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2027 में जापान-ब्रिटेन को पछाड़ेगा भारत, लेकिन 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में होगी देरी: IMF
IMF ने 2028 में भारत की अर्थव्यवस्था के 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान घटाकर 2029 कर दिया है. रुपये की कमजोरी से डॉलर में जीडीपी का आकार घटने का अनुमान है, जबकि मजबूत घरेलू मांग के कारण वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 फीसदी किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी देश के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य में देरी कर सकती है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अक्टूबर 2026 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के अनुसार, भारत अब 2028 के बजाय 2029 में इस आंकड़े को पार कर सकता है. हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की रैंकिंग में भारत की स्थिति मजबूत होने का अनुमान है. वर्ष 2027 में भारत जापान और ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
आईएमएफ ने भारत की घरेलू आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मक अनुमान जताया है. मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों के चलते वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर का अनुमान 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया गया है. ऐसे में सवाल है कि जब देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार मजबूत है, तो 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में देरी क्यों हो रही है?
रुपये की कमजोरी ने बिगाड़ा 5 ट्रिलियन डॉलर का गणित
किसी देश की अर्थव्यवस्था का वैश्विक आकार और रैंकिंग तय करने के लिए उसकी जीडीपी को डॉलर में भी मापा जाता है. रुपये की विनिमय दर में बदलाव का सीधा असर इस गणना पर पड़ता है. रुपये की कीमत गिरने पर समान घरेलू आर्थिक उत्पादन का डॉलर में मूल्य कम हो जाता है.
आईएमएफ ने अप्रैल 2026 में अनुमान लगाया था कि भारत की अर्थव्यवस्था 2028 में 5.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी. अक्टूबर के नए अनुमान में इसे घटाकर 4.996 ट्रिलियन डॉलर कर दिया गया है. यानी भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार करने के लिए अब 2029 तक इंतजार करना पड़ सकता है.
आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2026 में 4.06 ट्रिलियन डॉलर और 2027 में 4.52 ट्रिलियन डॉलर रहेगा. वर्ष 2028 में इसके 4.996 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इसके बाद 2029 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार बढ़कर 5.54 ट्रिलियन डॉलर हो सकता है.
रुपये में बढ़ेगी जीडीपी, फिर भी डॉलर में घटा अनुमान
आईएमएफ के ताजा अनुमानों में रुपये के हिसाब से भारत की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ा है. वर्ष 2028 में देश की नाममात्र जीडीपी 477.1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि अप्रैल में यह अनुमान 471.9 लाख करोड़ रुपये था. यानी रुपये के हिसाब से अनुमान में करीब 1.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
इसके बावजूद डॉलर में जीडीपी का अनुमान घट गया है. इसकी प्रमुख वजह रुपये की विनिमय दर में संभावित गिरावट है. आईएमएफ ने 2027 के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये की अनुमानित विनिमय दर 93 रुपये से बढ़ाकर 95 रुपये प्रति डॉलर कर दी है. वहीं, 2028 के लिए औसत विनिमय दर का अनुमान 93.3 रुपये से बढ़ाकर 95.5 रुपये प्रति डॉलर किया गया है.
रुपये की कीमत में गिरावट का असर इस बात से समझा जा सकता है कि समान राशि को डॉलर में बदलने पर पहले की तुलना में कम डॉलर मिलते हैं. इसी वजह से घरेलू अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ने के बावजूद डॉलर में उसका मूल्य अपेक्षाकृत कम रह सकता है.
इस साल रुपये में 5 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को रुपया 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. रुपये में गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को भी कदम उठाने पड़े हैं.
2027 में जापान और ब्रिटेन से आगे निकल सकता है भारत
5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में देरी के बावजूद वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में भारत की स्थिति मजबूत होने का अनुमान है. आईएमएफ के अनुमानों के मुताबिक, 2027 में भारत की जीडीपी 4.52 ट्रिलियन डॉलर रह सकती है. इसके साथ भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
तुलना करें तो 2027 में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का आकार 4.49 ट्रिलियन डॉलर और जापान का 4.47 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. हालांकि, इन तीनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच अंतर कम है. ऐसे में विनिमय दरों में बदलाव से उनकी वास्तविक रैंकिंग प्रभावित हो सकती है.
आईएमएफ के अनुमान के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 2030 में 6.13 ट्रिलियन डॉलर और 2031 में 6.74 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. इस अनुमान के आधार पर भारत 2031 में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. फिलहाल भारत से आगे अमेरिका, चीन और जर्मनी हैं.
घरेलू मांग से मजबूत रहेगी आर्थिक वृद्धि
डॉलर में जीडीपी के अनुमान में कमी के बीच भारत के लिए राहत की बात यह है कि आईएमएफ ने आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाया है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी किया गया है. इसके अलावा, 2027 में रुपये के हिसाब से नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर 10.8 फीसदी के पुराने अनुमान से बढ़कर 11.7 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है.
ये अनुमान बताते हैं कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था में विकास की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. हालांकि, डॉलर में अर्थव्यवस्था का आकार केवल घरेलू उत्पादन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि रुपये और डॉलर के बीच विनिमय दर भी इसमें अहम भूमिका निभाती है. इसलिए भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का समय आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ रुपये की चाल पर भी निर्भर करेगा.
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