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दो हफ्तों में तीन गुना बढ़ी NSE निवेशकों की संख्या
NSE के शेयर ट्रांसफर प्रोसेस में बदलाव ने निवेशकों की दिलचस्पी को अचानक बढ़ा दिया है. मार्च में जहां निवेशकों की संख्या लगभग 20,000 थी, वहीं महज दो हफ्तों में यह बढ़कर 60,000 तक पहुंच गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में वैश्विक लीडर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) अपने अप्रतिबंधित (Unlisted) शेयरों को लेकर निवेशकों की अभूतपूर्व रुचि देख रहा है. केवल 15 दिनों में, NSE के निवेशकों की संख्या लगभग 20,000 से बढ़कर 60,000 हो गई, जिसका मुख्य कारण शेयर ट्रांसफर प्रक्रिया में आया बड़ा बदलाव है.
यह उछाल 24 मार्च 2025 को NSE के इंटरनेशनल सिक्योरिटीज आइडेंटिफिकेशन नंबर (ISIN) के अनफ्रीज होने के तुरंत बाद देखने को मिली. इस कदम ने निवेशकों को डिलिवरी इंस्ट्रक्शन स्लिप (DIS) मैकेनिज्म का उपयोग करके शेयर ट्रांसफर करने की अनुमति दी, जिससे पहले की जटिल, कई चरणों वाली और मैनुअल प्रक्रिया अब आसान और सुव्यवस्थित हो गई.
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
NSE के शेयर हमेशा से अनलिस्टेड शेयरों में सबसे अधिक मांग वाले रहे हैं. IPO को लेकर अनिश्चितता के बावजूद, इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण इक्विटी मार्केट में NSE का दबदबा और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में इसकी वैश्विक लीडरशिप है.
अब क्या हो रहा है?
SEBI के 14 अक्टूबर 2024 के सर्कुलर (SEBI/HO/MRD/MRD-PoD-3/P/CIR/2024/139) के अनुसार, NSE के शेयर ट्रांसफर को अब DIS मैकेनिज्म के जरिए संभव बनाया गया है, जो पहले से लिस्टेड शेयरों के ऑफ-मार्केट ट्रेड में उपयोग होता था. इस बदलाव से अब पूरा प्रोसेस ऑटोमैटेड, तेज़ और लागत प्रभावी हो गया है. CDSL (Central Depository Services India Ltd) निवेशकों के PAN डिटेल्स के आधार पर शेयरहोल्डिंग को ट्रैक कर रहा है, जिससे नियामकीय अनुपालन भी सुनिश्चित हो रहा है.
NSE शेयरों की मांग लगातार बनी हुई है
आंकड़े बताते हैं कि NSE के अनलिस्टेड शेयरों की मांग कितनी जबरदस्त है: दिसंबर 2021 तक NSE के निवेशकों की संख्या: 1,941, दिसंबर 2023 तक: 11,274, दिसंबर 2024 तक: 20,500, मार्च 21, 2025 (ISIN अनफ्रीज से पहले): 22,400, अप्रैल 11, 2025 तक: करीब 60,000 हो गई.
यह जबरदस्त बढ़ोतरी दिखाती है कि NSE के शेयर भारत के अनलिस्टेड इक्विटी मार्केट में सबसे ज्यादा डिमांड वाले एसेट्स में से एक हैं. IPO की अनिश्चितता के बावजूद, निवेशकों की उत्सुकता थमने का नाम नहीं ले रही.
बाजार पर प्रभाव
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर ट्रांसफर प्रक्रिया के सरलीकरण से न सिर्फ निवेशकों को फायदा होगा, बल्कि एक्सचेंजों की मालिकाना संरचना में पारदर्शिता भी बढ़ेगी, जो बाजार की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है. अब जब CDSL निवेशकों की होल्डिंग्स को PAN के आधार पर ट्रैक कर सकता है, और विभिन्न डिपॉजिटरी आपस में जानकारी साझा कर रही हैं, तो ब्रोकरों, उनके सहयोगियों और एजेंटों की कुल हिस्सेदारी पर 49% की सीमा को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकेगा. इसके अलावा, नियमनों पर निगरानी की प्रक्रिया को ऑटोमैटेड करने और KYC सत्यापन को डिमैट अकाउंट्स के ज़रिए सरल बनाने से NSE बिना किसी देरी के 'फिट एंड प्रॉपर' शेयरहोल्डर मानदंड बनाए रख सकता है.
IPO की चर्चा से बनी हुई है निवेशकों की दिलचस्पी
हालांकि NSE की IPO को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, फिर भी इसके शेयरों के लिए निवेशकों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है. NSE न सिर्फ भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, बल्कि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के मामले में दुनिया में सबसे आगे है.
एक प्रमुख निवेश फर्म के वरिष्ठ कार्यकारी ने कहा, “NSE के शेयरों की मांग केवल उसके ब्रांड वैल्यू या बाजार में एकाधिकार की वजह से नहीं है, बल्कि इसके संभावित और लाभदायक लिस्टिंग इवेंट की उम्मीद भी एक बड़ा कारण है.” सिर्फ दो हफ्तों में NSE के निवेशकों की संख्या तीन गुना हो जाना दर्शाता है कि भारत के अनलिस्टेड इक्विटी स्पेस में गुणवत्ता वाले एसेट्स की भारी मांग है, खासकर जब नियामकीय नियमों में ढील और प्रक्रिया में सुधार साथ में मिल जाएं. जैसे-जैसे NSE IPO के करीब पहुंचता है और कैपिटल मार्केट में नवाचार करता है, इसके शेयरहोल्डर प्रोफाइल का और विस्तार तय माना जा रहा है.
NSE: भारत की सबसे मूल्यवान अनलिस्टेड कंपनी
वर्ष 2024 में NSE की वैल्यूएशन में 201% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह 4.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई. इस बढ़त के साथ NSE 2024 की बर्गंडी प्राइवेट हुरुन इंडिया 500 सूची में भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान निजी कंपनी बन गई है. इस सूची में पहले स्थान पर रिलायंस इंडस्ट्रीज (17.5 लाख करोड़) रुपये और दूसरे स्थान पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (16.1 लाख करोड़ रुपये) हैं. NSE की यह शानदार वृद्धि अब इसे इन उद्योग दिग्गजों की कतार में ला खड़ा करती है.
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