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सरकार ने दी Dixon-Vivo डील को हरी झंडी, भारत में मिलकर बनाएंगे स्मार्टफोन

नई कंपनी में Dixon Technologies की 51% हिस्सेदारी होगी, जबकि Vivo Mobile India के पास 49% हिस्सेदारी रहेगी. बहुमत हिस्सेदारी होने के कारण नई इकाई का नियंत्रण Dixon के पास रहेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Dixon Technologies और चीन की स्मार्टफोन कंपनी Vivo की भारतीय इकाई Vivo Mobile India के संयुक्त उद्यम (JV) को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है. इस मंजूरी के साथ दोनों कंपनियां भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार देंगी. JV में Dixon की 51% और Vivo Mobile India की 49% हिस्सेदारी होगी. इस खबर के बाद निवेशकों का उत्साह भी बढ़ा और Dixon Technologies के शेयर में तेजी भी देखने को मिली है.  

दिसंबर 2024 में हुआ था समझौता

Dixon Technologies ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि Vivo Mobile India के साथ प्रस्तावित जॉइंट वेंचर को सरकार की मंजूरी मिल गई है. दोनों कंपनियों ने इस साझेदारी के लिए दिसंबर 2024 में समझौता किया था. अब नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद संयुक्त उद्यम औपचारिक रूप से आगे बढ़ सकेगा.

Dixon के पास रहेगा कंट्रोल

नई कंपनी में Dixon Technologies की 51% हिस्सेदारी होगी, जबकि Vivo Mobile India के पास 49% हिस्सेदारी रहेगी. बहुमत हिस्सेदारी होने के कारण नई इकाई का नियंत्रण Dixon के पास रहेगा. यह जॉइंट वेंचर केवल Vivo के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में अन्य स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड्स के लिए भी मैन्युफैक्चरिंग सेवाएं उपलब्ध करा सकेगा.

सरकार की मंजूरी क्यों थी जरूरी?

Vivo चीन की मूल कंपनी से जुड़ा ब्रांड है. भारत में चीन सहित पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश पर लागू प्रेस नोट-3 के तहत ऐसे निवेश या संयुक्त उद्यम के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी अनिवार्य होती है. इसी प्रावधान के तहत इस JV को भी स्वीकृति दी गई है.

सरकार ने मार्च 2026 में प्रेस नोट-3 के कुछ प्रावधानों में राहत दी थी. नए नियमों के अनुसार कुछ मामलों में 10% तक की गैर-नियंत्रण (Non-controlling) हिस्सेदारी के लिए मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती. हालांकि, नियंत्रण वाले संयुक्त उद्यमों के लिए सरकारी अनुमति अब भी अनिवार्य है.

Dixon को मिलेगा बड़ा कारोबारी फायदा

कंपनी का मानना है कि इस साझेदारी से उसकी स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. साथ ही एंड्रॉयड स्मार्टफोन सेगमेंट में उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी. JV के जरिए कंपनी को नए ऑर्डर मिलने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

 


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