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महाकुंभ में जिस नाविक ने कमाए 30 करोड़ रुपये, अब उसे IT विभाग ने भेज दिया नोटिस!
महाकुंभ के दौरान नाविक पिंटू महरा ने 30 करोड़ रुपये की कमाई की, जो उनके जीवन का एक अप्रत्याशित मोड़ साबित हुआ. वहीं, अब इस कमाई पर उन्हें टैक्स भी देना होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
प्रयागराज के अरैल गांव के नाविक पिंटू महरा ने महाकुंभ के दौरान केवल 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये की कमाई की. यह घटना क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बन गई है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में इस खबर पर चर्चा की, जिसके बाद यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुंभ के दौरान नाविक परिवार ने असाधारण कमाई की, जिसमें हर नाव से रोजाना 50,000-52,000 रुपये की कमाई हुई. पहले एक नाव से मात्र 1,000-2,000 रुपये की आय होती थी, जो महाकुंभ के दौरान बढ़कर कई गुना हो गई. उनकी कमाई और टैक्स नोटिस को लेकर अब सोशल मीडिया पर एक बहस छिड़ गई है, तो आइए जानते हैं इस पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया आ रहा है?
12.8 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस
दरअसल, इस अप्रत्याशित आय के बाद पिंटू महरा के लिए मुश्किलें बढ़ गईं. उन्हें आयकर विभाग से 12.8 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस प्राप्त हुआ. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 4 और 68 के तहत यह टैक्स नोटिस जारी किया गया, जो पिंटू महरा के लिए एक बड़ी वित्तीय चुनौती बन गई. यह घटना अनियोजित और उच्च आय अर्जित करने के बाद टैक्स के मुद्दे पर बहस को जन्म देती है.
अचानक कमाई और टैक्स का सामना
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार पिंटू महरा ने खुलासा किया कि महाकुंभ के दौरान उन्होंने और उनके परिवार ने नावों के बेड़े के संचालन से 30 करोड़ रुपये की कमाई की. फाइनेंशियल प्लानर और सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट एके मंधन ने भी एक्स पर पोस्ट करके बताया कि यह कमाई पिंटू महरा के लिए एक वित्तीय झटका साबित हुई. मंधन के अनुसार, पिंटू महरा ने अपनी पूरी जिंदगी नाव चलाकर और मुश्किल से 500 रुपये प्रतिदिन कमाकर बिताई थी, लेकिन महाकुंभ के दौरान अचानक उनकी किस्मत पलट गई. एके मंधन ने इस स्थिति पर सवाल उठाया कि क्या इस तरह के अनियोजित उच्च आय अर्जित करने वालों के लिए अलग टैक्स ढांचा होना चाहिए. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या उन्हें दूसरों के समान ही टैक्स देना चाहिए. मंधन के अनुसार, ऐसे मामलों में क्या एक साधारण टैक्स नियम लागू करना चाहिए, जिसमें ज्यादा कमाई करने वाले को ज्यादा टैक्स देना होता है, या फिर इस तरह के अप्रत्याशित और एक बार के उच्च आय वाले मामलों में कोई विशेष छूट या ढांचा होना चाहिए?
मोहनदास पई ने एक्स पर लिखी पोस्ट
इन्फोसिस के पूर्व सीएफओ मोहनदास पई ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी. उन्होंने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि नाविक का परिवार किसी भी अन्य व्यवसायी की तरह आयकर का भुगतान करेगा. पई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, 'मुझे उम्मीद है कि वह @IncomeTaxIndia को भुगतान करेंगे क्योंकि अब खुद सीएम ने उनके बारे में बात की है, अच्छा है.'
भारत में असंगठित क्षेत्र का कराधान एक बड़ी चुनौती बन चुका है। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति और छोटे व्यवसाय अक्सर कानूनी ढांचे के बिना कार्य करते हैं, जिसके कारण ऐसे मामलों में टैक्स का पालन और प्रशासन कठिन हो जाता है। पिंटू महरा की कहानी इसी असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए एक उदाहरण बन गई है, जो अचानक अप्रत्याशित रूप से बड़ी कमाई करते हैं और फिर टैक्स से जुड़े सवालों का सामना करते हैं.
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