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हवाई किराये पर सरकार लगा सकती है लगाम, असाधारण परिस्थितियों में रूट के हिसाब से तय होगी सीमा
भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए इन प्रस्तावित नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें जल्द अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
हवाई टिकटों की आसमान छूती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार नए नियम लाने की तैयारी कर रही है. इसके तहत आपात स्थिति या किसी खास रूट पर अचानक मांग बढ़ने की स्थिति में सरकार किराये की अधिकतम सीमा तय कर सकती है. हालांकि, सरकार का इरादा सभी उड़ानों के किराये को नियमित रूप से नियंत्रित करने का नहीं है. नए नियमों के तहत एयरलाइंस को अलग-अलग रूट पर वसूले जाने वाले किराये का ब्योरा नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देना होगा.
हवाई यात्रियों को महंगे टिकटों से राहत देने के लिए केंद्र सरकार असाधारण परिस्थितियों में चुनिंदा हवाई मार्गों पर किराये की सीमा तय करने का अधिकार अपने पास रखने पर विचार कर रही है. प्रस्तावित नियामकीय ढांचे का उद्देश्य आपात स्थिति और अचानक बढ़ती मांग के दौरान एयरलाइंस की ओर से मनमाना किराया वसूलने पर रोक लगाना है.
भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए इन प्रस्तावित नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें जल्द अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है. केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि नियमों को अंतिम रूप दिया जा चुका है. अदालत ने सरकार को 16 नवंबर तक नियम पेश करने का निर्देश दिया है.
हर रूट के किराये पर रखी जाएगी नजर
प्रस्तावित नियमों के तहत एयरलाइंस को अपने किराये की संरचना का ब्योरा समय-समय पर नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को देना होगा. इसमें अलग-अलग हवाई मार्गों पर वसूले जाने वाले किराये की सीमा भी शामिल होगी.
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइंस नियामक के सामने घोषित अधिकतम किराये से ज्यादा वसूली न करें. इसके अलावा, किसी असाधारण परिस्थिति में किसी खास रूट पर मांग अचानक बढ़ने और टिकटों की कीमतों में अनुचित उछाल आने पर सरकार अस्थायी रूप से हस्तक्षेप कर सकेगी.
सरकार का प्रयास यात्रियों को अत्यधिक महंगे टिकटों से बचाने और एयरलाइंस को कारोबारी स्वतंत्रता देने के बीच संतुलन बनाने का है. सरकार सभी उड़ानों के किराये पर नियमित नियंत्रण लगाने के पक्ष में नहीं है. विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पहले से अधिक होने के कारण व्यापक स्तर पर किराया नियंत्रण से बचने की कोशिश की जा रही है.
त्योहारों के दौरान हवाई किराये में बढ़ोतरी से चिंता
त्योहारी सीजन में हवाई टिकटों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस साल 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच कुछ प्रमुख रूट पर औसत एकतरफा हवाई किराये में भारी वृद्धि दर्ज की गई.
दिल्ली-हैदराबाद रूट पर औसत किराया 68 फीसदी, मुंबई-कोलकाता रूट पर 51 फीसदी और दिल्ली-गोवा रूट पर 39 फीसदी बढ़ा.
किराये में इस तरह की बढ़ोतरी से हवाई यात्रा की किफायत को लेकर चिंता बढ़ी है. इसका असर खासतौर पर उन यात्रियों पर पड़ता है, जिन्हें आपात स्थिति में या छुट्टियों के व्यस्त समय में अचानक यात्रा करनी पड़ती है.
ऐसे यात्रियों के पास यात्रा की तारीख बदलने या पहले से टिकट बुक करने का विकल्प सीमित होता है. ऐसे में उन्हें अधिक मांग के समय ऊंची कीमत पर टिकट खरीदना पड़ सकता है.
हवाई किराये पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई
हवाई टिकटों की मनमानी कीमतों और अतिरिक्त शुल्कों पर नियंत्रण की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है. सुनवाई के दौरान अदालत ने एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस की ओर से वसूले जाने वाले किराये में अंतर का मुद्दा उठाया और यात्रियों को राहत देने की जरूरत पर जोर दिया.
याचिका में दलील दी गई है कि डायनेमिक प्राइसिंग व्यवस्था के कारण उन यात्रियों को अधिक परेशानी होती है, जिनके पास यात्रा की तारीख और समय बदलने की सुविधा नहीं होती. मांग अधिक होने पर उन्हें महंगे टिकट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
सरकार का प्रस्तावित नियामकीय ढांचा इसी तरह की परिस्थितियों में हस्तक्षेप का विकल्प उपलब्ध करा सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक असर नियमों में तय शर्तों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा.
एयरलाइंस की लागत और मुनाफे का भी रखना होगा ध्यान
हवाई किराये पर नियंत्रण की व्यवस्था तैयार करते समय सरकार को विमानन क्षेत्र की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखना होगा. एयरलाइंस को एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), विमान लीज, रखरखाव और एयरपोर्ट शुल्क जैसी कई बड़ी लागतों का सामना करना पड़ता है.
इसके अलावा, किसी रूट पर उड़ानों की सीमित उपलब्धता और यात्रियों की अचानक बढ़ती मांग से भी टिकटों की कीमतों में तेजी आ सकती है.
ऐसे में सभी रूट पर एक समान किराया सीमा लागू करने से एयरलाइंस की परिचालन लागत के अनुरूप कीमतें तय करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसलिए प्रस्तावित व्यवस्था में व्यापक किराया नियंत्रण के बजाय असाधारण परिस्थितियों में चुनिंदा रूट पर सीमित अवधि के लिए हस्तक्षेप पर जोर दिया जा रहा है.
इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार असाधारण परिस्थितियों की परिभाषा कैसे तय करती है, एयरलाइंस की ओर से दिए गए किराये के ब्योरे की निगरानी कैसे होती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर किस तरह कार्रवाई की जाती है.
16 नवंबर तक नियम पेश करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 16 नवंबर तक अंतिम नियम पेश करने को कहा है. अदालत में चल रही सुनवाई के कारण सरकार के लिए हवाई किराये में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए औपचारिक नियामकीय ढांचा तैयार करना महत्वपूर्ण हो गया है.
यदि प्रस्तावित नियम अधिसूचित होते हैं, तो घरेलू हवाई टिकटों की कीमतों की निगरानी के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है. अभी तक किराये मुख्य रूप से बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होते रहे हैं.
हालांकि, नियमों की औपचारिक अधिसूचना होने तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि सरकार किन परिस्थितियों में किराये की अधिकतम सीमा तय कर सकेगी और यात्रियों को राहत देने के लिए कौन-से मानदंड अपनाए जाएंगे.
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