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GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा, लेकिन महंगाई ने बढ़ाई RBI की चिंता; दिसंबर में फिर बढ़ सकती है रेपो रेट
RBI ने बुधवार को 5 से 7 अक्टूबर के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक का कार्यवृत्त जारी किया. इस बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% करने के पक्ष में मतदान किया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है. हालांकि, अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार के बीच महंगाई का बढ़ता दबाव केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के कार्यवृत्त में कहा कि महंगाई का दबाव बढ़ने से आर्थिक विकास की संभावनाओं पर जोखिम पैदा हो सकता है. वहीं, कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट में और बढ़ोतरी की आशंका जताई है.
चार साल बाद RBI ने बढ़ाई ब्याज दर
RBI ने बुधवार को 5 से 7 अक्टूबर के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक का कार्यवृत्त जारी किया. इस बैठक में गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% करने के पक्ष में मतदान किया. फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार था, जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर उम्मीद से बेहतर बनी हुई है, लेकिन महंगाई का जोखिम बढ़ रहा है. वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के मौजूदा माहौल के बीच RBI के लिए मौद्रिक नीति में पर्याप्त अंतर बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो रहा है.
महंगाई का दायरा बढ़ने से बढ़ी चिंता
RBI गवर्नर ने अपने वक्तव्य में महंगाई के व्यापक होने के संकेतों पर चिंता जताई. बैठक के कार्यवृत्त के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की टोकरी में शामिल 37% वस्तुओं की महंगाई दर अगस्त में 4% से अधिक थी. मार्च में ऐसी वस्तुओं का अनुपात केवल 20% था.
यह आंकड़ा संकेत देता है कि महंगाई का दबाव पहले की तुलना में अधिक वस्तुओं तक फैल रहा है. ऐसे में आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ महंगाई को नियंत्रित करना केंद्रीय बैंक के लिए अहम चुनौती बन गया है.
मजबूत अर्थव्यवस्था से RBI को भरोसा
वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है. इसी आधार पर RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान अगस्त में लगाए गए 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है. यह पिछले अनुमान से 0.4 प्रतिशत अंक अधिक है.
केंद्रीय बैंक का मानना है कि अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि के कारण वह विकास दर पर बड़ा नकारात्मक असर पड़े बिना कुछ हद तक मौद्रिक सख्ती को सहन कर सकती है. हालांकि, महंगाई के लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए ब्याज दरों को लेकर आगे का फैसला आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की स्थिति पर निर्भर करेगा.
दिसंबर में फिर बढ़ सकती है रेपो रेट
आने वाले महीनों में रेपो रेट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने अनुमान जताया है कि महंगाई का दबाव जारी रहने पर RBI दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की और बढ़ोतरी कर सकता है. कुछ विश्लेषकों को फरवरी की बैठक में भी इतनी ही बढ़ोतरी की संभावना दिख रही है.
अगर ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो लगातार तीन मौद्रिक नीति बैठकों में कुल 0.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, यह फिलहाल विश्लेषकों का अनुमान है, RBI की ओर से भविष्य की ब्याज दरों को लेकर कोई निश्चित घोषणा नहीं की गई है.
आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े, आर्थिक विकास की गति और वैश्विक परिस्थितियां RBI के अगले फैसले के लिए महत्वपूर्ण होंगी. केंद्रीय बैंक के सामने अब आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और महंगाई पर काबू पाने के बीच संतुलन साधने की चुनौती है.
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