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बैंकों के NPA को लेकर वित्‍त मंत्रालय ने दिखाया सख्त रवैया, जानिए राज्‍यों से क्‍या कहा? 

दरअसल वित्‍त मंत्रालय बट्टे खाते में डाले गए खातों से कम वसूली दर को लेकर चिंतित है. इसे लेकर उसने कहा है कि राज्य के स्वामित्व वाले उधारदाताओं से इसे बढ़ाकर लगभग 40 प्रतिशत करने को कहा है.

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

एक ओर जहां सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों में एनपीए में सुधार की खबर आ रही है वहीं दूसरी ओर राज्‍यों के स्‍वातित्‍व वाले उधारदाताओं की रिकवरी रेट को लेकर वित्‍त मंत्रालय ने चिंता जाहिर की है. वित्‍त मंत्रालय ने राज्‍यों के स्‍वामित्‍व वाले उधारदाताओं से रिकवरी रेट में सुधार करने को कहा है. वित्‍त मंत्रालय ने ये भी कहा कि वो इसे 40 प्रतिशत तक लेकर आए. 

मौजूदा समय में क्‍या है रिकवरी रेट 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में बट्टे खाते में डाले गए खातों से वसूली दर 15 फीसदी से भी कम है. वित्‍त मंत्रालय के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB) मार्च 2022 को समाप्त हुए वर्ष में पिछले पांच वर्षों में 7.34 लाख करोड़ रुपये के बट्टे खाते में डाले गए ऋण का केवल 14 प्रतिशत ही वसूल कर सके है. जोकि एक बहुत कम प्रतिशत है. इसीलिए वित्‍त मंत्रालय ने कहा कि वो इसे बढ़ाए और रिकवरी को सुधारते हुए उसे 40 प्रतिशत तक लेकर जाए. मौजूदा समय में अब तक 7.34 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को बट्टे खाते में डाला गया है जिसमें से राज्य के स्वामित्व वाले ऋणदाताओं ने 1.03 लाख करोड़ रुपये की वसूली की है. इसलिए वसूली के बाद, मार्च 2022 के अंत में नेट राइट-ऑफ 7.34 लाख करोड़ में से 6.31 लाख करोड़ रुपये रहा है. 

वित्‍त मंत्रालय ने बरती है सख्‍ती 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वित्‍त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि ऐसा लगता है कि बैंकों को बट्टे खाते में डालने के बाद उन एनपीए से वसूली को लेकर आत्मसंतुष्टि हो जाती है. मंत्रालय ने सख्‍त लहजे में कहा है कि वसूली का यह स्तर स्वीकार्य नहीं है. इसके अलावा वित्‍त मंत्रालय ने सुझाव देते हुए कहा है कि बट्टे खाते में डाले गए खातों से जितनी ज्‍यादा वसूली होती है उसका सीधा असर उनके मुनाफे में आता है, और वो बढ़ता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सूत्र बता रहे हैं कि इस मुद्दे पर स्थिति की समीक्षा करने के लिए वित्तीय सेवा विभाग जल्द ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेगा. प्रस्तावित बैठक में ऋण वसूली न्यायाधिकरण और ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण सहित विभिन्न अदालतों में ऐसे खातों के संबंध में लंबित मामलों का जायजा लिया जाएगा. इस संबंध में बैंकों को और अधिक सक्रिय होने का निर्देश दिया जाएगा. 

अब तक कितनों को डाला है बट्टे खाते में 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 तक पिछले छह वर्षों में बैंकों ने 11.17 लाख करोड़ रुपये बैड लोन के रूप में बट्टे खाते में डाले हैं. आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और निजी क्षेत्र के बैंकों ने पिछले छह वित्तीय वर्षों के दौरान क्रमशः 8,16,421 करोड़ रुपये और 3,01,462 करोड़ रुपये की कुल राशि बट्टे खाते में डाली है.
 


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