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महंगाई का लगा एक और डंक, आम आदमी की थाली से गायब हुआ चावल
गेहूं के बाद ज्यादातर भारत में चावल ही मुख्य भोजन होता है. इसकी कीमतों में अभी और वृद्धि होने की संभावना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः बांग्लादेश, ईरान, इराक और सऊदी अरब से अधिक मांग और कई राज्यों में धान के रकबे में कमी के कारण जून की शुरुआत से चावल की सभी किस्मों की कीमतों में 30% तक की वृद्धि हुई है. इससे लोगों को महंगाई का एक और डंक लगने की संभावना है, क्योंकि आम आदमी की प्लेट से चावल भी गायब हो रहा है. गेहूं के बाद ज्यादातर भारत में चावल ही मुख्य भोजन होता है. इसकी कीमतों में अभी और वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि कई राज्यों में इस बार धान की पैदावार काफी कमजोर हुई है.
13.3 फीसदी कम है पैदावार
खरीफ सीजन में इस बार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों ने धान का रकबा काफी कम किया है. पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 29 जुलाई तक देश भर में यह रकबा 13.3 फीसदी कम था. कम बारिश के कारण ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी कम बुवाई हुई है. इससे जहां अनाज उत्पादन में कमी के बारे में चिंता बढ़ गई है, वहीं उच्च निर्यात मांग ने कीमतों को और बढ़ा दिया है.
अकेले इस चावल की कीमतों में मांग कम
चावल की एक किस्म जिसको ज्यादातर घरों में पसंद किया जाता है, सोना मसूरी, उसकी कीमतों में भी 20 फीसदी की वृद्धि हो गई है. चावल की सभी किस्मों की कीमतों में 30 फीसदी की वृद्धि हुई है. चावल की रत्न किस्म जिसकी कीमत ₹26 प्रति किलोग्राम थी, बढ़कर ₹33 प्रति किलोग्राम हो गई है. बासमती चावल की कीमत भी लगभग 30 फीसदी बढ़कर 62 रुपये प्रति किलोग्राम से 80 रुपये हो गई है, क्योंकि ईरान, इराक और सऊद अरब से मांग बहुत मजबूत है.
छह राज्यों में 37 लाख हेक्टेयर कम हुआ रकबा
29 जुलाई की स्थिति के अनुसार, छह उत्तरी और पूर्वी राज्यों में धान की खेती का रकबा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 37 लाख हेक्टेयर कम है. यह घाटा भारत के खरीफ धान के रकबे का दसवां हिस्सा 39.7 मिलियन हेक्टेयर के करीब है. 2.6 टन प्रति हेक्टेयर की औसत उपज पर, कम रकबे ने करीब 10 मिलियन टन उत्पादन को दांव पर लगा दिया है. वित्त वर्ष 2022 में भारत में चावल का उत्पादन 130 मिलियन टन था, और निर्यात 21 मिलियन टन था. देश में मौजूदा खरीफ सीजन में 11.2 करोड़ टन चावल के उत्पादन का लक्ष्य है.
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