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जल्द ही चावल के दामों में हो सकती है कमी, निर्यात पर लग सकती है रोक
.भारत चावल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है पूरी दुनिया को सप्लाई होने वाले चावल में भारत का प्रतिशत 40 प्रतिशत है. 2022 भारत ने 56 मिलियन टन चावल का निर्यात किया था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
एक ओर दुनिया के कई देशों में अल नीनों की फिर से हो रही आहट के बीच खबर आ रही है कि भारत चावल की अधिकांश किस्मों के निर्यात पर बैन लगा सकता है. भारत मौजूदा समय में दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यात करने वाला देश है. वहीं भारत से ये खबर आ रही है कि देश के कई राज्य जो चावल पैदा करते हैं वहां बारिश के असमान वितरण के कारण दामों में इजाफा हो सकता है.
महंगाई दर बढ़ने के बाद सामने आई है ये खबर
दरअसल कल ही देश की मुद्रास्फीति के आंकड़े सामने आए हैं. पहले के मुकाबले महंगाई दर में इजाफा देखने को मिला है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुद्रास्फीति बढ़ने के एक दिन बाद, भारत चावल की अधिकांश किस्मों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है. अगर भारत ऐसा कदम उठाता है इससे पहले से ही अल नीनो तूफान के कारण खाद्य पदार्थों की समस्या का सामना कर रहे विश्व के सामने और बड़ी परेशानी सामने आ सकती है. भारत के चावल निर्यात न करने के कारण दामों में और इजाफा हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार अब सभी गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर विचार कर रही है. रिपोर्ट ये भी कह रही है कि अधिकारी चुनाव से पहले अधिक मुद्रास्फीति के जोखिम से बचना चाहते हैं.
भारत के भीतर कम हो सकती हैं कीमतें
अगर ऐसा हुआ तो सरकार के इस कदम के बाद चावल के दामों में कमी हो सकती है. अगर ये प्रतिबंध लगता है तो ये भारत के लगभग 80 प्रतिशत चावल निर्यात को प्रभावित कर सकता है. इसके कारण घरेलू बाजार में चावल की उपलब्धता बढ़ने के कारण देश में चावल की कीमतें कम हो सकती हैं. दुनिया भर में चावल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 40% से अधिक है, जो 2022 में 56 मिलियन टन थी. लेकिन निर्यात में कमी के कारण यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और अनियमित मौसम के कारण खाद्य कीमतों में वृद्धि हो सकती है.
भारत सबसे सस्ता आपूर्तिकर्ता है
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चावल निर्यातक संघ (आरईए) के अध्यक्ष बी.वी. कृष्ण राव का कहना है कि भारत चावल का सबसे सस्ता आपूर्तिकर्ता था. जैसे ही नए न्यूनतम समर्थन मूल्य के कारण भारतीय कीमतें बढ़ीं, अन्य सप्लाईकर्ताओं ने भी कीमतें बढ़ानी शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि 3 अरब से अधिक लोगों के लिए मुख्य भोजन और लगभग 90% जल-गहन फसल का उत्पादन एशिया में होता है, जहां अल नीनो मौसम पैटर्न आमतौर पर कम वर्षा लाता है. पिछले साल, रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद भारत ने टूटे हुए चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया और सफेद और भूरे चावल के शिपमेंट पर 20% शुल्क लगा दिया, जिससे गेहूं और मकई जैसे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ गईं. देश ने गेहूं और चीनी निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. एशिया में चावल की कीमतें दो साल से अधिक समय में उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं क्योंकि आयातकों ने इस डर से भंडार बढ़ा दिया है कि अल नीनो की शुरुआत से फसल का उत्पादन सही नहीं हो पाएगा.
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