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जुड़ने से पहले ही टूट गया TATA और Vivo का रिश्ता, क्या Apple है इस तलाक की वजह?
टाटा ग्रुप स्मार्टफोन सेक्टर में एक बड़ी डील करने जा रहा था, लेकिन अब खबर है कि डील परवान चढ़ने से पहले ही टूट गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
टाटा समूह (TATA Group) और चीन की दिग्गज स्मार्टफोन कंपनी वीवो (Vivo) का रिश्ता जुड़ने से पहले ही टूट गया है. खबरों की मानें तो टाटा ने खुद यह रिश्ता तोड़ा है, लेकिन इसके पीछे Apple एक बड़ी वजह है. टाटा ग्रुप Vivo में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने के योजना बना रहा था, इसके लिए दोनों पक्षों में बातचीत काफी आगे पहुंच गई थी. मगर अब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि टाटा ने इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.
Apple को थी आपत्ति
रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि टाटा को iPhone बनाने वाली अमेरिकी कंपनी Apple की आपत्ति के बाद ऐसा करना पड़ा है. दरअसल, टाटा भारत में Apple का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर है. Apple और Vivo आपस में प्रतिद्वंद्वी हैं. ऐसे में टाटा के साथ वीवो का रिश्ता एपल को पसंद नहीं आया. शायद इसी को ध्यान में रखते हुए टाटा ने चीनी कंपनी से दूरी बनाने का निर्णय लिया. बताया जा रहा है कि इस डील को लेकर फिर से बातचीत शुरू होने की संभावना न के बराबर है, यानी टाटा और वीवो का रिश्ता किसी भी कीमत पर जुड़ने वाला नहीं है. इस संबंध में तीनों की पक्षों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
भारत पर अच्छी पकड़
वीवो ने पिछले कुछ समय में भारतीय स्मार्टफोन बाजार पर अच्छी पकड़ बना ली है. वित्त वर्ष 2023 में कंपनी की भारतीय यूनिट का रिवेन्यु 30,000 करोड़ रुपए रहा था. इसके बावजूद वह टाटा को बहुमत हिस्सेदारी इसलिए बेचने को तैयार हो गई थी, क्योंकि भारत सरकार चीनी कंपनियों का नियंत्रण भारतीय कंपनियों के हाथ में चाहता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, वीवो पर सरकार का दबाव है कि वो कंपनी का नियंत्रण किसी भारतीय कंपनी को सौंपे. इसी वजह से Vivo टाटा से रिश्ता जोड़ने वाली थी. लेकिन अब उसे कोई दूसरा साथी तलाशना होगा.
सरकार का है पहरा
भारत में चीनी कंपनियों को कड़ी जांच से गुजरना पड़ रहा है. उनकी फंडिंग पर भी सरकारी एजेंसियों की नजर है. इसलिए वो खुद भी भारत के कारोबार में किसी देशी कंपनी को साझेदार बनाने में दिलचस्पी दिखा रही हैं. ताकि उनके लिए फंड जुटाना आसान हो जाए और एजेंसियों के पहरे में भी कमी आई. इसी के मद्देनजर MG मोटर की पैरेंट कंपनी चीन की SAIC मोटर ने भारत में सज्जन जिंदल की अगुआई वाले JSW ग्रुप से हाथ मिलाया है. JSW ग्रुप के पास फिलहाल इस कंपनी में 35% हिस्सेदारी है. प्राइवेट इक्विटी फंड एवरस्टोन कैपिटल के पास 8% हिस्सेदारी है. इसके अलावा करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी विभिन्न डीलर्स-कर्मचारियों के पास है और शेष 49% हिस्सेदारी चीनी कंपनी SAIC के पास है.
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