✕

होम / बिजनेस / रिटेल निवेशकों की बिकवाली अब पूरे बाजार में फैल रही है

रिटेल निवेशकों की बिकवाली अब पूरे बाजार में फैल रही है

दो साल तक रिटेल निवेशकों ने अपने ब्रोकरों के पैसे से शेयर खरीदे. अब उसका असर सामने आ रहा है. बिकवाली सट्टेबाजी वाले छोटे हिस्से से निकलकर बाजार के बाकी हिस्सों में भी फैल गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

पलक शाह 

रिटेल निवेशकों की बिकवाली

1.56 लाख करोड़ रुपये का लीवरेज और बिकवाली शुरू

बुधवार सुबह दलाल स्ट्रीट को देखकर लग रहा था कि बाजार ने खुद को संभाल लिया है. प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले और करीब 1% तक चढ़ गए. लेकिन दोपहर होते-होते सेंसेक्स अपने उच्चतम स्तर से 1,300 अंकों से ज्यादा नीचे आ गया और निवेशकों की 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति खत्म हो गई. निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.37% की गिरावट आई. मिडकैप 100 भी 1.58% टूट गया. इससे भी अहम बात यह है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों, दोनों ने बाजार में शुद्ध खरीदारी की, इसके बावजूद बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई.

गुरुवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स में फिर 800 अंकों की गिरावट आई, जबकि निफ्टी करीब 240 अंक नीचे आ गया.

110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुके कच्चे तेल ने संकट की चिंगारी भड़काई. उधार के पैसे ने इस आग को फैलाने का काम किया.

अब दबाव मार्जिन खातों से निकलकर उन शेयरों तक पहुंच रहा है, जिन्हें लोगों ने अपने पैसे से खरीदा था और वर्षों से अपने पास रखा हुआ था. यही बाजार में संक्रमण जैसी स्थिति है. इसका मतलब केवल किसी एक शेयर का गिरना नहीं है, बल्कि बाजार के एक हिस्से में हुए नुकसान के कारण दूसरे हिस्सों में भी बिकवाली शुरू हो जाना है.

1.56 लाख करोड़ रुपये की बुक

19 अक्टूबर को भारत की मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) बुक 1,56,150 करोड़ रुपये पर पहुंच गई. वित्त वर्ष 2022-23 में यह 24,920 करोड़ रुपये थी. यानी करीब तीन साल में इसमें छह गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है.

बाजार के आकार के मुकाबले यह बुक अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है. यह एनएसई के बाजार मूल्य का करीब 0.32% है, जो अब तक का रिकॉर्ड है. आमतौर पर यह अनुपात 0.03% से 0.16% के बीच रहता था.

सबसे चिंताजनक बात इसका समय है. इस उधारी का ज्यादातर हिस्सा उस दौरान आया, जब बाजार में कोई खास तेजी नहीं थी या बाजार गिर रहा था. जनवरी के उच्चतम स्तर से निफ्टी 8 अक्टूबर के निचले स्तर तक करीब 16% गिर गया. विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयरों से 3.08 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. रिटेल निवेशकों ने विदेशी निवेशकों के बेचे हुए शेयर खरीदे और इसके लिए उधार के पैसे का इस्तेमाल किया.

नीतिगत फैसलों ने भी उन्हें इस दिशा में धकेलने में भूमिका निभाई. केंद्रीय बजट 2026-27 में डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया. फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कारोबार से बाहर हुए ट्रेडर्स ने सट्टेबाजी बंद नहीं की. वे कैश मार्केट में चले गए और अपने साथ लीवरेज भी ले आए. यानी उधारी खत्म नहीं हुई, बल्कि बाजार के ऐसे हिस्से में पहुंच गई, जिस पर अपेक्षाकृत कम निगरानी रहती है.

कैसे फैलती है यह आग

जब मार्जिन पर खरीदा गया कोई शेयर गिरता है, तो ब्रोकर ग्राहक से अतिरिक्त पैसे जमा करने के लिए कहता है. अगर ग्राहक ऐसा नहीं कर पाता, तो ब्रोकर उसके शेयर बेच देता है. यह सामान्य प्रक्रिया है.

लेकिन बाजार में संक्रमण जैसी स्थिति तब पैदा होती है, जब ग्राहक नुकसान से बचने के लिए दूसरे शेयर बेचने लगता है. जी बिजनेस के संपादक अनिल सिंघवी ने कहा कि मार्जिन कॉल का सामना कर रहे ट्रेडर्स दूसरे शेयरों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुनाफे वाले निवेश और डिलीवरी वाले शेयर बेच रहे थे. इस तरह लीवरेज पर खरीदे गए किसी स्मॉलकैप शेयर में आई गिरावट एक मजबूत कंपनी के शेयरों में भी बिकवाली का कारण बन जाती है, जिसे निवेशक वास्तव में पसंद करता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उसके पास बेचने के लिए वही शेयर बचे होते हैं.

