का स्वामित्व लेने और वैश्विक नवाचार को गति देने पर ध्यान देना होगा.
2030 तक 5,000 GCC का लक्ष्य
निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2030 तक भारत में 5,000 GCC स्थापित करने का लक्ष्य यथार्थवादी और पूरी तरह हासिल किया जा सकने वाला है. उन्होंने बताया कि Fortune Global 2000 की करीब दो-तिहाई कंपनियों ने अभी तक भारत में अपना GCC स्थापित नहीं किया है, जिससे भविष्य में निवेश और विस्तार की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं.
भारत में 2,100 से ज्यादा GCC, 23 लाख लोगों को रोजगार
वित्त मंत्री के मुताबिक, वर्तमान में भारत में 2,100 से अधिक GCC संचालित हो रहे हैं, जहां करीब 23 लाख पेशेवर कार्यरत हैं. इन केंद्रों से हर साल लगभग 100 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त होता है. उन्होंने बताया कि Forbes Global 2000 की 500 से अधिक कंपनियां भारत में GCC स्थापित कर चुकी हैं और दुनिया के आधे से अधिक GCC अब भारत में मौजूद हैं.
अब हर दिन खुल रहा नया GCC
सीतारमण ने कहा कि भारत में GCC विस्तार की रफ्तार लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2024 में जहां हर सप्ताह एक नया GCC स्थापित हो रहा था, वहीं अब औसतन हर दिन एक नया केंद्र शुरू हो रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि नए स्थापित होने वाले आधे से अधिक GCC 'AI-First' मॉडल पर आधारित हैं.
AI से बढ़ेगा अवसर, लेकिन चुनौतियां भी रहेंगी
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उन GCC के लिए चुनौती बन सकता है, जो कम लागत वाले और बार-बार दोहराए जाने वाले कार्यों पर निर्भर हैं. उन्होंने कहा कि भारत को AI को केवल तकनीक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक अवसर के रूप में अपनाना होगा ताकि वह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी बढ़त बनाए रख सके.
टियर-2 शहर बनेंगे अगला ग्रोथ इंजन
वित्त मंत्री ने कहा कि GCC का अगला विस्तार केवल बेंगलुरु, हैदराबाद और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा. वाराणसी, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम, तिरुचिरापल्ली और मैसूरु जैसे उभरते शहर भी भविष्य के इनोवेशन हब बन सकते हैं. उन्होंने बताया कि कम से कम 10 राज्यों ने GCC नीति लागू की है या उस पर काम कर रहे हैं.
'लो-कॉस्ट' से 'हाई-कैपेबिलिटी' तक भारत की पहचान
सीतारमण ने कहा कि भारत की पहचान अब केवल कम लागत पर सेवाएं देने वाले देश की नहीं रही. देश तेजी से उच्च क्षमता, नवाचार, AI, पेटेंट, एल्गोरिद्म, प्लेटफॉर्म और वैश्विक उत्पाद विकास के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है. आने वाले दशक में भारत की सफलता GCC की संख्या से नहीं, बल्कि यहां से विकसित होने वाले वैश्विक विचारों और तकनीकों से तय होगी.
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