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₹20,000 करोड़ की कमाई पर टैक्स का खतरा, जेन स्ट्रीट को इनकम टैक्स विभाग ने भेजा नोटिस

विभाग का आरोप है कि कंपनी ने टैक्स लाभ लेने के लिए अपना बेस हांगकांग से सिंगापुर शिफ्ट किया, जबकि वास्तविक संचालन अब भी हांगकांग से ही होता रहा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारत के डेरिवेटिव बाजार में बड़ी कमाई करने वाली ग्लोबल ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट पर टैक्स का शिकंजा कसता दिख रहा है. इनकम टैक्स विभाग ने कंपनी को ड्राफ्ट नोटिस भेजकर पूछा है कि उसकी हजारों करोड़ की कमाई पर टैक्स छूट क्यों जारी रखी जाए. इनकम टैक्स विभाग ने 31 मार्च को जेन स्ट्रीट को ड्राफ्ट नोटिस जारी किया है. इसमें कंपनी से पूछा गया है कि पिछले चार से पांच वर्षों में सिंगापुर इकाई के जरिए भारत के डेरिवेटिव मार्केट से हुई लगभग ₹20,000 करोड़ की कमाई पर सिंगापुर टैक्स ट्रीटी के फायदे क्यों दिए जाएं.

सूत्रों के मुताबिक, विभाग इस छूट को खारिज करने पर विचार कर रहा है, जिससे कंपनी पर बड़ा टैक्स बोझ आ सकता है.

₹7,000 करोड़ तक का टैक्स संभव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अगर इनकम टैक्स विभाग सिंगापुर ट्रीटी के लाभ देने से इनकार करता है, तो जेन स्ट्रीट को करीब ₹7,000 करोड़ तक का टैक्स चुकाना पड़ सकता है. विभाग का आरोप है कि कंपनी ने टैक्स लाभ लेने के लिए अपना बेस हांगकांग से सिंगापुर शिफ्ट किया, जबकि वास्तविक संचालन अब भी हांगकांग से ही होता रहा.

‘POEM’ जांच के दायरे में मामला

इस मामले में ‘प्लेस ऑफ इफेक्टिव मैनेजमेंट’ (POEM) अहम मुद्दा बनकर सामने आया है. यह तय करता है कि किसी कंपनी का वास्तविक नियंत्रण कहां से हो रहा है और उस पर टैक्स कहां लगेगा. टैक्स अधिकारियों का मानना है कि जेन स्ट्रीट की सिंगापुर इकाई का नियंत्रण हांगकांग से किया जा रहा था और सिंगापुर का इस्तेमाल केवल टैक्स बचाने के लिए किया गया.

टैक्स छूट के लिए सिंगापुर स्ट्रक्चर?

सूत्रों के अनुसार, विभाग को संदेह है कि सिंगापुर में ऑफिस बनाकर टैक्स ट्रीटी का फायदा उठाया गया. अगर यह तर्क सही साबित होता है, तो इसी तरह की संरचना अपनाने वाली अन्य विदेशी कंपनियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं.

कंपनी ने आरोपों को नकारा

जेन स्ट्रीट ने इन आरोपों को खारिज किया है. कंपनी का कहना है कि कोविड-19 के दौरान हांगकांग में सख्त लॉकडाउन के कारण उसे अस्थायी रूप से अपना बेस सिंगापुर शिफ्ट करना पड़ा था. कंपनी के मुताबिक, कर्मचारियों को काम में दिक्कत हो रही थी, जिसके चलते यह कदम उठाया गया. बाद में हालात सामान्य होने पर कर्मचारी फिर हांगकांग लौट गए. जेन स्ट्रीट पहले ही नियामकीय जांच के दायरे में है. बाजार नियामक सेबी उस पर कथित मार्केट मैनिपुलेशन के लिए ₹4,843 करोड़ का जुर्माना लगा चुका है. इसके अलावा, 2025 में इनकम टैक्स विभाग ने जांच के तहत कुछ मार्केट एंटिटीज पर छापेमारी भी की थी, जिनमें कंपनी से जुड़े संस्थान शामिल थे.

भारत-सिंगापुर टैक्स ट्रीटी का मामला

भारत और सिंगापुर के बीच डबल टैक्स अवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA) लागू है. इसके तहत सिंगापुर स्थित निवेशकों को डेरिवेटिव ट्रेडिंग से होने वाली कमाई पर भारत में टैक्स छूट मिल सकती है. हालांकि, घरेलू निवेशकों के लिए यह आय टैक्स के दायरे में आती है, जिससे इस मामले में टैक्स ट्रीटी का उपयोग एक अहम विवाद का विषय बन गया है.

अब यह मामला टैक्स अधिकारियों की जांच और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा. यदि विभाग की दलीलें सही साबित होती हैं, तो न केवल जेन स्ट्रीट बल्कि अन्य विदेशी निवेशकों के लिए भी भारत में टैक्स नियमों को लेकर नई सख्ती देखने को मिल सकती है.
 


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