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भारत-UAE का व्यापार 100 अरब डॉलर के पार, पश्चिम एशिया संकट पर जयशंकर ने जताई चिंता
मंगलवार को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और UAE के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के बीच क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में UAE के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक के दौरान यह जानकारी दी. दोनों देशों के बीच 2022 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) लागू होने के बाद व्यापारिक संबंधों में तेजी आई है.
बैठक में पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात, खाड़ी क्षेत्र में तनाव, क्षेत्रीय शांति और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई. जयशंकर ने क्षेत्र की स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की जरूरत पर जोर दिया.
यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है. जयशंकर ने व्यापार, ऊर्जा और उर्वरकों की निर्बाध, सुरक्षित और सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने के महत्व को भी रेखांकित किया.
भारत-UAE व्यापार 100 अरब डॉलर के पार
जयशंकर ने कहा कि व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है. दोनों देशों के बीच निवेश भी लगातार बढ़ रहा है.
CEPA एक मई 2022 से लागू हुआ था. इस समझौते का उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाना है. इसके बाद भारत और UAE के बीच वस्तुओं, सेवाओं और बुनियादी ढांचे सहित कई क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग बढ़ा है.
दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद दोनों देश व्यापारिक संबंधों का विस्तार करना चाहते हैं. बढ़ते कारोबारी भरोसे से दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच निवेश को भी समर्थन मिल रहा है.
ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख मुद्दों में शामिल रही. पश्चिम एशिया में तनाव से महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्गों पर असर पड़ने और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों से पूरा करता है. ऐसे में खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है. इन मार्गों पर किसी भी तरह की बाधा से तेल और गैस के अलावा उर्वरकों तथा अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है.
जयशंकर ने क्षेत्र में शांति बहाल करने और कूटनीतिक बातचीत को बढ़ावा देने वाली पहलों के प्रति भारत का समर्थन दोहराया. उन्होंने UAE में रह रहे भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए वहां के नेतृत्व का आभार भी जताया.
दोनों देशों के बीच हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना और व्यापारिक आपूर्ति को सुरक्षित रखना दोनों के साझा हित में है.
रक्षा और तकनीक में भी बढ़ेगा सहयोग
भारत और UAE व्यापार तथा ऊर्जा के अलावा रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं. हाल के वर्षों में इन क्षेत्रों का रणनीतिक महत्व बढ़ा है. जयशंकर के अनुसार, दोनों देशों के बीच रक्षा और तकनीक संबंधी सहयोग अब रणनीतिक आयाम ले रहा है. इसके साथ आर्थिक संबंधों और लोगों के बीच संपर्क को भी मजबूत किया जा रहा है. सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने भी दोनों देशों की साझेदारी को व्यापक बनाने में भूमिका निभाई है.
UAE में बड़ी संख्या में भारतीय रहते और काम करते हैं. यह समुदाय रोजगार, धन प्रेषण, कारोबारी नेटवर्क और पारिवारिक संबंधों के जरिए दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बना हुआ है. शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की यात्रा से दोनों देशों को अपनी रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करने और क्षेत्रीय चुनौतियों पर आपसी तालमेल बढ़ाने का अवसर मिला है. पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता के बीच भारत और UAE के संबंधों का महत्व व्यापार, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से लगातार बढ़ रहा है.
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