ब्रोकर भी कर्ज देना बंद करके इस दबाव को बढ़ा रहे हैं. मोरपेन लैबोरेटरीज के शेयर चार कारोबारी सत्रों में करीब 18% गिर गए, क्योंकि कई ब्रोकरों ने इसमें फंडिंग बंद कर दी. इस शेयर को एक्सचेंज की सबसे सख्त निगरानी श्रेणी में भी डाल दिया गया, जहां खरीदारों को पूरी रकम यानी 100% भुगतान पहले करना होता है. 12 से 19 अक्टूबर के बीच मार्जिन फंडिंग वाले दर्जनों अन्य शेयर भी एक्सचेंज की निगरानी के दायरे में आ गए. इनमें से हर शेयर पर लगाई गई पाबंदी अगले लीवरेज वाले खरीदार के लिए रास्ता बंद कर देती है.

एक्सचेंज के आंकड़े बताते हैं कि यह रुझान अब पलट गया है. अक्टूबर के शुरुआती 12 कारोबारी दिनों में 45,840 करोड़ रुपये की मार्जिन पोजीशन बंद की गईं, जबकि 43,270 करोड़ रुपये की नई पोजीशन खोली गईं. इंफोसिस में मार्जिन एक्सपोजर करीब 31%, टीसीएस में 34% और विप्रो में 30% घट गया. ये आंकड़े 19 अक्टूबर तक के हैं, इसलिए बुधवार को हुए नुकसान इनमें शामिल नहीं हैं. जो लोग कह रहे हैं कि स्थिति अभी नियंत्रण में है, वे ऐसे आंकड़ों पर भरोसा कर रहे हैं, जो बाजार की ताजा स्थिति को अभी पूरी तरह नहीं दिखाते.

किसे हुआ फायदा

ब्रोकरों को इससे कमाई हुई और अब भी हो रही है. अनुमान है कि निवेशक एमटीएफ पर हर साल करीब 19,500 करोड़ रुपये ब्याज चुकाते हैं. आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने सितंबर के अंत में 25,553 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड एमटीएफ बुक की जानकारी दी. ग्रो ने भी 4,351 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड एमटीएफ बुक दर्ज की. मार्जिन फंडिंग अब उस उद्योग के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत बन गई है, जहां कभी ब्रोकर शून्य ब्रोकरेज की पेशकश के आधार पर प्रतिस्पर्धा करते थे.

इसे एक सुविधा के तौर पर पेश किया गया था: अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें और अपने पैसे से चार गुना तक निवेश करें. द केन ने इसकी तुलना शेयरों में लागू बाय-नाउ-पे-लेटर कर्ज से की थी. हालांकि, इसमें एक बड़ा अंतर है. किस्तों पर खरीदे गए फोन की कीमत बनी रह सकती है, लेकिन मार्जिन पर खरीदा गया कोई स्मॉलकैप शेयर एक सप्ताह में अपनी कीमत का पांचवां हिस्सा गंवा सकता है.

नियामक ने इस मामले में धीरे कदम उठाए. सेबी ने रिटेल निवेशकों के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस कारोबार पर सख्ती की, लेकिन सट्टेबाजी मार्जिन खातों में चली गई. एमटीएफ पर जून 2026 में जारी सेबी के परामर्श पत्र का मुख्य जोर कोलेटरल के नियमों में एकरूपता लाने और परिचालन संबंधी अड़चनों को कम करने पर था. इसमें एमटीएफ बुक की बढ़ती रफ्तार को धीमा करने की कोशिश नहीं की गई.

अब चुकानी होगी इसकी कीमत

एमटीएफ बुक सितंबर के अंत में करीब 1.59 लाख करोड़ रुपये के अपने उच्चतम स्तर से केवल 1.6% नीचे है. यानी ज्यादातर लीवरेज अब भी बाजार में मौजूद है और अगले खराब कारोबारी दिन का इंतजार कर रहा है.

बाजार पहले भी ऐसी स्थिति देख चुका है. मार्च 2026 में एमटीएफ बुक एक महीने में करीब 8% सिकुड़ गई थी और इसके बाद बाजार में रिकवरी आ गई थी. लेकिन इस बार परिस्थितियां ज्यादा खराब हैं. कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, विदेशी निवेशक अब भी बिकवाली कर रहे हैं और लगभग हर दिन स्मॉलकैप शेयर एक्सचेंज की निगरानी के दायरे में आ रहे हैं.

रिटेल निवेशकों को इसकी दोहरी कीमत चुकानी पड़ रही है. शेयर बढ़े या नहीं, उन्हें हर दिन ब्याज देना पड़ता है. और जब शेयर गिरते हैं, तो उन्हें सबसे खराब कीमत पर मजबूरी में बिकवाली करनी पड़ती है.

भारत में दो साल तक छोटे निवेशकों को यह भरोसा दिलाया गया कि शेयर बाजार उनका है. फिर उन्हें इसमें निवेश करने के लिए पैसे उधार दिए गए. अब बाजार यह पता लगा रहा है कि उस भरोसे का कितना हिस्सा वास्तव में उधार के पैसों पर टिका हुआ था.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री तथा द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के निडर लेखक हैं. उनकी चर्चित खोजपरक रिपोर्टिंग ने भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पक्ष को उजागर किया है.

