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NH पर हादसों में मौत हुई तो ठेकेदारों पर लगेगा ₹50 लाख तक जुर्माना, सरकार ने कड़े किए नियम
राष्ट्रीय राजमार्गों पर बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों के लिए अब निर्माण ठेकेदारों की जवाबदेही तय होगी. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नए नियमों के तहत दूसरी दुर्घटना में प्रत्येक मृतक के लिए ₹25 लाख और तीसरी दुर्घटना में ₹50 लाख तक का जुर्माना देना होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार ने ठेकेदारों पर शिकंजा कस दिया है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC) परियोजनाओं के लिए नए मॉडल अनुबंध समझौते में सख्त प्रावधान किए हैं. इसके तहत सड़क की खामियों के कारण बार-बार दुर्घटनाएं होने पर ठेकेदारों को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है. गंभीर मामलों में अनुबंध समाप्त करने और ठेकेदार के खर्च पर सुधार कार्य कराने का भी प्रावधान है.
दूसरी दुर्घटना में ₹25 लाख, तीसरी पर ₹50 लाख का जुर्माना
नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी स्थान पर पहली दुर्घटना के एक वर्ष के भीतर या पिछली दुर्घटना के बाद सुधारात्मक कार्रवाई पूरी होने की तारीख से एक वर्ष के भीतर, उसी स्थान के 500 मीटर के दायरे में सड़क की खामियों के कारण दूसरी दुर्घटना होती है, तो ठेकेदार पर प्रत्येक मृतक के लिए ₹25 लाख और गंभीर रूप से घायल प्रत्येक व्यक्ति के लिए ₹10 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा.
वहीं, अगले एक वर्ष के भीतर उन्हीं खामियों के कारण तीसरी दुर्घटना होने पर जुर्माने की राशि बढ़ जाएगी. इस स्थिति में ठेकेदार को प्रत्येक मृतक के लिए ₹50 लाख और गंभीर रूप से घायल प्रत्येक व्यक्ति के लिए ₹25 लाख देने होंगे.
पहली दुर्घटना के बाद खामियां दूर करने के लिए 15 दिन
नए प्रावधानों के तहत पहली दुर्घटना के बाद ठेकेदार को सड़क की खामियां दूर करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा. यदि वह निर्धारित समय में सुधारात्मक कार्रवाई नहीं करता है, तो सरकार उसके खर्च पर सड़क का रखरखाव और जरूरी सुधार कार्य करा सकती है. इसके अलावा, परिस्थितियों के अनुसार ठेकेदार का अनुबंध भी समाप्त किया जा सकता है.
यह व्यवस्था ईपीसी परियोजनाओं के लिए जारी नए मॉडल अनुबंध समझौते का हिस्सा है. इस व्यवस्था में ठेकेदार राजमार्ग का निर्माण करता है और काम के विभिन्न चरण पूरे होने के आधार पर उसे भुगतान किया जाता है. हालांकि, दोष दायित्व अवधि (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड) समाप्त होने के बाद ठेकेदार की जिम्मेदारी सीमित हो जाती है.
सड़क दुर्घटनाओं में 2024 में 1.77 लाख से अधिक मौतें
मंत्रालय के मुताबिक, भारत में 2024 के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में 1,77,175 लोगों की मौत हुई. यह दुनिया में सबसे अधिक आंकड़ों में से एक है. सड़क सुरक्षा के लिए कई उपाय किए जाने के बावजूद दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है.
एक अधिकारी के अनुसार, ईपीसी परियोजनाओं के लिए इस तरह का प्रावधान पहली बार किया गया है. इसका उद्देश्य सड़क निर्माण में खामियों के लिए जिम्मेदारी तय करना और दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है.
उप-ठेके देने की सीमा 49% से घटाकर 30%
राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर मिल रही शिकायतों के बीच सरकार ने उप-ठेके देने के नियम भी सख्त किए हैं. अब ईपीसी परियोजनाओं में उप-ठेके की सीमा अनुबंध मूल्य के 49 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी कर दी गई है.
आमतौर पर मुख्य ठेकेदार परियोजना के कुछ हिस्सों का काम उप-ठेकेदारों को सौंप देते हैं. सरकार का नया कदम निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी स्पष्ट करने और मुख्य ठेकेदारों की जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है.
पिछले वर्ष अगस्त में संसद की लोक लेखा समिति ने भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में उप-ठेके देने के मुद्दे पर मंत्रालय की आलोचना की थी. समिति ने कहा था कि मंत्रालय की अपनी प्रस्तुतियों के अनुसार, सड़क बुनियादी ढांचे का बड़ा हिस्सा उप-ठेकेदारों द्वारा तैयार किया जाता है, जबकि मुख्य अनुबंध व्यवस्था के तहत उनकी जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हो सकती है.
ठेकेदारों के चयन और रेटिंग के नियम भी सख्त
नए नियमों में उप-ठेकेदारों के चयन के लिए मंजूरी संबंधी मानदंड भी कड़े किए गए हैं. इसके अलावा, सरकार ने अनुबंध मिलने से पहले लागू होने वाली कई शर्तों को ठेकेदार की रेटिंग से जोड़ दिया है.
इन बदलावों के जरिए सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और रखरखाव में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ दुर्घटनाओं के लिए ठेकेदारों की जवाबदेही बढ़ाना चाहती है.
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