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केंद्र ने ग्रामीण स्थानीय निकायों को बढ़ावा देने के लिए जारी किए 2,461 करोड़ रुपये के XV-FC ग्रांट्स
इस राशि का आवंटन छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और त्रिपुरा को किया गया है. यह लाभ ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायतों तक पहुंचेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
केंद्र सरकार ने साल के अंत में ग्रामीण विकास को गति देने के लिए आठ राज्यों के ग्रामीण स्थानीय निकायों को 15वें वित्त आयोग (XV-FC) के तहत 2,461 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की है. यह राशि ग्राम स्तर पर सेवाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने और स्थानीय निकायों की क्षमता सशक्त बनाने के लिए दी गई है.
राज्यों में वितरण और बकाया राशि की मंजूरी
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, 31 मार्च 2026 को घोषित इस वितरण में बाँधे गए (tied) और खुली (untied) ग्रांट्स शामिल हैं, साथ ही पहले रोक रखी गई किश्तें भी अब जारी की गई हैं क्योंकि राज्यों ने निर्धारित पात्रता मानदंड पूरे कर लिए थे. इस राशि का आवंटन छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और त्रिपुरा को किया गया है. यह लाभ ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायतों तक पहुंचेगा.
मध्य प्रदेश को सबसे अधिक लाभ
मध्य प्रदेश को कुल 945.16 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें 943.27 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त और 1.89 करोड़ रुपये पहले रोकी गई राशि शामिल है. यह राशि 46 जिला पंचायतों, 300 ब्लॉक पंचायतों और 22,900 से अधिक ग्राम पंचायतों के लिए उपयोगी होगी.
गुजरात को 763.90 करोड़ रुपये, पंजाब को 332.46 करोड़ रुपये और छत्तीसगढ़ को 359.93 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. सिक्किम को 10.15 करोड़ रुपये, ओडिशा को 35.09 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश को 13.86 करोड़ रुपये और त्रिपुरा को 68.51 लाख रुपये का आवंटन किया गया.
ग्रांट्स का ढांचा
ये ग्रांट्स दो-तरफा मॉडल के तहत संरचित हैं. बाँधे गए ग्रांट्स स्वच्छता, खुले में शौच मुक्त (ODF) बनाए रखने, पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण, साथ ही अपशिष्ट और मल अवशेष प्रबंधन के लिए हैं. खुले ग्रांट्स स्थानीय निकायों को संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों में किसी भी कार्य के लिए खर्च करने की लचीलापन देते हैं, जिसमें वेतन और संस्थागत खर्च शामिल नहीं हैं.
वितरण प्रक्रिया और भविष्य की योजना
इस वितरण में पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय की सिफारिशें शामिल होती हैं, जबकि वित्त मंत्रालय अंतिम धन हस्तांतरण करता है. अधिकारियों ने कहा कि इस ताज़ा किश्त से इन राज्यों की पंचायतें आगामी वित्तीय वर्ष में स्वच्छता और जल संबंधित परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से कर पाएंगी.
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