मुंबई में करीब दो दशकों तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के संबंधों की गहराई से पड़ताल करके अपनी पहचान बनाई है. उनकी रिपोर्टें भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों और प्रकाशनों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुई हैं. उनकी पैनी रिपोर्टिंग ने कई अहम मुद्दों पर विमर्श को आकार दिया है और कॉरपोरेट जगत में हलचल पैदा की है.

19 वर्ष की उम्र में अपराध पत्रकारिता की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई में होने वाले गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक आधुनिक और जटिल रूप ने ले ली है. अब कॉरपोरेट इमारतों के भीतर सफेदपोश अपराध की योजनाएं बनाई जा रही थीं. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' वाली अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए.

शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, पलक का काम उच्च वित्तीय जगत की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को उजागर करता है, जो पर्दे के पीछे से व्यवस्था को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता की एक मजबूत आवाज बनाती है. वे यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वाले लोगों को बेनकाब करने से नहीं हिचकते.)

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

PC ज्वैलर को कर्ज से उबारने की कहानी: बैंकों ने प्रमोटर्स के मुकाबले पांच गुना ज्यादा कीमत चुकाई

जहां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भारी नुकसान उठाते हुए 29.20 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर कर्ज को शेयरों में बदला, वहीं प्रमोटर परिवार ने 5.62 रुपये प्रति शेयर के भाव पर निवेश किया और अब कर्जमुक्त कंपनी में पहले से ज्यादा हिस्सेदारी के साथ बाहर आया.

59 minutes ago

अब FSSAI के रडार पर नेस्ले और जायडस वेलनेस, लैक्टोजेन और कॉम्प्लान के दावों पर मांगा जवाब

FSSAI ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों की जानकारी उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव करने पर भी विचार कर रहा है.

2 hours ago

GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा, लेकिन महंगाई ने बढ़ाई RBI की चिंता; दिसंबर में फिर बढ़ सकती है रेपो रेट

RBI ने बुधवार को 5 से 7 अक्टूबर के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक का कार्यवृत्त जारी किया. इस बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% करने के पक्ष में मतदान किया.

3 hours ago

शेयर बाजार में आज भी गिरावट का खतरा, गिफ्ट निफ्टी 22,700 के नीचे; क्रूड 110 डॉलर पार

बुधवार को सेंसेक्स 143.21 अंक यानी 0.19 फीसदी गिरकर 73,709.69 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 77.60 अंक यानी 0.34 फीसदी टूटकर 22,811.35 पर आ गया.

3 hours ago

दीपिंदर गोयल ने Dark.ai का दिया संकेत, Eternal का टेक्नोलॉजी कारोबार में विस्तार

नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पहल 28 अक्टूबर को लॉन्च हो सकती है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसके प्रोडक्ट और बिजनेस मॉडल को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है.

18 hours ago


बड़ी खबरें

रिटेल निवेशकों की बिकवाली अब पूरे बाजार में फैल रही है

दो साल तक रिटेल निवेशकों ने अपने ब्रोकरों के पैसे से शेयर खरीदे. अब उसका असर सामने आ रहा है. बिकवाली सट्टेबाजी वाले छोटे हिस्से से निकलकर बाजार के बाकी हिस्सों में भी फैल गई है.

1 hour ago

PC ज्वैलर को कर्ज से उबारने की कहानी: बैंकों ने प्रमोटर्स के मुकाबले पांच गुना ज्यादा कीमत चुकाई

जहां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भारी नुकसान उठाते हुए 29.20 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर कर्ज को शेयरों में बदला, वहीं प्रमोटर परिवार ने 5.62 रुपये प्रति शेयर के भाव पर निवेश किया और अब कर्जमुक्त कंपनी में पहले से ज्यादा हिस्सेदारी के साथ बाहर आया.

59 minutes ago

Hitachi Digital ने सुमित प्रियाणी को बनाया चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर, AI पर रहेगा फोकस

प्रियाणी की प्राथमिकताओं में आधुनिक, डेटा आधारित और AI-सक्षम टेक्नोलॉजी ढांचा तैयार करना शामिल है. इसके जरिए कंपनी में नए प्रयोगों को बढ़ावा देने और कारोबार के विस्तार में सहायता मिलने की उम्मीद है.

30 minutes ago

अब FSSAI के रडार पर नेस्ले और जायडस वेलनेस, लैक्टोजेन और कॉम्प्लान के दावों पर मांगा जवाब

FSSAI ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों की जानकारी उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव करने पर भी विचार कर रहा है.

2 hours ago

राजस्थान की 3 लाख ग्रामीण महिलाएं डिजिटल पेमेंट से जुड़ेंगी, BHIM ऐप के इस्तेमाल को मिलेगा बढ़ावा

यह पहल 'यूपीआई फॉर हर 2.0' कार्यक्रम का हिस्सा है. NPCI और वुमेन्स वर्ल्ड बैंकिंग ने 'यूपीआई फॉर हर' कार्यक्रम के जरिए महिलाओं के बीच डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया है.

42 minutes ago