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मिडिल ईस्ट तनाव से वैश्विक महंगाई का खतरा, फिर भी भारत रहेगा मजबूत: SBI रिपोर्ट

SBI रिपोर्ट यह संकेत देती है कि यदि मिडिल ईस्ट का तनाव और बढ़ता है, तो दुनिया को महंगाई के दबाव का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता और नीतिगत उपायों के जरिए खुद को काफी हद तक सुरक्षित कर लिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है और इससे महंगाई की नई लहर उठने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस संकट से अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत सुरक्षित रह सकता है. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत की मजबूत नीतियां और ऊर्जा स्रोतों में विविधता इस चुनौती को काफी हद तक संतुलित कर सकती हैं.

वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा
SBI रिसर्च के मुताबिक, अगर मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष सप्लाई चेन, एसेट क्लास और अलग-अलग सेक्टर में फैलता है, तो इसका संयुक्त असर दुनिया भर में महंगाई को बढ़ा सकता है. हालांकि, शुरुआती स्तर पर इसका असर सीमित दिख सकता है, लेकिन लंबी अवधि में व्यापार, सप्लाई चेन और कारोबारी माहौल पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. बढ़ती अनिश्चितता वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकती है.

भारत पर असर रहेगा सीमित
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत पर इस संकट का सीधा असर सीमित रहने की संभावना है. मुख्य रूप से इसका प्रभाव खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस और कच्चे तेल के आयात पर पड़ सकता है. ये दोनों ही कारक भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनका असर अल्पकालिक रहने की उम्मीद है.

रेमिटेंस और तेल पर निर्भरता
भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. वित्त वर्ष 2025 में यह बढ़कर 138 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें करीब 38 प्रतिशत योगदान GCC देशों का रहा. वहीं, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, जिससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देश की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है.

होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत
वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से होकर गुजरता है, जो दुनिया का एक प्रमुख ऊर्जा ट्रांजिट मार्ग है. इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है और कीमतों में तेजी ला सकती है.

40 देशों से तेल खरीदकर जोखिम कम

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति को मजबूत करते हुए तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई है. वर्तमान में भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है. खासतौर पर 2022 के बाद रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे सप्लाई से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिली है.

महंगाई और चालू खाते पर असर
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का चालू खाता घाटा (CAD) लगभग 36 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकता है. वहीं, महंगाई में भी 35 से 40 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी संभव है.

 


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