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TakeMe2Space ने जुटाई ₹5.5 करोड़ की फंडिंग, MOI-1 लॉन्च करने के लिए होगा फंड का इस्तेमाल
कंपनी रेडिएशन शील्डिंग, प्रोपल्शन सिस्टम (उड़ान तकनीक) और सैटेलाइट्स के आपसी संचार जैसी तकनीकों को विकसित करने पर काम कर रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
SpaceTech स्टार्टअप TakeMe2Space ने ₹5.5 करोड़ की फंडिंग जुटाई है. यह फंडिंग Seafund ने लीड की, और इसमें Blume Ventures, Artha Venture Fund, AC Ventures व अन्य बड़े निवेशकों ने भाग लिया. TakeMe2Space इस फंडिंग का इस्तेमाल MOI-1 लॉन्च करने के लिए करेगा, जो भारत की पहली AI-लैब (Artificial Intelligence प्रयोगशाला) होगी जो अंतरिक्ष में स्थापित की जाएगी.
कंपनी ने ISRO के POEM प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर पहले ही दो सफल अंतरिक्ष मिशन पूरे कर लिए हैं. इन मिशनों में एक नया रेडिएशन शील्डिंग कोट (विकिरण से बचाने वाली परत) दिखाया गया था. यह स्टार्टअप 2024 में रोनक कुमार समंत्राय द्वारा शुरू किया गया था. इसका मकसद सैटेलाइट्स से डेटा प्रोसेसिंग की समस्या को अंतरिक्ष में ही हल करना है. कंपनी स्पेस रिसर्च को आसान और किफायती बनाना चाहती है, जिससे ज्यादा लोग इसमें भाग ले सकें.
कंपनी रेडिएशन शील्डिंग, प्रोपल्शन सिस्टम (उड़ान तकनीक) और सैटेलाइट्स के आपसी संचार जैसी तकनीकों को विकसित करने पर काम कर रही है, ताकि भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी और मजबूत हो सके. MOI-1 लॉन्च के बाद, कंपनी अपने 15 से ज्यादा शुरुआती ग्राहकों को अंतरिक्ष में AI-लैब चलाने का बेहतर अनुभव देने पर ध्यान देगी. शॉर्ट टर्म में, कंपनी का लक्ष्य भारत, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में अपने सैटेलाइट सिस्टम्स की डिमांड बढ़ाना होगा.
पिछले 12 महीनों में, TakeMe2Space की टीम 17 से अधिक सदस्यों तक बढ़ गई है. कंपनी की मजबूत इंजीनियरिंग टीम ने 15 से ज्यादा सैटेलाइट सेंसर और सबसिस्टम बनाए हैं.
कंपनी की मुख्य उपलब्धियां:
• AI का अंतरिक्ष में उपयोग: MOI-TD मिशन ने यह दिखाया कि ग्राउंड स्टेशन से बड़े AI मॉडल को सैटेलाइट तक भेजा जा सकता है, वहां बाहरी कोड चलाया जा सकता है और फिर सुरक्षित तरीके से एन्क्रिप्टेड डेटा वापस लाया जा सकता है.
• पूरी सिस्टम टेस्टिंग: मिशन में सभी जरूरी सिस्टम्स को सफलतापूर्वक टेस्ट किया गया, जैसे:
सेंसर: सन सेंसर, होराइजन सेंसर, सोलर सेल, IMUs
एक्चुएटर्स (गति नियंत्रक): मैग्नेटोटॉर्कर, एयरटॉर्कर, रिएक्शन व्हील
कंप्यूटर सिस्टम: Zero Cube AI Accelerator, POEM Adapter Board
• सिस्टम का सफल संचालन: AI पेलोड ने अंतरिक्ष में पृथ्वी के डेटा को प्रोसेस करने के लिए कई रियल-टाइम टेस्ट किए. इससे यह साबित हुआ कि सिस्टम कक्षा में रहते हुए डेटा प्रोसेसिंग कर सकता है.
Seafund के मैनेजिंग पार्टनर ने क्या कहा?
Seafund के मैनेजिंग पार्टनर मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि "हम एक डीप-टेक फोकस्ड फंड हैं और हमें विश्वास है कि स्पेस टेक जैसी नई तकनीकें बड़े पैमाने पर प्रभावी समाधान ला सकती हैं. भारत की स्पेस इंडस्ट्री ने जबरदस्त तकनीकी सफलताएं हासिल की हैं. सरकार की नीतियों और योजनाओं से इस क्षेत्र को और भी बढ़ावा मिलेगा. TakeMe2Space लगातार मेहनत कर रहा है, और इसका आगामी MOI-1 लॉन्च अंतरिक्ष में डेटा सेंटर्स बनाने की दिशा में गेम-चेंजर साबित होगा. यह फंडिंग कंपनी को अगले स्तर तक ले जाने और उसके सैटेलाइट सिस्टम्स को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद करेगी." कंपनी का लक्ष्य है ऑपरेशन्स को बढ़ाना, नए क्षेत्रों में लॉन्च करना, अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को बढ़ाना, R&D को मजबूत करना, और ग्राहक प्राप्ति को बढ़ावा देना.
TakeMe2Space के फाउंडर का बयान
TakeMe2Space के फाउंडर और CEO, रोनक कुमार समंत्राय ने कहा कि "हम स्पेस टेक्नोलॉजी को सभी के लिए सुलभ बनाना चाहते हैं. यह फंडिंग हमारी टीम की मेहनत और हमारे द्वारा किए जा रहे प्रभाव का प्रमाण है. निवेशकों के सहयोग से, हम अपनी ग्रोथ को तेज करने और दुनिया भर में अधिक ग्राहकों के लिए पहली AI लैब उपलब्ध कराने को लेकर उत्साहित हैं."
भविष्य की संभावनाएं
कंपनी को अगले 12 महीनों में अपनी कमाई दोगुनी होने की उम्मीद है. INVEST INDIA के अनुसार, भारत का स्पेस टेक सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, सरकार और नई तकनीकों के सहयोग से इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपार संभावनाएं हैं. इससे TakeMe2Space के लिए लीडर बनने का बड़ा अवसर है.
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